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प्रारब्ध

rgsverma   194 views   9 months ago

हालांकि ठाकुर साब से मेरी मित्रता अधिक पुरानी भी नहीं थी. मात्र लगभग साढ़े तीन साल हुए थे, उनसे मुलाक़ात हुए, और वह भी वाकिंग प्लाजा में. कॉलोनी का यह पार्क टहलने वालों के लिए स्वर्ग से कम नहीं था.

अखबार वाला

mmb   191 views   6 months ago

नौकरी या व्यवसाय कोई भी हो पूरी निष्ठा के साथ काम करना चाहिए। अखबार वाला न चाहते हुए भी अखबार बांट रहा था।

दागदार हसीन चेहरा

swa   177 views   11 months ago

इतनी खूबसूरत भगवान किसी किसी को खूबसूरती भी बेशुमार देता है मैं उसकी झील सी आंखों में डूब कर खो जाना चाहता था हर पल हर घड़ी अब बस मुझे उसी का ख्याल रहता था

किडनी के पत्थर

prakash   161 views   6 months ago

मनोशारीरिक भाव में “किडनी के पत्थर” उन आंसुओं का मूर्त रूप है जो समय पर बहे नहीं, जिन्हें हमने अपने भीतर दबा दिया? हमारे शरीर की उर्जा मनोशरीर से मुक्त नहीं हो पायी, उसने पथरी का आकर ले लिया, वह सख्त हो गयी l

...रामकिशोर ड्राईवर

rgsverma   146 views   8 months ago

अगर रामकिशोर का हुलिया आपको बताया जाये तो मेरे सहित कुछ लोगों की राय थी कि वह अपने समय में तमिलनाडु के कुख्यात दस्यु सम्राट वीरप्पन का मिनी रूप लगता था...

कण्डोमविज्ञापन बैन

nis1985   130 views   4 months ago

कंडोम के विज्ञापन पर बैन बहुत ही बढ़िया खबर है, रात के 10बजे के बाद दिखाया जाएगा और जरूरी भी है

एक स्वप्न की मौत

rgsverma   128 views   9 months ago

"...मैं जब भी दिल्ली जाता सुरभि से मुलाकात जरूर होती. वह अपनी व्यस्तता के बावजूद मेरे लिये समय निकालती और हम सब मिलकर कुछ अदद मिली-जुली यादों में उलझ जाते. सुनिधि ने सुरभि को अपना प्यार और ममता उड़ेलने का एक और जरिया प्रदान कर दिया था.... "

पिक्सी

Manju Singh   128 views   5 months ago

मेरा प्यारा पिक्सी,कभी सोचा भी कहाँ था की उसके बिना रहना पड़ेगा। आज उसके जाने के बाद लगता है जैस्र दुनिया ही सूनी हो गयी ।

मुखर्जी नगर- सपनों का नगर

kapilsharma   119 views   8 months ago

मुखर्जी नगर, दिल्ली में स्थित है, जो कि लोक प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी हेतु प्रसिद्ध है।

कहानी— सोच के दायरे

varmangarhwal   112 views   11 months ago

दोपहर के एक बजे बैंगलोर रेल्वे स्टेशन के टिकट काउंटर से टिकट लेकर उम्र में पच्चीस(25) साल का क्लीन शेव चेहरे वाला सुन्दर हाथ में ऑफ़िस बैग लिये प्लेटफार्म पर आकर चेयर पर बैठ गया.

काश तुम्हें रोक पाती

abhi92dutta   112 views   11 months ago

ज़िन्दगी में इतना आगे बढ़ जाना , जब बचपन के दोस्त के बारे में पता चला तो फिर आँसू रुके ही नहीं ।।

बाबूजी वो गुड़िया ला दो

nis1985   103 views   9 months ago

आज छुटकी ने फिर से अपने मजदूर पिता से एक फरमाइश करदी....बाबुजी आज तो हमको वो गुड़िया ही चाहिये बस जो हमने दुकान पे देखी थी...

बदलते बारिश के मायने..

kavita   97 views   8 months ago

बचपन से युवावस्था और बच्ची से विवाहिता बन जाने के मध्य ..आये छोटे छोटे मनोभावों का वर्णन

क्षितिज के पार

rgsverma   86 views   9 months ago

"...इस बीच जो बात मुझे उलझन में डालती रही वह सृष्टि के प्रति मेरी सोच और उसको लेकर आत्मग्लानि थी. मुझे लगता था कि उसे मैंने मंझधार में छोड़ दिया था..." (कुछ चुनींदा अंश)

विवाह

mrinal   80 views   10 months ago

पत्नी की तन मन धन से सेवा करते पुतोहू को देखकर उनका मन द्रवित हो गया और बेटा को गले लगाकर बोले," तुमने मेरी आँख खोल दी। हम नसीब वाले हैं कि ऐसी पुतोहू मिली हैं । हमें गर्व है तुम पर।