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@dawriter

दागदार हसीन चेहरा

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बस स्टॉप पर कड़कती धूप में भी खड़े होकर अब बस का इंतजार करना मुझे पसंद आने लगा था।10:00 बजे ऑफिस के लिए निकलना और हमेशा बस निकलने के टाइम तक ही मैं पहुंच पाता था लेकिन जब से उसे देखा मैं 15, 20 मिनट पहले ही अपना चाय नाश्ता छोड़कर बस स्टॉप पर कड़कती धूप में भी खड़े होकर  बस का इंतजार  मुझे पसंद  था।बस में कभी वो मेरे आगे वाली सीट पर बैठती कभी पीछे वाली कभी वह मेरे आगे खड़ी होती और जिस दिन उसके पास पास बैठने का मौका मिलता समझो उस दिन तो लॉटरी लग जाती।

इतनी खूबसूरत भगवान किसी किसीको खूबसूरती भी बेशुमार देता है। झील सी आंखें जिनमें डूब कर खो जाना चाहता था मैं।हर पल हर घड़ी अब मुझे उसी का ख्याल रहता और मेरे दिन का सबसे अच्छा समय वह 30 और 40 मिनट ही होते  जब वो मेरे साथ होती।रोज उसका बेसब्री से इंतजार किया करता। किस दिन बहुत लेट हो जाती या नहीं आती तो ये लगता जैसे दिन ही खराब गया। मैं कभी-कभी उसकी वजह से अपनी बस भी छोड़ दिया करता। ऐसा कब तक चलता आखिरकार फैसला कर ही लिया था मैंने परिणाम जो भी हो अपने दिल की बात कह  ही देगा।साथ में यह भी लगा मुझ सामान्य से दिखने वाले को क्यों पसंद करेगी? पर कहने में कोई बुराई नहीं की तुमको देख कर ऐसा लगता है जैसे मेरी सांसे तुम्हारे लिए आती जाती  है। यूं तो कहने को हसीन चेहरे और भी हैं लेकिन तेरी खूबसूरती के सामने सारी दुनिया फीकी नजर आती है।  मैं तेरी इन आंखों से पूरी दुनिया देखना चाहता हूं जीवन भर  तेरे पास रहना चाहता हूं। 

ये फीलिंग और भी ज्यादा स्ट्रांग हो गई जब वह दो-तीन दिन बस में कहीं नहीं दिखी जब चौथे दिन वो आई तो जैसे सांस में सांस आई।उसके बस में बैठने से लेकर बस में उतरने तक मैं कोशिश करता रहा की कह दूं तुम जो कह दो तो चांद तारे तोड़ कर ला दूं कुछ ऐसा ही।उसके स्टॉप पर उतरने पर मैं भी उसी स्टॉप पर उतरा उसके पीछे भी गया लेकिन न जाने क्यों कह नहीं पाया।

जब रूम पर आया तो  मित्र के जन्मदिन के उपलक्ष में उसने किसी डासं बार में पार्टी रखी  ।लड़कियों को नाचता देखकर मेरे मन में अजीब सी घृणा उनके प्रति थी। इतना गंदा काम करने की क्या जरूरत है क्या अच्छे घरों आती होंगी।तभी एक मासूम सा चेहरा दिखा जिसे मैं भीड़ में भी पहचान सकता था।तुम यहां? मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि तुम कभी मुझे ऐसी जगह दिखोगी।घिन हो गई थी मुझे अपने आप से नफरत करने लगा था मैं अपने आप से।मैं देखना नहीं चाहता था उस तरफ। खूबसूरती के पीछे इतनी गंदगी तुम खूबसूरत हो ही नहीं सकती। यू लगा जैसे मेरी मोहब्बत अचानक ही नफरत में बदल गई।अजीब सी बेचैनी अजीब सी हलचल भाग जाना चाहता था वहां से उठकर। घुटन की वजह से मैं वहां रुक नहीं पाया और बाहर आकर खड़ा हो गया तभी एक व्हीलचेयर पर बैठी हुई बुढ़िया पर नजर पड़ी मैंने पूछ लिया कि इतनी रात को आप यहां क्या कर रही हैं? तो उन्होंने कहा कि मेरी बेटी काम करती है यहां अंदर जब वो आएगी तब मैं उसके साथ जाऊंगी।न जाने कितनी देर वहां बैठा रहा और सोचता रहा कि सारे ख्वाब चूर चूर हो गए जो जिंदगी भर उसके साथ देखने चाहे थे।बार बंद होने के साथ-साथ दोस्तों और कर्मचारियों के भी बाहर निकलने का समय हो गया। अचानक वो निकली उसी साधारण लिबास में जिसमें मैं उसे देखा करता था। कितना कुछ छुपाया है तुमने चेहरे के पीछे शराफत दिखाने से कोई शरीफ नहीं होता।उसने ऑटो बुलाया व्हीलचेयर पर बैठी अपनी मां को ऑटो में बिठाने के बाद खुद भी उस में बैठकर मेरी नजरों से बहुत दूर चली गई।और मै अब सोच मे पड़ा था क्या चेहरा वाकई में दागदार था या सबसे खूबसूरत।

  • स्वाति गौतम


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