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बाबुल ना बिहाओ मोहे ओ संग

एक पिता ने अपने ऊँचे रसूक और जात पात के लिए अपनी बेटी को उसके प्यार से अलग कर दिया।  और बेटी ने भी अपने पिता के मान के लिए स्वीकार ली अपने प्यार से जुदाई। कर ली अपने पिता के समाज के लड़के से शादी। पर ऐसा क्या हुआ की आज वही बेटी एक बार फिर से दुल्हन बनी।

MY NAME IS SHANTI AND I AM AN ANGRY GODDESS

THIS STORY IS ABOUT A LADY, WHO FIGHT FOR HERSELF, FOR HER DIGNITY, FOR HER IDENTITY. WHO GIVE A BIG FIGHTS TO ALREADY ESTABLISHED NOTIONS IN A SOCIETY. HER STORY TELLS SOCIETY, ITS NOT NAME THAT DOES MATTERS ITS ACTS THAT HAS THE MEANING AND IDENTITY.

तेरा साथ

एक लड़की का जीवन दो परिवारों की समझ और व्यवहार पर निर्भर करता है-एक माता पिता और दूसरा पति। माता पिता अपनी बेटी को शायद इसी लिए कोसते हैं कि उनको उसके पैदा होने के साथ ही उसके पति और ससुराल कैसा होगा का डर सताने लग जाता है।

एक उम्मीद फिर से हारी

उम्मीद हम सब की सांझी होती है। बस उसके पूरे होने या न होने का फर्क होता है। उम्मीद जो हम सबको कभी न कभी किसी न किसी से हुई होगी। कभी यह उम्मीद हमे बनाती हैं तो कभी तोड़ती हैं। इसी से हम जीतते हैं और इसी से हारते। ऐसी ही कुछ उम्मीद थी गोरखपुर के परिवारों की, जिन्होंने हार कर दम तोड़ दिया।

बुंदाबांदी

सावन का महीना और हरियाली, वो झूमते पेड़ वो झूले पड़ी डाली , वो मयूर नाच वो गीत मल्हार, वो सजीव की भक्ति वो साजन का साथ, वो भाई का प्यार वो मायके की याद , वो वो बादल का आना वो सूरज का चुप जाना। और भी न जाने क्या क्या होता है इस सावन के महीने और इसमें होने वाली बुंदाबांदी के बीच । 

ज़ालिम परिंदा

क्या आपकी जिंदगी में भी है कोई जालिम परिंदा ?

सुलह

क्या हर बार सॉरी कह देने से सब ठीक हो जाता है!?

Let Me Be Me

This poem is a voice of every women who wants to live life she wants to live. She wants to be accepted as what she is. She wants to live her dreams and desires. She wand to ditch those invaded thoughts who are coming half way from behind to stop her from winning.

कोई होता

कभी किसी और का आपमें विश्वास रखना आपकी जिंदगी की बुझती हुई लौ को फिर से रौशन कर देता है। क्या आपको भी तलाश है ऐसे किसी अपने की!?

तोड़ दे चुप्पी

उम्मीद है कि यह कविता उन सभी औरतों का दर्द बयां कर पाए जो एक घर की, एक रिश्ते की चार दिवारी में कैद हैं। शायद मेरी यह कुछ पंक्तियां उनमे नयी उम्मीद का सृजन कर उनको उनकी चुप्पी तोड़ने को प्रेरित कर दे।

उसे पढ़ना है

जहाँ हम शिक्षा में अंकों और प्रतिस्पर्धा की बहस में लगे हुए हैं वहीँ कुछ मासूम ऐसे भी हैं जो पढ़ना चाहते हुए भी नहीं पढ़ पा रहे हैं। शिक्षा ही एकमात्र ऐसा अचूक बाण है जो हर बुराई हर नफरत हर भ्रष्टाचार, आतंकवाद ,हर असमानता , हिंसा या अमानवता को समाप्त कर सकती है।

शब्द

किसी के शब्द नयी उमंग से भर देते हैं तो किसी के आत्मा को तोड़ देते हैं। किसी ने सही ही कहा है ’ऐसी बानी बोलिये मन का आपा खोय, औरन को शीतल करे आपहु शीतल होय ‘।

Some info about EmotionSeeker

  • Female
  • 13/11/1978

कभी उलझनों में उलझ जाता है ये मन तो कभी जिंदगी के पहलू डरा जाते हैं। और फिर इन्ही सब उलझनों, पहलुओं ,सवालों जवाबों के बीच मेरे दिमाग में जो शब्दों की हेरा फेरी होती है, वह कभी मुझे हैरान, तो कभी शांत करती है। A poet and a writer in learning . Hope you like my write-up and you might get your part of solved questions answers. Do follow me.

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