Akash Gaurav

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रेत की सिलवटें

वो उजली सुबह जो वक्त अंधेरों से लड़ रही थी, एक शाम स्याह होकर रात बन गई और अपने ही अंधेरे में गुम हो गई।

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  • Male
  • 20/02/1998

कभी सोचा था बड़े होकर किस्से बनेंगे, वक्त आया तो किस्सों ने हमें बुन दिया।

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