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जबाब

mrinal   38 views   11 months ago

जैसे ही बड़का ठेकेदार फटफटिया से उतरा, दुलरिया झटकती हुई उसके पास पहुँच गयी।

दीदी_की_शादी

mrinal   38 views   10 months ago

१०वीं का रिजल्ट निकले हफ्ता बीत चुका था किंतु घर में फैला सन्नाटा अभी भी बाकी था। ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी की मौत हो गयी हो। रवि जिसके बारे में सब आशा कर रहे थे कि ९०% अंक लायेगा, वह फेल हो चुका था।

मुलाक़ात

saurabh1988   36 views   1 year ago

शायद मेरे हिसाब से कुछ मुलाकातें न ही होती तो अच्छा होता ।

अंतर्द्वंद

saurabh1988   33 views   11 months ago

मनोस्तिथि सामाजिक पीड़ा से ग्रसित जिसमे समावेशन है कुंठा और निराशा और भावुकता का

आंतकी घटनाएं और भारतीय सेना का धैर्य

harish999   32 views   11 months ago

जब ख़ामोशी में सुलगते अंगारे और दिल ही दिल में सिसकते शहीदों के परिजनों की बददुआ बाहर निकलेगी तब क्या होगा.

"दया ही सभी धर्मों का मूल है"

shivamtiwari   32 views   8 months ago

एक अनुभूति है मूक पशुओं की दुर्दशा देखकर। वो पशु जो अकारण ही दंड के भागी बनते हैं और 'अभिव्यक्ति' से भी वंचित रहते हैं।

कुछ पूछ लूं मां से

gourav11698   31 views   1 year ago

मां. ..जो जगत जननी है, जगत की पालनहार है, जो कभी नहीं थकती, आज उससे कुछ पुछने का मन हो रहा है, कैसे करती है वो ये सब! सुबह सबसे पहले उठकर रात सबसे बाद में सोना हर काम का याद रहना,कभी न हारना और हर पल मुस्कराना कैसे करती हो तुम मेरी मां 🙏🙏

SAVE THE BOY CHILD!

mehakmirzaprabhu   30 views   11 months ago

"He sounded unsure, excited, scared, all at the same time. Hassan lay with his chest pinned to the ground. Kamal and Wali each gripped an arm, twisted and bent at the elbow so that Hassan's hands were pressed to his back.

बस इश्क़

saurabh1988   29 views   11 months ago

ये बस इश्क़ है 😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊

वक्त

dhirajjha123   26 views   1 year ago

एक एक कर के उन दिनों की सारी यादें आखों के सामने थीं जब ज़िंदगी ने अभिनव से सब कुछ छीन कर बदले में मौत तक भी नही दी थी | पिता की अचानक से कार एक्सीडेंट में मृत्यु हो गई | और उनके कर्ज़ में फैक्टरी ज़मीन सब बिक गई पास बचे तो कुछ पैसे और एक मां जो पल पल मौत से लड़ रही थी

माफ करना

dhirajjha123   25 views   1 year ago

माफ़ कर देना मुझे ये दर्द ना लिख पाऊँगा थोड़ी वाह वाही के लिए इस बार ना बिक पाऊँगा कैसे लिखूँगा एक बेबस से पिता के दर्द को कैसे बयान करूँगा

"बस... उस पल का तुम इंतजार करना"

ankitg   22 views   9 months ago

ये मेरे जीवन की पहली स्वरचित कविता है जिसे मैंने एक संदेशात्मक रूप में लिखा है या यूँ कहें कि ये मेरा पहला प्रेम पत्र है जिसे मैंने उस लड़की के लिए लिखा है जिससे मैं बेइंतेहा मोहब्बत करता हूँ

તારી વાર્તા મારું જીવન

ashutosh   20 views   3 months ago

ગુજરાતી શીખવવાનો આગ્રહ રાખતા પિતા પુત્રી ની વાર્તા

मरने के बाद सम्मान

dhirajjha123   20 views   11 months ago

​मरने के बाद सम्मान होगा मेरे शब्दों को तवज्जो तब मिलेगी

“पिता से पहले पिता के बाद”

dhirajjha123   19 views   1 year ago

डेढ महीने हस्पतालों चक्कर काटे थे उन भाईयों ने अपने पिता को लेकर । वो पिता जिसका घूरना ही काफी होता था इन बेटों के मन में वो डर पैदा करने के लिए जो एक बाप को लेकर हर बेटे में होता है उस बाप को थप्पड़ तक मारे थे इन बेटों ने ।