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@dawriter

सच है दुनिया वालों की हम हैं "अनाड़ी"

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रोशनी की शादी एक संयुक्त परिवार में हुई थी,जहाँ पीहर में सिर्फ माता-पिता और एक छोटा भाई था, वही ससुराल में सास-ससुर,देवर, जेठ-जेठानी और दो ननद थी। शुरू-शुरू में तो सब ठीक रहा। फिर धीरे-धीरे ससुराल की राजनीति में फसती गयी जो रोशनी के तो समझ के परे थी या बाद में समझती तब तक बहुत देर हो चुकी होती।

उसका कारण था उसने पीहर में ऐसा कुछ नहीं देखा-सुना था। रोशनी की जेठानी बहुत तेज और होशियार थी और सबके सामने best बहू। रोशनी को अपनी बातों में फ़साना, अपना काम निकलवाना बखूबी आता था उसे। वो नहीं चाहती थी कि रोशनी के आने के बाद उसकी ससुराल में तारीफ कम हो जाये या 'best' बहु का खिताब उसकी जगह किसी ओर को मिले।

जैसे एक दिन कुछ रिश्तेदार खाने पर आने वाले थे, रोशनी भी सुबह से काम मे लगी थी। जेठानी ने उससे लगभग सारे काम करवाने शुरु किये जैसे "मेरे हाथों में दर्द हैं तुम आटा लगा दो, सब्जी काट दो", पर जैसे ही रोशनी सब्जिया बनाने लगी तो जेठानी ने कहा- तुम्हें इतने सारे लोगों के लिए सब्जी बनानी कहाँ आती होगी, और सब्जियां अच्छी नहीं बनी तो सासुजी मुझे ही डाँटेगी, सब्जिया में बना दूँगी तुम जाओ सोफे के कवर बदल दो और dusting कर दो।

रोशनी किचन से गयी और बाहर का सब काम करने लगी। मेहमान आये सबने खाने की तारीफ करी, अब तारीफ तो सब सब्जी की ही करेंगे और उसकी, जिसने सब्जी बनाई ना कि सब्जी काटने वाले की। तो जेठानी सारी वाह-वाही ले गयी।

पर रोशनी को यह बात कौन समझाए के मेहमान घर मे सोफे के कवर किसने बदले या डस्टिंग किसने की या सब्जी किसने काटी, आटा किसने लगाया- नही देखते। ऐसा हर बार होता और तारीफ सिर्फ जेठानी ले जाती।

एक बार सासुजी गिर गए और पैर की हड्डी टूट गयी, दूसरे दिन operation था। सुबह जल्दी से रोशनी ओर उसकी जेठानी ने सारा घर का काम कर लिया और हॉस्पिटल जाने को तैयार हुए तभी रोशनी की जेठानी ने कहा- तुम घर पर ही रहो सब चले गए तो बच्चों का ध्यान कौन रखेगा, मै हॉस्पिटल चली जाती हूँ। पर रोशनी को कौन बताये के सारे पूछने वाले हॉस्पिटल ही आएंगे सबको जेठानी नजर आएगी, सासुजी की सेवा में और तुम घर मे आराम करती।

फिर एक दिन रोशनी और उसकी जेठानी में अनबन हो गई, तो जेठानी जी ने कहा- सुबह का खाना मैं बनाऊँगी शाम का तुम। बेचारी रोशनी फिर फंस गई, सुबह के समय तो सब घर पर होते हैं ससुर, जेठ, देवर, ननद। सबको जेठानी किचन में काम करते दिखी सबके ऑफिस ओर कॉलेज के लिए खाना बनाते और छोटी बहु यानि रोशनी इधर उधर के छोटे मोटे काम करते।

अब रोशनी को कौन समझाये की जेठानी सब की नजरों में काम करती नजर आ रही है और तुम बेकार। और तो और रोशनी का काम बढ़ा सो अलग सुबह डस्टिंग करती, कपड़े धोती और शाम को किचन। वही जेठानी सुबह किचन का काम करती और शाम को आराम या अपने बच्चो को पढ़ाते नजर आती जब सब ऑफिस ओर कॉलेज से आते।

और रोशनी यह सब होशियारी समझ ही नही पाती। जेठानी सब के नजरों में काम करती हुई अच्छी गुणकारी बहू और रोशनी नासमझ कामचोर बहू।

रोशनी के लिए पुराने जमाने का गाना ही याद आता है कि-"सब कुछ सीखा हमने ना सीखी होशियारी.. सच है दुनिया वालों की हम हैं "अनाड़ी"।

Image Source: miteshgajjar



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