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@dawriter

पटना वाला प्यार

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पटना वाला प्यार


कल लगभग 5 साल बाद तुम्हें आशियाना रोड के टेम्पू पर देखा , कुछ सेकंड के लिए लगा मानो समय रुक सा गया हो मेरे लिये । मेरे ना चाहते हुए भी तुम्हारा नाम मेरे मुंह से निकल ही गया । और शायद तुमने सुन भी लिया था , इसलिये तुमने पीछे मुड़ कर मुझे देखा भी , तुम्हारे चेहरे पर अजीब तरह की उदासी दिखी  । पर तुम्हारा यूँ पलट कर देखना , ऐसा लगा जैसे मुझे जन्नत नसीब हो गयी हो । फिर पूरी रात जैसे फ्लैशबैक में ही गुजरी ……

5 साल पहले जब मैं टेंथ का बोर्ड एग्जाम देकर छुट्टी में राजीव नगर के कंप्यूटर क्लास में एडमिशन लिया था तो , मैं  जा कर सबसे पीछे वाली पंक्ति में बैठ गया । दूसरे दिन तुम दिखाई दी , मुझे तो लगा की मेरे सामने इलियाना डी क्रूज़ आ गयी हो । एक पल के लिए मानो जैसे मुझे घंटी सुनाई देने लगी , मुझे लगा दिल की घंटी बजी , वो तो छुट्टी के बाद पता चला की वो तो नीचे मंदिर की घंटी बज रही थी आरती का समय हुआ था ।

तुम्हे देखा तो बस देखता ही रह गया , कितनी खूबशूरत लग रही थी । तुम्हारे बोलने का अंदाज़ आहा , बाकी कवियों की तरह तुम्हारी सुंदरता में मैंने भी कहा था , तुम्हारी हिरनी जैसी आँखें थी । पर असल में तुम हिरनी जैसी पतली थी ।

फिर तुम्हारे बगल में जो लड़का बैठता था , मैंने उससे दोस्ती की । क्योंकि क्लास में इतना पता चल गया था , की वो लड़का तुम्हारे ही मोहल्ला का था , और तुम्हारा मुंहबोला भाई था । पर हम भी पटना के ही लड़के थे , हमे इतना अंदाज़ा तो हो गया था कि तुम्हारे बगल में बैठने वाला लौंडा है पक्का हरामी । क्लास के नीचे उतर के उसे समोसा और कोल्डड्रिंक पिलाना पड़ा था हमको , उतनी देर में हम तुम्हारा हिस्ट्री , सिविक्स और जियोग्राफी सब पता कर चुके थे । अब बारी थी तुमसे बात करने की , और तुम्हारे बगल वाले सीट हथियाने की । बगल वाली सीट तो हमने 2 समोसा और 1 कोल्डड्रिंक में खरीद ली थी । लेकिन उस रात टेंशन में हमको नींद ही नहीं आयी । हम पूरा रात ये सोचते रहे , की तुम इतनी सुन्दर और हम अदरक की तरह मोटे जहा मन वहाँ से फुले हुए । रोड पर जब भी चलते थे तो बाकी सब यही सोचते था की कोई फुटबॉल को छोड़ दिया है भटकने के लिए । यही बात सोचते सोचते सुबह हो गयी । और क्लास स्टार्ट होने से आधे घंटे पहले ही जा कर तुम्हारी बगल वाली सीट पर अपना आसन टिका दिया । पर देखो हमारा किस्मत तुम उस दिन आयी ही नहीं , 2 घंटे का क्लास हमको 2 शताब्दी जैसा महसूस हो रहा था , तुम्हारे मोहल्ले वाला वो लड़का बार बार हमको देख कर हँसे जा रहा था , हमको तो एकबारगी मन किया कि मार के उसका मुँह तोड़ दे । फिर हम सोचे की छोड़ो यार अब हम बड़े हो गए है , और हो भी क्यों ना आखिर दसवाँ का बोर्ड एग्जाम देकर जो आये थे । मारपीट तो स्कूल में ही छोड़ के आये थे । यहाँ तो हमे अपनी एक अलग पहचान बनानी थी , मतलब सबसे अच्छे से व्यव्यहार करना था । छुट्टी के वक़्त पता चला की तुम्हारी दीदी की तबियत अचानक बिगड़ गयी थी  , इसलिए तुम उस दिन नहीं आयी ।

वो कहते है ना की सब्र का फल मीठा होता है , अगले दिन तुम आयी , हमे तो ऐसा लगा जैसे सालो का तपस्या का फल मिला हो । अब बारी थी तुमसे बात करने की , सर को आने में अभी देरी थी , उतना देर मे हम मन में तिहत्तर बार जोड़ , गुना , भाग कर के जो तुमको बोलना था उसका अभ्यास कर रहे थे । लेकिन मेरे बोलने से पहले तुमने ही बोल दिया - क्या तुम्हारे पास दो पेन है ?

