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@dawriter

मरने के बाद सम्मान

2 20       
dhirajjha123 by  
Dhiraj Jha

मरने के बाद सम्मान होगा 
मेरे शब्दों को तवज्जो  तब मिलेगी 

आखरी जब सांस होगी 

आएगा कोई मसीहा 

मर चुकी जब आस होगी 
हिल उठेंगी महफिलें 

तालियों के कोहराम से 

पढ़ रहा होगा जब शब्द मेरे 

कोई दूसरा मेरे नाम से 
आज चाहे मौन हों 

पर एक वक्त ये बदल रहा आयाम होगा 

जिंदा हूँ तो कोई पहचानेगा नहीं 

मगर मर्णोपरांत मेरा सम्मान होगा 
आज कीमत कुछ नहीं 

मेरे कीमती अहसासों की 

मगर याद रखना बाद मेरे 

बोली लगेगी मेरे अल्फाज़ों की 
कुर्ते के घिस चुके काॅलर 

पर अभी कोई ध्यान नहीं दिया जाएगा

मगर मेरे जाने के कुछ साल बाद 

देखिएगा मेरे नाम से ही कीमती 

शाॅल दे कर अतिथियों का 

सम्मान किया जाएगा 
मगर तस्सली ये सोच कर होती है 

कम से कम मेरे लफ्ज़ तो जाने जाएंगे

मैं भले मर जाऊंगा गुमनामी 

की आग में जल कर 

मगर मेरे गुमनाम से अहसास 

आज नहीं तो कल पहचाने जाएंगे
मैं तो लेखक आम सा हूँ 

और भला मुझे क्या चाहिए 

मुझे अपना कह ना सके

कम से कम मेरे बाद 

मेरे शब्दों को तो अपनाईए 
गुमनाम हो कर जा रहा हूँ 

इसका भी मुझे कोई ग़म नहीं 

अपनी आखरी साँस तक 

हिंदी को ज़िंदा हमने रखा 

हमारे लिए ये किसी 

बड़े सम्मान से कम नहीं 

धीरज झा



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