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@dawriter

नज़्म

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gaurav97p by  
gaurav97p

मैं नज़्म बन के रह गया हूँ
इन् ज़िन्दगी के आइनो में |
रात को बहता हूँ लहू सा,
इन् सुफेद सफो पे,
ज़िन्दगी की पैमाइश में ||
दिल के दर्द से भर जाते हैं,
ये सुफेद सफों के प्याले ||
तुम्हारी यादो से लड़ता हूँ
इन रातों की तन्हाई में ||
वो जो रुखसती ली थी मैंने
उस सफर के दरम्यान,
मुझे याद है तुम्हारा उदास चेहरा
जो मेरे न जाने की ज़िद्द पे अड़ा था ||
तुम्हारे आँखों का वो अश्क
जो मेरे काँधे पे आ गिरा था
वो लम्हा याद करते हुए ,
न जाने कितनी सहर गुज़री है |
मैं  पूरी रात लहू सा
बहता हूँ इन सुफेद सफों पे
मैं नज़्म बन के रह गया हूँ
इन ज़िन्दगी के आइनो में ||


गौरव पाठक "अनजान"



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