YOUR STORY

आंतकी घटनाएं और भारतीय सेना का धैर्य

harish999   32 views   7 months ago

जब ख़ामोशी में सुलगते अंगारे और दिल ही दिल में सिसकते शहीदों के परिजनों की बददुआ बाहर निकलेगी तब क्या होगा.

पापा के लिये

dhirajjha123   4 views   7 months ago

निडरता इंसान में समय के साथ अपने आप आ जाती है | परिस्थितियाँ खुद लड़ना सिखा देती हैं | बच्चपन में बड़ा डरपोक था अकेलो सोना तो सीखा ही नही था कभी |

मरने के बाद सम्मान

dhirajjha123   20 views   7 months ago

​मरने के बाद सम्मान होगा मेरे शब्दों को तवज्जो तब मिलेगी

अंतर्द्वंद

saurabh1988   32 views   7 months ago

मनोस्तिथि सामाजिक पीड़ा से ग्रसित जिसमे समावेशन है कुंठा और निराशा और भावुकता का

पापा

dhirajjha123   2 views   7 months ago

​पहले ही क्षमा के साथ ये बात बता दूँ की कुछ महीनों तक जब मेरे सामने उन मनहूस दिनो की कोई पोस्ट आएगी तो मैं पापा पर ना चाहते हुए भी लिखने पर मजबूर हो जाऊँगा । क्या करूँ खुद से अपना हाल कह कह कर थक गया हूँ इसीलिए यहाँ लिखने पर मजबूर हो जाता हूँ ।

“पिता से पहले पिता के बाद”

dhirajjha123   17 views   7 months ago

डेढ महीने हस्पतालों चक्कर काटे थे उन भाईयों ने अपने पिता को लेकर । वो पिता जिसका घूरना ही काफी होता था इन बेटों के मन में वो डर पैदा करने के लिए जो एक बाप को लेकर हर बेटे में होता है उस बाप को थप्पड़ तक मारे थे इन बेटों ने ।

माँ तुम जादूगर हो…

dhirajjha123   5 views   7 months ago

मन ही मन कहता रहा माँ तुम जादूगर हो ना जाने कहाँ से लाती हो इतनी हिम्मत | माँ सचमें तुम से बहुत प्यार है बहुत ज़्यादा |

माँ

dhirajjha123   7 views   7 months ago

माँ को शुरू से ही कभी ज़्यादा मेकअॅप वेकअॅप करते नही देखा । उन्हे कभी से रुचि ही नही रही या फिर शायद हम सब की छोटी छोटी ज़रूरतें पूरी करने और घर के काम काज के बीच ऐसा उलझी की उन्हे कभी खुद को संवारने का मौका ही नही मिला ।

पुराने किस्से

dhirajjha123   2 views   7 months ago

​पूरे साल भर पहले की बात है उसके बाद बहुत कुछ बदला पर लोग और उनके हाल अभी भी बदलाव की उम्मीद वाले किनारे पर ही खड़े हैं । सफर की घटना

पटना वाला प्यार

abhi92dutta   234 views   7 months ago

पटना के सभी लड़के और लड़कियों को समर्पित यह रचना । पटना में रहने वाले सभी लोग अपने अपने समय में इस दौर से जरूर गुज़रे होंगे । उन सभी यादों को फिर से एक कहानी के रूप में ...

| बधिर भगवान | Advit Tiple |

advit   11 views   7 months ago

Poem on recent issue arose by tweet of Mr. Sonu Nigam

माफ करना

dhirajjha123   25 views   7 months ago

माफ़ कर देना मुझे ये दर्द ना लिख पाऊँगा थोड़ी वाह वाही के लिए इस बार ना बिक पाऊँगा कैसे लिखूँगा एक बेबस से पिता के दर्द को कैसे बयान करूँगा

​चलो मर जाऐं

dhirajjha123   4 views   7 months ago

अपनी चीखों को दबा लो टूटती सांसों को थम जाने दो

​ना जाने क्यों ?

dhirajjha123   3 views   7 months ago

सुख और दुःख तो एक सिक्के के दो पहलुओं के समान हैं इनका आना जाना तो जीवन में लगा रहता है मगर जब खुशियाँ एक दम से एक ही दिन में किसी से एकदम किनारा कर लें तब इंसान अपने उस दुःख और दर्द को बयान करने की हालत में भी नही रहता ।

बात भले कल की हो वास्ता आज से ही है…

dhirajjha123   6 views   7 months ago

वर्ना तुम्हारा ये ख़ामोश रहना आने वाली नस्ल को पूरी तरह कर बर्बाद देगा

रीयूनियन

abhi92dutta   57 views   7 months ago

बचपन के चार दोस्त । पंद्रह साल बाद “रीयूनियन” का प्लान ।

एक मुलाकात

abhi92dutta   68 views   7 months ago

महानगरों के जीवन का अनछुआ पहलु । एक काला सच

मुलाक़ात

saurabh1988   27 views   7 months ago

शायद मेरे हिसाब से कुछ मुलाकातें न ही होती तो अच्छा होता ।

वक्त

dhirajjha123   21 views   7 months ago

एक एक कर के उन दिनों की सारी यादें आखों के सामने थीं जब ज़िंदगी ने अभिनव से सब कुछ छीन कर बदले में मौत तक भी नही दी थी | पिता की अचानक से कार एक्सीडेंट में मृत्यु हो गई | और उनके कर्ज़ में फैक्टरी ज़मीन सब बिक गई पास बचे तो कुछ पैसे और एक मां जो पल पल मौत से लड़ रही थी

अजीब दुनिया अजीब रिश्ते

dhirajjha123   51 views   7 months ago

यहाँ कुछ बेटे हैं जो अपने पिता को वापिस पाने के लिए दिन रात रोते हैं और यहीं कुछ बेटे हैं जिनकी आँखों में पिता को देखते ही खून उतर आता है ।

अस्पृश्यता Vs आरक्षण

advit   9 views   8 months ago

Its a conservative mind set of people towards downtrodden

​खेल नियती का

dhirajjha123   5 views   8 months ago

बात तकरीबन साठ साल पुरानी होगी भारत को आज़ाद हुए महज़ कुछ साल ही हुए थे, अर्थव्यवस्था पूरी तरह से अपाहिज थी जिस कारण बेरोज़गारी अपने चरम पर थी

कुछ पूछ लूं मां से

gourav11698   28 views   8 months ago

मां. ..जो जगत जननी है, जगत की पालनहार है, जो कभी नहीं थकती, आज उससे कुछ पुछने का मन हो रहा है, कैसे करती है वो ये सब! सुबह सबसे पहले उठकर रात सबसे बाद में सोना हर काम का याद रहना,कभी न हारना और हर पल मुस्कराना कैसे करती हो तुम मेरी मां 🙏🙏

घर वाकई स्वर्ग है

dhirajjha123   44 views   8 months ago

घर में घुसते ही पापा वाला खाली पलंग जब तक रुलाए तब तक माँ की मुझे देख चमकती आँखें मुस्कुराने पर मजबूर कर देती हैं और लगता है माँ में ही कहीं पापा भी बाहें फैलाए सीने से लगाने को बेचैन हैं