Manju Singh

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भाग्यलेख

पति पत्नी के रिश्ते से बढकर शायद कोई रिश्ता नहीं होता दुनिया में लेकिन ऐसा सिर्फ औरत ही क्यों सोचती है ? क्या य्ह सिर्फ औरतों का ही फर्ज है कि वे हर हाल में रिश्ता निभाएँ।शायद है तो नहीं लेकिन वह अक्सर रिश्ता निभा ही जाती हैं ।

तलाक्नामा

पति पत्नी का रिश्ता सब रिश्तों से अलग एक ऐसा रिश्ता है जिसे तोड़ पाना इतना आसान नहीं होता। यह रिश्ता अनोखा है कभी गुस्सा तो कभी प्यार।

जाग जाओ हे जन गण मन

राममन्दिर आज धार्मिक नहीं एक राजनीतिक मुद्दा बना चुका है।बल्कि कहना गलत नहीं होगा कि उसे मुद्दा बना कर पाला जा रहा है। क्या यह उचित है ?

रीति- रिवाज़

रीति रिवाज़ तभी तक अच्छे लगते हैं जब तक समाज या परिवार को हानि ना पहुंचायें । ऐसे रीति रिवाज़ किस काम के जो जान लेने पर ही आ जाएँ।

झूठी हैं दीवारें

कभी कभी समाज की घटनाएं हमें आईना दिखा देती हैं। अपने आस पास की घटनाओं से सीख लेने वाली कहानी पढ़ें

रिश्ते हों तो ऐसे

बहू को अगर बेटी बना लिया जाये तो सारी दरारें ही भार जाएं इन रिश्तों की। पढ़िए समाज के लिये उदाहरण प्रस्तुत करती कहानी ।

प्रतीक्षा उस दिन की

देश की आज़ादी के इतने साल बाद भी औरत इस देश अपनी आज़ादी की प्रतीक्षा कर रही है ।

ममता की जीत

शादी के दस साल बाद मेरी बेटी माँ बनी और उस वक्त उसे भगवान ने बस बचा ही लिया। बच्चे के भाग्य से जीवन का वरदान पाया उसने।

बचपन और नानी का घर

बचपन एक बार जाता है तो कभी लौट कर नही आता लेकिन उसकी यादें हैं की जाने का नाम नहीं लेतीं। पढ़िए यह रचना जो निश्चय ही आपको आपके बचपन में ले जायेगी ।

बहू बेटी

पीढियों के अन्तर को पाटने और घर की शन्ति बनाये रखने का कितना सही तरीका अपनाया था आशा ने !!

आवाक

दहेज प्रथा हमारे समाज पर एक बदनुमा दाग है। इसका उन्मूलन करने के लिये युवा पीढी को ही आगे आना होगा। पढ़िए लघुकथा 'आवक'

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