ये सुन कर हमरा सारा अभ्यास किया हुआ सब टूट गया , और हम तुमको ऐसे कन्फ्यूज्ड हो के देख रहे थे , जैसे तुम मुझसे पेन नहीं हमारा गुर्दा मांग लिया हो ।

हमारा ध्यान तो तब टुटा जब तुमने अपना सवाल दुबारा दोहराया । तब हम एकदम टिपिकल पटना का लौंडा वाला छाप छोड़ दिए । जवाब क्या था हमारा - “लीजिये आप ये वाला पेन लीजिये , हमारे पास एक और पेन है” ।
ये आप अपने आप में एक पटनिया वाला छाप था । यहाँ कोई भी किसी से भी पहली बार मिलता है तो उसे आप से ही संबोधन करता है , चाहे वो उससे छोटा हो या बड़ा । यही चीज़ पटना में प्यार करने वालो पर भी लागू होता है । मतलब जब तक प्यार एकतरफा हो तो आप , और जब दोनों तरफ से सहमती बन जाये तो तुम ।  अब रोज़ क्लास में तुमसे किसी ना किसी मुद्दे पर बात हो जाती थी । मैं पूरी तरह से आश्वस्त हो जाना चाहता था कि मुझे प्यार हुआ है कि नहीं । वो क्या था ना एक बार स्कूल में क्लास 7 में दोस्त के किसी मैटर को लेकर हम दूसरे सेक्शन की लड़की को जा कर कुछ बोल दिए थे । वो उसका कुछ और मतलब निकाल के अपने घर पर कुछ और बोली , फिर उसका भाई हमारे घर पर आ के कुछ और ही बोला , मतलब तिल का ताड़ बन चूका था , और हम घर में हमारा बिना बात के जबरदस्त कुटाई हुआ था । उस चीज़ को याद करते हुए आज भी हमारे शरीर में दर्द शुरू हो जाता है । उसके बाद लड़की जात से हमको अजीब तरह का डर हो गया । उसके बाद पूरा स्कूल लाइफ ब्रह्मचारी की तरह बिता दिए । पर अब मुझे पहली बार प्यार होने लगा था , लेकिन असली मुद्दा यही था कि आप से तुम तक कैसे पहुँचा जाये । लेकिन उससे पहले हमको तुम्हारी सारी जानकारी पता करने की , तो सारी जानकारी हमे तुमसे ही मिल गयी । और जानकारी कुछ इस प्रकार थी की तुम हमसे दो साल की सीनियर थी , तुम पटना विमेंस कॉलेज में थी बी.ए फर्स्ट ईयर में और हम 11th में बी.एस कॉलेज दानापुर में । अटेंडेंस का झमेला तो था नहीं हमारे कॉलेज में जो गेट कीपर था उसको पैसे देकर अटेंडेंस मैनेज हो रहे थे । लेकिन तुम तो रोज़े कॉलेज जाती थी 75% अटेंडेंस का मारा मारी था तुम्हारे कॉलेज में । फिर मन में एक ख्याल आया तुम्हारे सीनियर होने का , तो हमने सोचा की भाई हम तो सिद्दत वाला मोह्हबत किये है , प्यार जो है वो उम्र , ऊंच नीच , जात पात से परे होता है । प्यार तो सिर्फ प्यार होता है । हमारे सिद्दत वाले प्यार से कुछ साल पहले प्रोफ़ेसर मटुकनाथ जी अपने प्रेम लीला के कारण पुरे देश में प्रसिद्ध हो चुके थे । अपने से एक - डेढ दसक छोटी लड़की से वो इश्क़ फरमा रहे थे , और न्यूज़ चैनलो की ब्रेकिंग न्यूज़ बने हुए थे । और तुम तो हमसे 2 ही साल बड़ी थी । पर असलियत में ये सब चोंचले हमारी बॉलीवुड और प्रेम साहित्य की देन थी जो हमारे दिमाग में केमिकल लोचा उत्पन कर रही थी । रात की नींद अब गायब होने लगी थी , तो हमारे दिमाग की बत्ती जली । हमारे मित्र मंडली , में जो हमारे प्रिय मित्र हुआ करते थे , वो कहते थे - बेटा अगर रात में नींद नहीं आने लगे तो समझो तुमको प्यार हो चूका है । हमे उनका ज्ञान बहुत सही लगता था । वो खुद तो ना जाने कितनी बार लड़की लोग के थप्पड़ का शिकार हो चुके थे । लेकिन लड़कियों के मामले में अपने आप को उस्ताद समझते थे । उनके दिशा निर्देश के अनुसार हमको प्यार हो चूका था । अब “यो यो हनी सिंह” के जगह अब “कुमार सानू जी” के गाने सुन रहा था रात रात भर । उनके हर गाने में अपने आप को अभिनेता और तुमको अभिनेत्री की अक्स अपने मन में देखता ।

