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@dawriter

बहू या अलादीन का चिराग?

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शालिनी का सिर दर्द से फटा जा रहा था मोबाइल पर देखा पूरे दो बज रहे थे। बगल में विशाल गहरी नींद में था और वो पिछले दो घंटे से सोने की कोशिश कर रही थी। हाँ बारह तो आराम से बज जाते थे शालिनी को किचन समेट कर सभी के बेड पर पानी और दूध का गिलास रखते हुए। अभी साल भी पूरे नही हुए थे शालिनी की शादी को मगर रस्मों के साथ सवा महीने बीतते ही उसे समझ में आने लगा था कि धीरे-धीरे उसे पूरे घर के कामों की जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी क्योंकि वो इस घर की बड़ी और सबकी प्रिय बहु जो है।

अब तक तो उसके पैरों में पहिये लग चुके थे और वो चलती नहीं सभी जरूरतों के पीछे भागती रहती थी। पहले तो ये सब करना उसे अच्छा लग रहा था क्योंकि उसे लग रहा था कि वो सब उसका कर्तव्य हैं मगर जल्दी ही उसे मालूम हो गया कि वो इस घर की सभी ज़िमेदारी को उठाने के साथ ही विशाल की संदेश वाहक भी बन गई है। किसी भी समय घर के किसी भी सदस्य को कुछ भी कहना होता तो वो शालिनी को आवाज दे देता उस वक्त शालिनी जरुरी से जरुरी काम छोड़कर भागती उनकी जरुरी बातों को विशाल से कहती और उस वक्त के उसके अच्छे और बुरे मूड को भी सहती। बिना गलती के दूसरों के ख़राब मूड का शिकार होना शालिनी की दिनचर्या बन गई थी और अंदर ही अंदर वो घुटती जा रही थी मगर किसी को नहीं दिख रहा था।

शालिनी देखती थी की अगर सास को विशाल की बातें नहीं पसन्द आई तो अपना गुस्सा वो उस पर उतारती और अगर विशाल को अपनी माँ के कहे अनुसार नहीं करता तो वो शालिनी पर बुरी तरह झुझला उठता। ऊपर से कभी कभी उसे समझ में नहीं आता कि वे लोग उसकी शादी से पहले अपनी बातों को एक-दूसरे तक कैसे पहुंचाते होंगे? या फिर शादी के बाद विशाल अपने ही परिवार में पराया सा हो गया है? या फिर क्यों विशाल ने भी अपने आप को थोड़ा रिज़र्व कर रखा है?

सुबह 5 बजे से इस घर की भागमभाग और किसी भी वक्त लोगों का गुस्सा,झूझलाहट और उपेक्षा सहते-सहते वह थक कर निढाल ही जाती। ये सब वो किससे कहे समझ नहीं पा रही थी। विशाल से भी उसे कोई उम्मीद नहीं थी। उसके पास न तो शालिनी की बातें सुनने का समय था और न ही धैर्य।

आज की रात थका शरीर और उससे भी अधिक थका हुआ। मन बिस्तर पर करवटे बदलते हुए सोच रहा था कि क्यों ससुराल में आते ही अनायास उसने हर ज़िम्मेदारी को ओढ़ लिया था? क्यू ‘ना’ करना उसे नहीं आता? क्या उसे डर है कि उसकी ‘ना’ सुनकर ससुराल में जो थोड़ा सा अपनापन उसे मिल रहा है वह भी खत्म हो जाएगा?

शालिनी को याद आता है कॉलेज में एक निर्भीक और मुखर लड़की की इमेज थी उसकी पर शादी के तुरंत बाद उसे क्या हो गया?

क्या यह सब उसके ‘संस्कार’ करवा रहे थे या फिर एक बहू के रूप में बैठा ‘डर’...

Image Source: seurakuntalainen



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