YOUR STORY

माँ तुम जादूगर हो…

dhirajjha123   5 views   7 months ago

मन ही मन कहता रहा माँ तुम जादूगर हो ना जाने कहाँ से लाती हो इतनी हिम्मत | माँ सचमें तुम से बहुत प्यार है बहुत ज़्यादा |

इत्रसाज की बेटी

kumarg   54 views   6 months ago

खाला सुबह ही धमका गई है अम्मी को ,अब चालीस रोज घर से बाहर मत निकलना । वो दिन चढ़े चुपचाप लेटी रही की शायद खाना बन जाने के बाद अम्मी उठ जाने की चिरौरी करेगी । लेकिन दस बजे के करीब अम्मी भी बगल में आकर लेट गई । कुछ देर में ही अम्मी के खर्राटे गुंजने लगे ।

पापा

dhirajjha123   2 views   7 months ago

​पहले ही क्षमा के साथ ये बात बता दूँ की कुछ महीनों तक जब मेरे सामने उन मनहूस दिनो की कोई पोस्ट आएगी तो मैं पापा पर ना चाहते हुए भी लिखने पर मजबूर हो जाऊँगा । क्या करूँ खुद से अपना हाल कह कह कर थक गया हूँ इसीलिए यहाँ लिखने पर मजबूर हो जाता हूँ ।

पटना वाला प्यार

abhi92dutta   234 views   7 months ago

पटना के सभी लड़के और लड़कियों को समर्पित यह रचना । पटना में रहने वाले सभी लोग अपने अपने समय में इस दौर से जरूर गुज़रे होंगे । उन सभी यादों को फिर से एक कहानी के रूप में ...

लोगों का न्याय

sunilakash   314 views   1 month ago

वह निर्दोष व्यक्ति जिसने इंसाफ की बात कही थी, लोगों की मार से छूटने के लिए छटपटा रहा था और वहां मौजूद लोग अब भीड़ में मिलकर या तो तमाशा देख रहे थे, या उसे पीट रहे थे।

अंतर्द्वंद

saurabh1988   32 views   7 months ago

मनोस्तिथि सामाजिक पीड़ा से ग्रसित जिसमे समावेशन है कुंठा और निराशा और भावुकता का

वो मैला सा आदमी

nidhi   191 views   2 months ago

उसका आत्मसम्मान और ईमानदारी मुझे किसी पढ़े लिखे इंसान से ज्यादा प्रभावित कर रही थी।। हमारी दिखावटी पीढ़ी में कुछ लोग उस आदमी के मैले कपड़ो से भी ज्यादा मैले मन लेकर घुमते हैं

WHERE DOES AKRAM MALIK STAY?

mehakmirzaprabhu   15 views   5 months ago

Stories reflecting today's times of fear, mistrust and love

घर वाकई स्वर्ग है

dhirajjha123   44 views   8 months ago

घर में घुसते ही पापा वाला खाली पलंग जब तक रुलाए तब तक माँ की मुझे देख चमकती आँखें मुस्कुराने पर मजबूर कर देती हैं और लगता है माँ में ही कहीं पापा भी बाहें फैलाए सीने से लगाने को बेचैन हैं

माँ

dhirajjha123   7 views   7 months ago

माँ को शुरू से ही कभी ज़्यादा मेकअॅप वेकअॅप करते नही देखा । उन्हे कभी से रुचि ही नही रही या फिर शायद हम सब की छोटी छोटी ज़रूरतें पूरी करने और घर के काम काज के बीच ऐसा उलझी की उन्हे कभी खुद को संवारने का मौका ही नही मिला ।

एक मुलाकात

abhi92dutta   68 views   7 months ago

महानगरों के जीवन का अनछुआ पहलु । एक काला सच

“पिता से पहले पिता के बाद”

dhirajjha123   17 views   7 months ago

डेढ महीने हस्पतालों चक्कर काटे थे उन भाईयों ने अपने पिता को लेकर । वो पिता जिसका घूरना ही काफी होता था इन बेटों के मन में वो डर पैदा करने के लिए जो एक बाप को लेकर हर बेटे में होता है उस बाप को थप्पड़ तक मारे थे इन बेटों ने ।

रीयूनियन

abhi92dutta   57 views   7 months ago

बचपन के चार दोस्त । पंद्रह साल बाद “रीयूनियन” का प्लान ।

मुखर्जी नगर- सपनों का नगर

kapilsharma   111 views   4 months ago

मुखर्जी नगर, दिल्ली में स्थित है, जो कि लोक प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी हेतु प्रसिद्ध है।

​ना जाने क्यों ?

dhirajjha123   3 views   7 months ago

सुख और दुःख तो एक सिक्के के दो पहलुओं के समान हैं इनका आना जाना तो जीवन में लगा रहता है मगर जब खुशियाँ एक दम से एक ही दिन में किसी से एकदम किनारा कर लें तब इंसान अपने उस दुःख और दर्द को बयान करने की हालत में भी नही रहता ।

बात भले कल की हो वास्ता आज से ही है…

dhirajjha123   6 views   7 months ago

वर्ना तुम्हारा ये ख़ामोश रहना आने वाली नस्ल को पूरी तरह कर बर्बाद देगा

एक स्नेह यह भी.... ----

rgsverma   187 views   4 months ago

स्मृतियाँ कितनी विचित्र होती हैं.न चाहते हुए भी साथ नहीं छोड़ती . और अगर चाहो तो याद नहीं आती. अच्छी स्मृतियाँ तो यूँ धूमिल हो भी सकती हैं, पर कुछ दु:खद और कडूआहट भरी अथवा जटिल-सी स्मृतियाँ तो इंसान पूरी जिन्दगी ढोता रहता है, और वह बस निर्लज्जता से जुड़ी रहती हैं, हमारे साथ, हर समय. 

बदलते बारिश के मायने..

kavita   93 views   3 months ago

बचपन से युवावस्था और बच्ची से विवाहिता बन जाने के मध्य ..आये छोटे छोटे मनोभावों का वर्णन

अजीब दुनिया अजीब रिश्ते

dhirajjha123   51 views   8 months ago

यहाँ कुछ बेटे हैं जो अपने पिता को वापिस पाने के लिए दिन रात रोते हैं और यहीं कुछ बेटे हैं जिनकी आँखों में पिता को देखते ही खून उतर आता है ।

​चलो मर जाऐं

dhirajjha123   4 views   7 months ago

अपनी चीखों को दबा लो टूटती सांसों को थम जाने दो

बड़े बड़े लोग

Rajeev Pundir   889 views   3 days ago

निम्न मध्य श्रेणी के लोग संपन्न लोगों के बारे में क्या सोचते हैं, पढ़िए एक ऐसे ही इंसान की खिन्नता को दर्शाती इस कहानी में।

बस इश्क़

saurabh1988   27 views   7 months ago

ये बस इश्क़ है 😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊

माफ करना

dhirajjha123   25 views   7 months ago

माफ़ कर देना मुझे ये दर्द ना लिख पाऊँगा थोड़ी वाह वाही के लिए इस बार ना बिक पाऊँगा कैसे लिखूँगा एक बेबस से पिता के दर्द को कैसे बयान करूँगा

पक्की सड़क(कहानी)

rahulsingh   47 views   7 months ago

कई लोगों ने कहा_"मास्टरजी आप भी क्यों इतना शारीरिक कष्ट करते हैं, मोटरसाईकिल ख़रीद लीजिये। ख़ाली हाज़िरी ही तो लेनी होती है, मोटरसाईकिल ले लीजियेगा तो और जल्दी लौट आइयेगा, समय बर्बाद नहीं होगा।