एक शाम ये बात हम बहुत खुश हो कर अपने मित्र मंडली के सामने बतायी की - मित्रो हमे सिद्दत वाला प्यार हो गया है । उसके बाद मेरे सभी दोस्तों ने केवल तुम्हारे बारे में पूछा और मैं हर बात चार चार गुना बढ़ा चढ़ा कर बोला । और मेरे दोस्तों ने तो मुझे और भी आसमान पर चढ़ाने की योजना बनाये हुए थे , वो सब अब बातचीत में तुम्हारा नाम लेने के बजाय तुम्हे भाभी नाम से सम्बोधन कर रहे थे । पटना में लड़कियां गर्लफ्रेंड बाद में बनती है , पहले दोस्तों की भाभी बन जाती है । हमे तो लगा की हम आधी जंग जीत चुके है , दोस्तों ने तुम्हे भाभी की उपाधि दे चुके है । लेकिन ये उपाधि मुझे उस दिन बहुत मेंगही पड़ी , दोस्तों ने फरमाइश कर दिया की आज तो गुप्ता चाईनीज़ सेंटर में चौमिन और चिल्ली खाएंगे , हम भी उस समय आव न देखे ताव सीधे चल पड़े गुप्ता के दुकान , 4 दोस्त थे और 2 साइकिल गुप्ता दुकान पर जाने में 20 मिनट लगे । फिर आर्डर भी वही तीनो नामाकूल दोस्तों ने किया 4 प्लेट चौमिन और चार हाफ प्लेट चिल्ली , और उसमें से एक ने गुप्ता को ये बता दिया की हम प्यार में पड़ चुके है । गुप्ता तो इन तीनो से बड़ा वाला निकला ,  वो अपने टुटा हुआ टेप रिकॉर्डर पर फिल्म आशिकी का गाना बजा दिया । तब तक एक दोस्त बगल वाले दुकान से 2 लीटर वाला कोल्डड्रिंक का बोतल ला चूका था , उसका भी पैसा हम ही भरे थे । जब बिल पेमेंट करने की बारी आई तो , शक्तिमान की कसम बहुत रोये थे अंदर से , पुरे के पूरे 235 रुपया । 3 महीना से हम पैसा बचा रहे थे टी-शर्ट के लिये । कहाँ हमेशा हम लोग कोई ख़ुशी की बात की सेलिब्रेशन करने के लिए समोसा और कोल्ड्रिंक से करते थे , ज्यादा ज्यादा से 100 रूपये में निपट जाते थे । लेकिन ये तो प्यार का मामला था तो मन मार कर हम बिल का भुगतान किये । शाम को वापस घर जाने से पहले दोस्तों ने ज़िद की भाभी की फोटू देखनी है , तो मुझे ये भी फरमाईस पूरा करना पड़ा , नोकिया 2730 वाले मोबाइल में तुम्हारा एक ब्लर फोटो  था हमारे पास । जाते वक़्त हमारे एक दोस्त ने हमसे ऐकले में आ कर कहा - बेटा आज से तुम्हारा चूतिया कटना शुरू हो गया है , तो जरा ध्यान से ।

जिस दिन तुम क्लास नहीं आती थी , मानो हमारी दिल की धड़कन रुक जाती थी । तो ऐसे में सोचो अगर एक दिन हम क्लास नहीं आते तो क्या होता ...

