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@dawriter

होली...

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लाल बत्ती पर ऑटो रूका था। वो बैचेनी से बार बार अपनी घड़ी देख रही थी। वो ऑलरेडी लेट हो चुकी थी। उसकी ट्रेन का टाईम हो रहा था। होली के त्यौहार के कारण घर जाना भी जरूरी था।

उसे अपनी मेम पर भी गुस्सा आ रहा था। कितनी रिकवेस्ट की थी मेम से -उसकी दो बजे ट्रेन है, जल्दी छोड़ दें। पर मेम भी…उसने भुनभुनाते हुए सिग्नल पर नजर डाली। कितनी देर लगेगी, फिर घड़ी पर नजर डाली।

तभी सिग्नल पर लाईट ग्रीन हुई। उसने राहत की सांस ली। भैया जी, प्लीज जल्दी चलाइये, उसने ऑटो वाले से कहा।
ऑटोवाला ऑटो स्टार्ट करने झुका तभी अचानक पास वाली कार का गेट खुला और वो कुछ समझती इसके पहले ही एक गुब्बारा जोर से उसकी आंख से टकराया और कार तेज रफ्तार से दौड़ गई।
घर जाने की खुशी गहन पीड़ा में बदल गई। अब ऑटो स्टेशन नहीं हॉस्पीटल की ओर जा रहा था।
होली के त्यौंहार पर लोगों की मस्ती ने हमेशा के लिये उसकी एक आंख की रोशनी छीन कर उसकी जिंदगी को बेरंग कर दिया।



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