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@dawriter

विवाह

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अनिल बेसब्री से पिताजी के एकान्त होने की प्रतीक्षा कर रहा था। आखिरकार मौका मिल ही गया। "पिताजी" "हाँ, बोलो।" ....

"क्या हुआ? बोलो न।" " मैं!मैं शादी करना चाहता हूँ।" "क्या? तुम तो कह रहे थे कि अपना कोचिंग सेन्टर खोल लोगे तब शादी करोगे।" " हाँ, कह रहे थे लेकिन एगो लड़की पसंद आ गयी है।"

"कौन है ? जरा, हम भी सुने।" "ऊ अपना ड्राइवर जो एक्सीडेंट में मर गया था न, उसी की बीबी।"

"तेरा दिमाग खराब तो नहीं हो गया न।

दुनिया की सारी लड़की मर गयी क्या?"

"पिताजी, वह अच्छी है। आपका और माँ का ख्याल भी रखेगी। अपने यहाँ आयी थी तो हम देखे थे उसको।"

"अनिल की माँ जरा बाटा वाला जूता लाना तो इसका भूत उतारता हूँ।" "आप ही कल कह रहे थे कि विधवा विवाह बहुत जरूरी है अपने समाज के विकास के लिये"

"तो क्या इसका मतलब, तुम ही ये शुरुआत करोगे क्या?"

" आप ने ही तो कहा था कि पढ़े लिखे और युवा को इस कार्य में पहल करना चाहिए।" " अरे चोटबा, कहना अलग बात है और करना अलग बात।"

" महान लोगों के कथनी और करनी में फर्क नहीं होना चाहिये।"

"नहीं हैं हम महान। बस तुम उस विधवा से शादी नहीं करोगे तो नहीं करोगे। समाज में हमरा कोई इज्जत है कि नहीं।"

" आप अपने लिये महान हों न हों। मेरे लिये तो महान जरूर हैं। इससे आपका समाज में इज्जत घटेगा नहीं बल्कि बढ़ेगा। कहते हुये अनिल पिताजी के पैर पकड़ चुका था।" पैर छुड़ाते हुये अनिल के पिताजी बोले," मैं तेरे हाथ जोड़ता हूँ। इस शादी की बात छोड़ दो।"

"रामू भैया कितना सेवा किये अपना परिवार का। उनकी बीबी को उनका परिवार दुख दे रहा है। आप को बा की कसम, इस शादी के लिये हाँ कर दीजिए।

पिताजी को समझाने की सभी कोशिश असफल होने के बाद अनिल को वही करना पड़ा जो वह करना नहीं चाह रहा था। कोर्ट मैरिज करके एक ही शहर में अजनबियों की तरह रहना किस बेटे को अच्छा लगेगा। अचानक एक दिन एक दोस्त का फ़ोन आया कि चाची का सीढ़ी से उतरने के समय गिर जाने से पैर टूट गया है। अनिल ने तुरंत पत्नी को लेकर अपने माँ के पास पहुंच गया।इस परिस्थिति में अपने बेटा पुतोहू को मना कर पाने का साहस शायद ही कोई बुजुर्ग पिता कर सकता है।

पत्नी की तन मन धन से सेवा करते पुतोहू को देखकर उनका मन द्रवित हो गया और बेटा को गले लगाकर बोले," तुमने मेरी आँख खोल दी। हम नसीब वाले हैं कि ऐसी पुतोहू मिली हैं । हमें गर्व है तुम पर।

मृणाल आशुतोष



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