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@dawriter

बाबूजी वो गुड़िया ला दो

1 109       
nis1985 by  
nis1985

 

निशा की कलम से......

आज छुटकी ने फिर से अपने मजदूर पिता से एक फरमाइश करदी....बाबुजी आज तो हमको वो गुड़िया ही चाहिये बस जो हमने दुकान पे देखी थी...''वो सुन्दर आँखों वाली लंबे बालों वाली.....हमको वो बहुत ही पसंद है बाबुजी.....वो रोज कुछ ना कुछ फरमाइश करती ही अपने पिता से मगर वो उतनी बड़ी ना होती थी कि उसके बाबुजी उसे पुरा ना कर सके लेकिन आज कि उसकी .फरमाइश.....'.'कुछ जादा बड़ी है क्यूंकि वो गुड़िया महंगी थी ........

 

उसके बाबुजी ने जो कहा था...तू तो मेरी राजकुमारी है छुटकी मै तुझे दुनिया की सारी खुशिया ला के दूँगा....अब वो क्या जाने छोटी सी बच्ची उसे तो दुनियादारी की समझ ही नहीं थी और उसके बाबुजी ने कभी भी उसके जहन में इतने भारीभरकम शब्द गरीबी,अमीरी,औकात, हैसियत डाले ही नहीं की ये सब पता होता उसे .....बस उसे तो यही मालुम था की मै बाबुजी की राजकुमारी ही हूँ मै जो भी बोलूँगी वो सब मुझे लाके देंगे.....

 

सच में कित्ता मासूम होता है ना बचपन छल और फरेब की दुनिया से एकदम अलग....

अब क्या छुटकी ने तो अपनी फरमाइश रख दी अब उसके बाबुजी ने भी बिना चेहरे का हावभाव बदले बड़ी ही खुशी के साथ बोला आज तक तूने कुछ बोला और मैने ना लाया हो ऐसा भी कभी हो सकता है क्या मेरी राजकुमारी ....हाँँ ये होता है पिता जो अपनी मजबूरी को कभी अपने बच्चे पे हावी नहीं होने देता चाहे कुछ भी हो जाये...उसकी खुशी के लिये क्या नहीं करता.....

 

बस फिर क्या था उस मजदूर पिता ने फिर से अपनी बेटी की ख्वाहिश को पुरा करने के लिये आज से फिर कुछ ज्यादा ही बोझ उठाना शुरु कर दिया अपने कांधो पर .... अपनी राजकुमारी के लिये वो गुड़िया जो लेनी थी.....😭😊☺😘

आज कुछ ज्यादा ही बोझ मेरे कांधो पे डाल दो साहब,
मेरी गुड़िया ने एक गुड़िया की फरमाइश की है......

निशा रावल
बिलासपुर



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