एक दिन हम सुबह सुबह उठे और तैयार हो कर क्लास के लिए जाने के लिए निकले , तो देखे भाई साहब हमारी साइकिल की पीछे वाली टायर हमारा साथ छोड़ चुकी थी , मतलब पंचर हो चुकी थी । अब हम पर गए भंयकर पसोपेश में करे तो करे क्या ? अगर साइकिल ठीक करवाने जाते है तो क्लास छूट जायेगी , और क्लास में बाजी कोई और मार जायेगा । फिर हमने उसी पंचर वाली साइकिल उठा कर चल दिये कंप्यूटर क्लास , अपनी हिम्मत पर हमें खुद नाज़ हो रहा था , पंचर वाली साइकिल से 2.5 km । घर आये तो बड़े भाई साहब हमारा इंतज़ार कर रहे थे , बोले की रूम में आयो कुछ बात करनी है । हम डरते डरते अंदर गए । तो उन्होंने हमसे पूछा की साइकिल पर इतना ज़ुल्म क्यों पंचर साइकिल से इतनी दूर क्यों गए , हम लगे बहाना बनाना शुरू की आज का क्लास इम्पोर्टेन्ट था इसलिए । तब भाई साहब ने केवल एक ही बात बोले - देखो छोटू जिस उम्र से तुम गुज़र रहे हो , उस उम्र से हम लोग गुज़र चुके है । अगर ये लड़की का मामला है तो संभल जाओ , उसे अपना दिल की बात या तो जल्दी बता दो नहीं तो सिर्फ पढाई पर ध्यान दो । पता करो ये सिर्फ तुम्हारा crush तो नहीं और कही वो सिर्फ तुम्हे अपना फ्रेंड न समझती हो , तुम friendzoned में जा सकते हो । भाई साहब के इतने लंबे चौड़े भाषण का हम पर असर घण्टा कुछ नहीं पड़ा , बस अंग्रेजी के दो नये अक्षर हमारी समझ में उस दिन आया वो भी ऑक्सफ़ोर्ड शब्दकोश से crush और friendzoned का मतलब  .

पुरे पटना के बेरोजगार और आवारा टाइप के लड़के हमारे दोस्त बन चुके थे । वो दरसल दोस्त कम जासूस ज्यादा , वो लोग मिनट मिनट तुम्हारी रिपोर्टिंग हमारे पास कर रहे थे । भाभी को अभी बोरिंग रोड में देखे है , पटना विमेंस कॉलेज में देखे है , अभी 2 मिनट पहले घर से निकली है , इत्यादि । तुम्हारे प्लान और तुम्हारे बारे में तुमसे अधिक जानकारी रख रहे थे । राजीव नगर रोड नंबर - 12 पर तुम्हारी मम्मी का एक दुकान हुआ करता था , मेरे जासूस सब से ये पता चल चुका था तुम रोज़ शाम को 5 से 6 के बीच तुम दुकान पर आती थी ,। बस हमारा काम हो चूका था हमारा रोज़ का नियम बना लिए थे तुम्हारे दुकान के बगल से गुज़ारना , और तुम्हे देखने की कोशिश करता , अगर गलती से तुम मुझे देख लेती थी तो हम अपना दाढ़ी खुजाने लग जाते थे , ताकि तुमको यह लगे की हम तो यहाँ दाढ़ी खुजाने आये है , तुम तो हमको गलती से दिख गयी , और पटना के रोड पर खुलेआम लड़की से बात करना , मतलब आपका करैक्टर पर ऊँगली उठ जाना । हमे अपने करैक्टर सर्टिफिकेट की चिंता नहीं था , चिंता तो यह था कहीं हमारे कारण तुम बदनाम ना हो जाओ ,। इसी डर से हम कभी भी रोड पर तुमसे बात नहीं कर सके । लेकिन रोज़ का शामचार्य बना चुके थे की शाम के समय राजीव नगर जाना ही है , चाहे वु दोस्तों के संग हो या ऐकले , कभी कभी जब घर में भाई साहब नहीं रहते थे तो उनका पल्सर 180 निकाल कर चल पड़ते थे अपनी मंज़िल की ओर राजीव नगर रोड नंबर - 12 । पता नहीं किस दिन तुमने मुझे बाइक पर देख लिया और दूसरे दिन हमसे प्यार से कहा कि हम तुमको बाइक से हनुमान मंदिर ले कर जाये । इस बात को हम ग्रीन सिग्नल मान कर तुम्हे हां में जवाब दे दिया । पटना में जब कभी किसी लड़का , लड़की को प्यार होता है तो फर्स्ट टाइम डेट पर या तो स्टेशन का हनुमान मंदिर नहीं तो पटना का चिड़ियाघर ही जाते है , बाकी इसके अलावा पटना में प्यार करने की और कोई जगह ही नहीं है । ऊपर से पटना के हर मोहल्ले में कोई ना कोई रिश्तेदार मिल ही जाता है ।

