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मूक दर्शक

कितनी बार होता है कि हम किसी अच्छाई या बुराई को देख कर उसे अनदेखा कर आगे बढ़ जाते हैं। या फिर रुकते तो हैं पर बस एक मनोरंजन की आशा से।अगर मनोरंगं हो तो अच्छा करना मूक दर्शक बन आगे बढ़ जाते है। कितना सही है हमारा ये व्यवहार?

हां मैं स्त्रीलिंग हूं

क्या दोष है उस भ्रूण क्या? यही की वो स्त्रीलिंग है। यही की वो कुछ कमजोर और हीन मानसिकता के लोगो से जुडी है। जो एक स्त्रीलिंग को पनपने न देने में अपना पौरुष समझते हैं।क्या सोचता होगा वो भ्रूण जब वो ऐसी परिस्थितियों से गुजरता होगा। उसकी भावनाएं कैसी होती होंगी।वो क्या कहना और क्या सुनना चाहता होगा ।

त्रियाचरित्र : वरदान या अभिशाप

"त्रियाचरित्रं पुरुषस्य भाग्यम दैवो न जानती कुतो मनुष्य:"मतलब पुरुष के भाग्य और औरत के त्रियाचरित्र को देवता भी नहीं समझ पाये तो मनुष्य क्या है।

बेटे की चाह में तड़पता मातृत्व

“ नहीं हम ये बच्चा गोद नहीं ले सकते।” “ क्यूँ ?” “ क्यूंकि मुझे एक बेटा चाहिए।” “बेटा!!” “हाँ , बेटा । इतने साल बाद किसी बच्चे के माँ बाप बने और वो भी एक लड़की के ।”

Enough of this One Day

Why there is only One day comes in our life? Why not we do things until they bring changes? Until they bring justice. Until they bring Laws. Until they bring Peace.

मुस्कुराती सी जिंदगी

कहते हैं एक हँसता हुआ चेहरा एक इंसान की शान होता है। और उसकी मुस्कान उसकी पहचान। आपके लिए क्या मायने हैं इस मुस्कान के? पढ़िए में क्या सोचती हूं इस मुस्कान के बारे में।

डर लगता है

हम भले ही कह ले की आज हर कोई अकेला है लेकिन ये भी सच है कि कहीं न कहीं वो अपने अंदर एक डर भी समेटे हुए है।

बाबुल ना बिहाओ मोहे ओ संग

एक पिता ने अपने ऊँचे रसूक और जात पात के लिए अपनी बेटी को उसके प्यार से अलग कर दिया।  और बेटी ने भी अपने पिता के मान के लिए स्वीकार ली अपने प्यार से जुदाई। कर ली अपने पिता के समाज के लड़के से शादी। पर ऐसा क्या हुआ की आज वही बेटी एक बार फिर से दुल्हन बनी।

MY NAME IS SHANTI AND I AM AN ANGRY GODDESS

THIS STORY IS ABOUT A LADY, WHO FIGHT FOR HERSELF, FOR HER DIGNITY, FOR HER IDENTITY. WHO GIVE A BIG FIGHTS TO ALREADY ESTABLISHED NOTIONS IN A SOCIETY. HER STORY TELLS SOCIETY, ITS NOT NAME THAT DOES MATTERS ITS ACTS THAT HAS THE MEANING AND IDENTITY.

तेरा साथ

एक लड़की का जीवन दो परिवारों की समझ और व्यवहार पर निर्भर करता है-एक माता पिता और दूसरा पति। माता पिता अपनी बेटी को शायद इसी लिए कोसते हैं कि उनको उसके पैदा होने के साथ ही उसके पति और ससुराल कैसा होगा का डर सताने लग जाता है।

एक उम्मीद फिर से हारी

उम्मीद हम सब की सांझी होती है। बस उसके पूरे होने या न होने का फर्क होता है। उम्मीद जो हम सबको कभी न कभी किसी न किसी से हुई होगी। कभी यह उम्मीद हमे बनाती हैं तो कभी तोड़ती हैं। इसी से हम जीतते हैं और इसी से हारते। ऐसी ही कुछ उम्मीद थी गोरखपुर के परिवारों की, जिन्होंने हार कर दम तोड़ दिया।

Some info about EmotionSeeker

  • Female
  • 13/11/1978

कभी उलझनों में उलझ जाता है ये मन तो कभी जिंदगी के पहलू डरा जाते हैं। और फिर इन्ही सब उलझनों, पहलुओं ,सवालों जवाबों के बीच मेरे दिमाग में जो शब्दों की हेरा फेरी होती है, वह कभी मुझे हैरान, तो कभी शांत करती है। A poet and a writer in learning . Hope you like my write-up and you might get your part of solved questions answers. Do follow me.

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