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“पिता से पहले पिता के बाद”

dhirajjha123   25 views   2 years ago

डेढ महीने हस्पतालों चक्कर काटे थे उन भाईयों ने अपने पिता को लेकर । वो पिता जिसका घूरना ही काफी होता था इन बेटों के मन में वो डर पैदा करने के लिए जो एक बाप को लेकर हर बेटे में होता है उस बाप को थप्पड़ तक मारे थे इन बेटों ने ।

माफ करना

dhirajjha123   25 views   2 years ago

माफ़ कर देना मुझे ये दर्द ना लिख पाऊँगा थोड़ी वाह वाही के लिए इस बार ना बिक पाऊँगा कैसे लिखूँगा एक बेबस से पिता के दर्द को कैसे बयान करूँगा

"बस... उस पल का तुम इंतजार करना"

ankitg   22 views   2 years ago

ये मेरे जीवन की पहली स्वरचित कविता है जिसे मैंने एक संदेशात्मक रूप में लिखा है या यूँ कहें कि ये मेरा पहला प्रेम पत्र है जिसे मैंने उस लड़की के लिए लिखा है जिससे मैं बेइंतेहा मोहब्बत करता हूँ

मरने के बाद सम्मान

dhirajjha123   21 views   2 years ago

​मरने के बाद सम्मान होगा मेरे शब्दों को तवज्जो तब मिलेगी

राजनीति के Romeo

advit   17 views   2 years ago

It is a view of aam aadmi, facing the issues in UP

माँ तुम जादूगर हो…

dhirajjha123   15 views   2 years ago

मन ही मन कहता रहा माँ तुम जादूगर हो ना जाने कहाँ से लाती हो इतनी हिम्मत | माँ सचमें तुम से बहुत प्यार है बहुत ज़्यादा |

I bleed, I bleed, I bleed

abhilasha verma   15 views   2 years ago

The following piece is a direct answer to GST, 2017.

रुखसती

gaurav97p   15 views   2 years ago

ये रचना हैं उन सभी को समर्पित है जो समाज के झूठे मुखोटे के शिकार होते हैं अच्छा है नियम बनाना लेकिन ऐसा न हो की जो नियम जीने के लिए बनाये हैं उसके लिए आप उन प्रेम करने वालो की ज़िन्दगी बर्बाद कर दे जो सच में नहीं जी सकते हैं एक दूजे के बिना ||

पुराने किस्से

dhirajjha123   14 views   2 years ago

​पूरे साल भर पहले की बात है उसके बाद बहुत कुछ बदला पर लोग और उनके हाल अभी भी बदलाव की उम्मीद वाले किनारे पर ही खड़े हैं । सफर की घटना

​खेल नियती का

dhirajjha123   11 views   2 years ago

बात तकरीबन साठ साल पुरानी होगी भारत को आज़ाद हुए महज़ कुछ साल ही हुए थे, अर्थव्यवस्था पूरी तरह से अपाहिज थी जिस कारण बेरोज़गारी अपने चरम पर थी

| बधिर भगवान | Advit Tiple |

advit   11 views   2 years ago

Poem on recent issue arose by tweet of Mr. Sonu Nigam

पापा के लिये

dhirajjha123   10 views   2 years ago

निडरता इंसान में समय के साथ अपने आप आ जाती है | परिस्थितियाँ खुद लड़ना सिखा देती हैं | बच्चपन में बड़ा डरपोक था अकेलो सोना तो सीखा ही नही था कभी |

नज़्म

gaurav97p   9 views   2 years ago

प्रेम में भी एक तन्हाई है पीड़ा है जो इससे सहन कर लेता है और प्रेम को पा लेता है वो ही सत्यार्थ प्रेम का हकदार है।।

अस्पृश्यता Vs आरक्षण

advit   9 views   2 years ago

Its a conservative mind set of people towards downtrodden

ECHOES

troubleseeker11   9 views   2 years ago

It is a love story that was not permitted to flourish by the legions of different religions.