अब बारी थी भाई साहब से बाइक की परमिशन लेने की  । हमने भाई साहब के सामने झूठ बोला कि मुझे कुछ जरुरी काम है । भाई साहब ने 2-3 गाली और 4 बात सुनाया और बाइक की चाबी देने के लिये राज़ी हो गये , शायद उन्हें अंदाज़ा हो गया था कि प्यार का मामला है । दूसरे दिन हम बन ठन के रेडी थे , तुम्हारे दिशा निर्देश के अनुसार हम काम कर रहे थे , दूसरे दिन सुबह 10 बजे पॉलीटेक्निक के पास साई बाबा के मंदिर के पास हम तुम्हारा इंतज़ार कर रहे थे , क्योंकि तुमने कहा था कि राजीव नगर में नहीं आने के लिए कोई देख लेगा तो बवाल हो जायेगा । तभी सामने से तुमको आते हुए देखा - बिहारी भाषा में बोलु तो कसम से कंटाप लग रही थी , वाइट सलवार सूट में कसम से क़यामत लग रही थी , और माथे पर छोटी सी लाल बिंदी , एकदम एम्बुलेंस वाला फीलिंग दे रही थी । फिर हमने हेलमेट पहना और तुम हर पटना की हर लड़की की तरह अपना चेहरा दुप्पटे से पूरी तरह से बांध के ढक लिया । तुम एकदम मुरैना की डाकू टाइप लग रही थी । मंदिर में तुम भगवान से कुछ मांग रही थी आँखे बंद कर के । और हम तो केवल भगवान से तुम्हे पाने की दुआ मांग रहे थे । और मांग भी किस भगवान से रहे थे बजरंगबली जी से जो खुद ब्रह्मचारी थे । वापस होते वक़्त हमने तुमको डोसा प्लाजा में डोसा साम्भर भी खिलाया था । मतलब इस सो कॉल्ड डेट में हमारा पूरा 300 रुपया का भट्टा बैठ गया था ।

दूसरे दिन शाम में मित्र मंडली ये बात जंगल में आग की तरह फैली , की हम तुमको डेट पर ले गये थे । अब इन कमीनो को इस बात की भी पार्टी चाइये थी । और इस बार वो लोग गुप्ता के दुकान पर जाने को राज़ी नहीं थे । तो इस बार गुप्ता के दुकान से सीधे उठ कर हम लोग बोरिंग रोड के रोटी रेस्ट्रुरेन्ट में थे । और इस मर्तबा ख़र्चा पड़ा 800+150 टैक्स मतलब पुरे 950 रुपया ।मतलब पुरे साल का बचत किया  पैसा 1 घंटे में ये तीनो सफाचट कर चुके थे । वापस जाते वक़्त हमारे उसी दोस्त ने दुबारा हमको बोला - बेटा तुम्हारा चुतिया कटने का लेवल अब बढ़ रहा है ।

हम मन ही मन सोचे कि साला खुद तो एक लड़की भी नहीं पटा सका , और चला है हमको ज्ञान देने , घोंचू कही का ।

