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वो मैला सा आदमी

nidhi   220 views   1 year ago

उसका आत्मसम्मान और ईमानदारी मुझे किसी पढ़े लिखे इंसान से ज्यादा प्रभावित कर रही थी।। हमारी दिखावटी पीढ़ी में कुछ लोग उस आदमी के मैले कपड़ो से भी ज्यादा मैले मन लेकर घुमते हैं

एक स्नेह यह भी.... ----

rgsverma   214 views   2 years ago

स्मृतियाँ कितनी विचित्र होती हैं.न चाहते हुए भी साथ नहीं छोड़ती . और अगर चाहो तो याद नहीं आती. अच्छी स्मृतियाँ तो यूँ धूमिल हो भी सकती हैं, पर कुछ दु:खद और कडूआहट भरी अथवा जटिल-सी स्मृतियाँ तो इंसान पूरी जिन्दगी ढोता रहता है, और वह बस निर्लज्जता से जुड़ी रहती हैं, हमारे साथ, हर समय. 

अखबार वाला

mmb   202 views   1 year ago

नौकरी या व्यवसाय कोई भी हो पूरी निष्ठा के साथ काम करना चाहिए। अखबार वाला न चाहते हुए भी अखबार बांट रहा था।

प्रारब्ध

rgsverma   201 views   2 years ago

हालांकि ठाकुर साब से मेरी मित्रता अधिक पुरानी भी नहीं थी. मात्र लगभग साढ़े तीन साल हुए थे, उनसे मुलाक़ात हुए, और वह भी वाकिंग प्लाजा में. कॉलोनी का यह पार्क टहलने वालों के लिए स्वर्ग से कम नहीं था.

दागदार हसीन चेहरा

swa   181 views   2 years ago

इतनी खूबसूरत भगवान किसी किसी को खूबसूरती भी बेशुमार देता है मैं उसकी झील सी आंखों में डूब कर खो जाना चाहता था हर पल हर घड़ी अब बस मुझे उसी का ख्याल रहता था

किडनी के पत्थर

prakash   168 views   1 year ago

मनोशारीरिक भाव में “किडनी के पत्थर” उन आंसुओं का मूर्त रूप है जो समय पर बहे नहीं, जिन्हें हमने अपने भीतर दबा दिया? हमारे शरीर की उर्जा मनोशरीर से मुक्त नहीं हो पायी, उसने पथरी का आकर ले लिया, वह सख्त हो गयी l

कहानी— सोच के दायरे

varmangarhwal   162 views   2 years ago

दोपहर के एक बजे बैंगलोर रेल्वे स्टेशन के टिकट काउंटर से टिकट लेकर उम्र में पच्चीस(25) साल का क्लीन शेव चेहरे वाला सुन्दर हाथ में ऑफ़िस बैग लिये प्लेटफार्म पर आकर चेयर पर बैठ गया.

...रामकिशोर ड्राईवर

rgsverma   148 views   2 years ago

अगर रामकिशोर का हुलिया आपको बताया जाये तो मेरे सहित कुछ लोगों की राय थी कि वह अपने समय में तमिलनाडु के कुख्यात दस्यु सम्राट वीरप्पन का मिनी रूप लगता था...

मुखर्जी नगर- सपनों का नगर

kapilsharma   139 views   2 years ago

मुखर्जी नगर, दिल्ली में स्थित है, जो कि लोक प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी हेतु प्रसिद्ध है।

एक स्वप्न की मौत

rgsverma   136 views   2 years ago

"...मैं जब भी दिल्ली जाता सुरभि से मुलाकात जरूर होती. वह अपनी व्यस्तता के बावजूद मेरे लिये समय निकालती और हम सब मिलकर कुछ अदद मिली-जुली यादों में उलझ जाते. सुनिधि ने सुरभि को अपना प्यार और ममता उड़ेलने का एक और जरिया प्रदान कर दिया था.... "

कण्डोमविज्ञापन बैन

nis1985   131 views   1 year ago

कंडोम के विज्ञापन पर बैन बहुत ही बढ़िया खबर है, रात के 10बजे के बाद दिखाया जाएगा और जरूरी भी है

पिक्सी

Manju Singh   131 views   1 year ago

मेरा प्यारा पिक्सी,कभी सोचा भी कहाँ था की उसके बिना रहना पड़ेगा। आज उसके जाने के बाद लगता है जैस्र दुनिया ही सूनी हो गयी ।

काश तुम्हें रोक पाती

abhi92dutta   118 views   2 years ago

ज़िन्दगी में इतना आगे बढ़ जाना , जब बचपन के दोस्त के बारे में पता चला तो फिर आँसू रुके ही नहीं ।।

बाबूजी वो गुड़िया ला दो

nis1985   109 views   2 years ago

आज छुटकी ने फिर से अपने मजदूर पिता से एक फरमाइश करदी....बाबुजी आज तो हमको वो गुड़िया ही चाहिये बस जो हमने दुकान पे देखी थी...

बदलते बारिश के मायने..

kavita   98 views   2 years ago

बचपन से युवावस्था और बच्ची से विवाहिता बन जाने के मध्य ..आये छोटे छोटे मनोभावों का वर्णन