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@dawriter

कौनसा घर 'पराया'

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जहाँ ज्योति की शादी हुई उस घर में किसी चीज़ की कोई कमी नही थी। कमी थी तो बस सोच की ,छोटे मन की। ज्योति अपने मायके से 31 साड़ी लेके आयी थी, वही ससुराल से शगुन के नाम पर केवल 5 साड़ी दी गयी। पर ससुराल वालों को उसके पीहर की दी साड़ीयो में से एक भी पसंद नहीं आयी। अपनी 5 साड़ी उन्हें महंगी औऱ डिज़ाइनर लगती। जिसका ताना ज्योति को वक़्त -बेवक़्त अपनी ननद या सास से मिल ही जाता।

ज्योति को सुबह उठते ही चाय -बिस्किट लेने की आदत थी, उसे भूख बर्दाश्त नही होती थी। लेकिन ससुराल में तो पहले घर के बड़े खा ले फिर बहुएं खाये। जेठ जी और देवर जल्दी दुकान जाते तो सुबह खाना ही खा के जाते तो नास्ते के साथ खाने की तैयारी हो जाती। कभी तो सुबह की चाय का समय ही निकल जाता।

नई -नई थी तो ज्योति ने कुछ नही कहा, पर सुबह खाली पेट इतना काम ज्योति से नहीं होता चक्कर आते थे। सोचती सिर्फ़ चाय ही मिल जाये बस। जेठानी को आदत थी और कभी जेठजी उन्हें खिला देते। एक दिन तो हद ही हो गयी दोनों ननद मायके आयी हुई थी। काम करते -करते दोपहर एक बज गए थे, और ज्योति ने कुछ खाना तो दूर सुबह से चाय भी नही पी। और न किसी ने पूछा उसे। सबको खाने-पीने को समय से जो मिल रहा था।

ज्योति को रोना आ गया। उसे माँ की याद' आयी कैसे मम्मी चिलाती रहती 'ये खा ले, वो पी लें'। पर इतने देर तक कभी भूखी नहीं रही। अब ज्योति ने सासुमां की चाय के साथ अपनी थोड़ी सी चाय निकाल जल्दी से पी लेती जब कोई रसोई में नहीं होता। और कभी बिस्कुट या कुछ और चुपके से खाती। क्या करती भूख बर्दास्त नहीं और चक्कर भी आते।

एक दिन एक केला पड़ा था थोड़ा गल गया था। उसने सोचा फेंकना पड़ेगा इसे अच्छा जितना सही है खा लू। ज्योति ने केला खा लिया। थोड़ी देर में जेठानी आयी और पूछा- 'केला था ना कहाँ गया'। ज्योति ने कहा- वो 'खराब हो रहा था तो मैने खा लिया'। तो जेठानी ने कहा -'वो बिटू (जेठानी का बेटा) के लिए रखा था। और तो कुछ खाता नहीं हैं तो सोचा शेक बना के पिला दूँगी'।

ज्योति ने माफी मांगते हुवे कहा -'सॉरी भाभी मुझे पता नहीं था'। पर जेठानी ने यह बात सबके सामने भी जाकर कही 'सोचा था आज बिटू को शेक पिला दूँगी पर ज्योति ने केला खा लिया'। ज्योति को ऐसे लगा जैसे किसी बच्चे का निवाला खा लिया हो। तब उसने कुछ भी खाना छोड़ दिया।

वो सोचने लगी माँ के घर तो फ्रूट्स आते थे तो माँ सबको देती थी या जो भी खा ले तो कोई सवाल नही पूछता, कहता कोई नहीं ,खाने की चीज़ है और आ जायेगी। पर यहाँ गिनती के फल आते 'ये उसके लिए, वो उसके लिए'। जेठानी जेठ का नाम लेके फल काट के कमरे में ले जाती। और ज्योति के पति को फल पसंद नहीं या कभी एक टुकड़ा खाते।

ज्योति ने अपने आप से कहा- 'लड़कियों को कहा जाता है माँ-बाप का घर 'पराया' होता है और ससुराल उसका 'अपना' घर। पर यह कैसा 'अपना घर 'जहाँ मुझे ताना मिलता रहे अपने ही कपड़ो पर, जहाँ मुझे किसी से पूछ के या छुपके चोरी से खाना पड़े। किसी चीज के लिए मन मारना पड़े।

कौनसा है 'पराया घर' ??

Image Source: dailymotion



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