इसी बीच तुम्हारा बर्थडे आने वाला था । हमारी तो जैसे एक महीने पहले से ही नींद उड़ी हुई थी । हम तुम्हे क्या गिफ्ट दे , और गिफ्ट के लिये हमारे पास एक रुपया भी नहीं था । पर वो कहते है न की भगवान के घर में देर है अंधेर नहीं । हमारे मित्र मंडली में से एक दोस्त ने रामनगरी मोड़ पर एक छोटा सा काण्ड कर दिया था , बीच रोड पर एक लड़की का हाथ पकड़ के उसको प्रोपोज़ किया था , और लड़की को एक गिफ्ट भी दिए थे । पर लड़की ने साफ़ इंकार कर दिया और गिफ्ट भी वापस कर दी । भाई लोग हमारे दोस्त उस रात बहुत रोये । हम तीनों दोस्त उनको सांत्वना दे रहे थे और गिफ्ट में रखे डेरी मिल्क सिल्क वाला चॉकलेट खा रहे थे । तब हमारी दिमाग की बत्ती जली हमने वही गिफ्ट तुमको तुम्हारे बर्थडे पर दे दिया । पहली बार हमारी एकतरफा लव स्टोरी में मेरे ये नामाकूल दोस्त लोग काम आ रहे थे ।

पर इतना कुछ होने के बाद भी बात आप से तुम तक नहीं पहुँच रही थी ।

इसी बीच पटना में टेलीकॉम कॉम्पनी अपने प्लान के लिये हम जैसे मुर्गे की तलाश कर रही थी । यूनिनॉर , एस-टेल , ऐर्सेल इत्यादि ने तरह तरह के प्लान मार्किट में उतार चुकी थी । तुमको भी याद होगा कैसे यूनिनॉर वाले 27 रुपया में डेली 100 SMS, 30 दिनों के लिए दे रही थी । प्रभु श्रीराम की कसम हम हर कॉम्पनी का सिम 2-2 खरीद लिए थे , लेटेस्ट ऑफर के साथ । एक सिम हमारे लिये और एक सिम तुम्हारे लिये । अब रोज़ SMS पर बात होने लगी ।लेकिन बाद में यह भी कम पड़ने लगा , तब बारी आई फेसबुक की । यह तो हम जैसे लौंडो के लिये संजीविनी बुटी की तरह काम किया । अब पटना में प्यार प्रेम पत्र की जगह ऑनलाइन हो गया था । शायद इसी को प्यार का डिजिटल अवतार माना गया । अब रात रात भर हम दोनों चैटिंग किया करते थे । रात के 2-3 बजना तो आम बात हो गयी थी । उतनी देर की बात में हम 20-25 बार केवल यही पूछते खाना खायी , क्या खायी ?

पर अभी भी हम प्रोपोज़ नहीं कर सके थे । पटना के लौंडो में इतनी हिम्मत नहीं होती है कि वो इतनी जल्दी प्यार का इजहार कर सके । अब तो कंप्यूटर क्लास भी अपने अंतिम पड़ाव पर आ चुका था । 21 दिसम्बर को अंतिम क्लास था , क्लास के बाद हम तुमको अपने कॉलेज दानापुर ले गये , फिर वुहा से पटना विमेंस कॉलेज में तुमको ड्राप किये , और जाते वक़्त बोले की सुनो 1 जनवरी को हम फ़ोन करेंगे रिसीव करना कुछ बात करना है । हम मन में ठान चुके थे की नये साल पर अपना प्यार का इजहार कर देंगे ।

1 जनवरी को तुम्हारा जवाब सुन कर , मानो हमारे सर पर आसमान टूट पड़ा हो । बड़े भाई साहब की बाते याद आ रही थी की - बेटा यह पटना है , यहाँ 100 लोगो में से सिर्फ 5 का ही लव सक्सेस होता है । अपने उस दोस्त का भी बात याद आ रहा था - बेटा तुम्हारा चुतिया पूरा कट रहा है । हमारी 1 जनवरी उस साल की सबसे बेकार गया । शायद हमको भी अंदाज़ा था इसी जवाब का , पर दिल को तसल्ली दिया करते थे । “यो यो हनी सिंग” से “कुमार सानू” पर चले थे और अंतिम में “गुलाम अली” पर आ कर रुके थे ।।।।


आज भी तुम्हारे बारे में एक ही बात बोलता हूं-

तुम पटना विमेंस कॉलेज की कोमल गुलाब प्रिय ,

और में बी.एस कॉलेज का कांटो वाला झाड़ प्रिय।।।।

पटना वाला प्यार - 2



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