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@dawriter

जान

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इंटरव्यू के अंतिम चरण में चयन न होने पर हताश और क्रुद्ध आशुतोष कमरे पर पहुंचते ही पत्नी पर बरस पड़ा।

"क्या हुआ! आज भी सेलेक्शन नहीं हुआ क्या?"

"दिमाग खराब मत करो।"
"लीजिये, शरबत पीजिये। कुछ कहना था आपसे!"

 

"बोलो, हमेशा पूछकर बकती हो क्या।"

"वो,...आप पापा बनने वाले हैं।"

 

"तुम्हारा दिमाग खराब है।भूसा भरा हुआ है क्या? मैंने तुमको कहा था कि नहीं, सावधानी बरतने के लिये और तुमने इसे स्वीकार भी किया था। याद है!"

 

"हाँ, लेकिन अब हो गया तो क्या करें?"

 

" क्या करें! क्यों नहीं रखा ख्याल? मरो और मुझे भी ज़हर दे दो।जानवर, जाहिल कहीं की।अपना खर्चा पूरा नहीं हो रहा है और ऊपर से एक नयी आफत। अबॉर्शन। यही एक रास्ता है। मैं किसी से उधार ले लूँगा।"

 

"पागल हैं क्या? पहला बच्चा है!"

"तुमको मेरी परिस्थिति का अंदाज़ा नहीं है क्या?"

 

" मैंने अपने मम्मी-पापा से बात की है। आपके माँ-पिताजी से भी बात की है। सब बहुत खुश हैं। मेरे पापा ने तो कहा है कि जब तक आप को बढ़िया जॉब नहीं मिलेगी तब तक सारा खर्चा वही उठाएंगे। आपकी माँ ने भी कहा कि कोई जरूरत हो बताना, छुपाना नहीं।"

 

"मेरा कोई आत्मसम्मान नहीं है क्या? तुम अपने बाप से पहले ही काफी पैसा ले चुकी हो। और माँ को तुम नहीं जानती क्या?कोई छोटी सी भी बात हो जाएगी तो हफ़्तों सुनाती रहेगी।"

 

"कुछ भी हो जाय। मैं अबॉर्शन नहीं कराऊंगी। आप मुझे जान से मार दीजिये लेकिन मैं यह पाप नहीं करूंगी।"

 

" तुमको कैसे मारूंगा! तुम तो मेरी जान हो।"

 

" जिस तरह मैं आपकी जान हूँ और आप मेरी जान हैं उसी तरह यह बच्चा हम दोनों नहीं पूरे परिवार की जान है।"

 

" पर मेरी हालत तो तुम देख ही रही हो न!"

" सब ठीक हो जाएगा। क्या पता इस बच्चे के भाग्य से ही अच्छा होना हो।"

 

"पत्नी से कोई पति अब तक जीत पाया है भला! कहते हुये आशुतोष अपने आने वाले बच्चे को चूमने लगा।"

© मृणाल आशुतोष

Image source : Dailymotion



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