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@dawriter

चंदनवा के बापू की माशूका

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“चंदनवा की अम्मा”

“हूँ….”

“चंदनवा की अम्मा”

“हुम्ममम्म”

“अरी ओ चंदनवा की अम्मा तनिक इयां तो आयी”

“क्या हुआ जी?”

“आयी जरा कछु बात करनी है”

“ ना जी ना...हमयु ना आई। आप हमको सतावोगे”

“ना री आज नहीं , आज जी बहुतये ही ख़राब है”

चंदनवा की अम्मा अब तक उठ कर चंदनवा के बाबू के पास आकर बैठ जाती है।

“ क्यूँ जी क्या भवा? क्यूँ मूडवा खराब है थिआर”

“अरी सुनत रही की फेसबुकवा बंद होने वाला है। कुछ अच्छा नहीं लग रहा तबहु से”

“हाय राम, हाय राम , आ आ हाय”

चंदनवा की माँ छाती पीट पीट कर रोने लगी।

“अरे चंदनवा की अम्मा कहे रोने लगी यूँ छाती पीट पीट कर?”

“ अरे आप ही तो बोले उह देशमुखवा बंद होने वाला है। जरूर कोई मुख्य आदमी हुईगवा तभी तो आप इतने उदास हुई गए हो। जरूर हमार जीवन पर ऊँ का फर्क पड़ेका रही तभी हम रो रही है”

“ हे राम! चंदनवा की माँ, देश्मुखवा नहीं फेसबुकवा! रुक। देख ई जो हम फोनवा पर हमेशा देखत रहते हैं ऊँ। ये है फेसबुकवा। समझी। सुना है कि ये बंद होने वाला है। हमने तो जब से सुना है हमार तो जी ही नहीं लग रहा। लगत रहा जैसे कोई माशूका छोड़ कर जाने को तैयार बैठी है। और हम तोहार डर के मारे ऊँ को रोक भी नहीं सकत पा रहे। सच्ची जी बड़ा ख़राब हो रहा है।”

“ हाय राम!  हाय राम!ये क्या सुन रहे हैं हम। हे राम ! तू तो बस अब उठा ले हमको। हाय राम ! हमार तो जिंदगी ही बर्बाद हो गयी। कहाँ जा कर मरी हम”

और चंदनवा की अम्मा अब पहले से भी जोर जोर से अपनी छाती पीट पीट कर रोने लगी।

“ अरे क्या हुआ री तुझे तू कहे को इतना गला फाड़ फाड़ कर रो रही है, चंदनवा की अम्मा। क्या भवा, बोल तो सही”

“ चंदनवा के बापू तो ई कलमुंही ही थी जिसके खातिर पहले तुम घंटों हमको नज़रअंदाज़ करते और फिर न जाने क्या क्या देख फिर हमको सताते। अरे! गुस्सा तो आवत था हमको इस चुड़ैल पर की ई हमसे हमार पति को छीन रही है पर जब आप हमको सताते थे न तो हम मन ही मन ई को दुआएं भी देते थे... की  कलमुंही जैसी भी हो पर ई की वजह से चंदनवा के बाबू देखो हमको कितना प्यार करत रही। पर….”

और फिर से चंदनवा की अम्मा जोर जोर से रोने लगती है।

“पर! क्या चंदनवा की अम्मा, बोलो पर! क्या”

“पर अब तो हमार जिंदगी बर्बाद हो जायेगी। अब आप वही पुराने वाले पति बन जाओगे। आपको याद है न चंदनवा के बाबू हमार चन्दन भी तो आपकी ई माशूका के आने के बाद ही होवत रहा। और हमार तो जिंदगी ही बन गयी थी। गांव की सब औरतें हमसे तब पूछती थी की क्या तुम दोनों में झगड़ा नहीं होता का?तो हम भी बोल देती थी की ना , चंदनवा के बाबू बड़े मेहनती दिन रात ऊ फोनवा पर जाने क्या पर कुछ तो काम करत रहत रही और कभी हमसे तेज़ आवाज में बात ही नहीं करते। भले ही हम उनको कुछ भी कहें या कुछ भी मांगे। सच बताएं कभी कभी तो हमने आपको गली भी देइ, पर शुकर है तुम ई माशूका में व्यस्त रहते और हम कह कर निकल लेते। तभी तो न होती हमार लड़ाई। बस तुम हमको सताते बड़ा वाला थे। पर अब। अब हमको ऊँ पहले वाला पति मिल जायेगा। ना ना हमको ना चाहिए ऊँ पुराना पति। हमको तो ये फेसबुक माशूका वाला ही पति चाहिए। क्यूँ बंद कर रहे हैं जी तोहार इस माशूका को। हमको बोलो कैसे तुम्हारी ख़ुशी वापस लायी हम। किस समाज से प्रार्थना करी हम। बोलो हम उनके सामने रोइ गड़गिराई। फिर भी न मानी न कोई तो हम अनशन करी और तब भी न हुई सब ठीक तो हम ईश्वर के सामने मन्नत मांगी। आप बोलो जी बस....बताई हमका।”

चंदनवा के बाबू अब पहले से ज्यादा सदमे में हैं।

 



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