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@dawriter

अजीब दुनिया अजीब रिश्ते

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dhirajjha123 by  
Dhiraj Jha

परसों ट्रेन में था । वैसे तो ट्रेन से एक दिन का सफ़र आपको अनगिनत चेहरों और यादों से मिलवा देता है मगर मैने इस सफ़र में जो दैखा और महसूस किया वो मेरे लिए चौंका देने वाला था । 
पापा हमारे लिए दोस्त जैसे हैं ( हैं इसलिए क्योंकि आज भी हम उन्हें एक दोस्त के रूप में ही याद करते हैं ) कभी कभी कुछ बातों पर मतभेद हो जाता था तो बहस बहस में थोड़ा ऊंचा बोल जाता था मैं हालांकि वो ऊंचा बोलना बस अपनी बात में वजन दिखाने के लिए होता था मगर फिर भी मन में गलानी होती थी कि पापा को ऊंचा कैसे बोल गए । उनके बाद रात दिन तरसते हैं उनसे बात करने के लिए, उनकी एक झलक देखने के लिए । उनके रहते भी हमें पिता की अहमीयत पता थी और उनके बाद तो ख़ैर शब्दों में बयान नही कर सकते कि कैसा महसूस होता है । 
ऐसे बहुत से पिता हैं जो अपने बच्चों के आदर्श हैं मगर मैने ट्रेन में एक पिता देखा जो शायद किसी गलती के लिए अपनी पत्नी और बेटे से माफी मांग रहा था उन्हें अपने साथ चलने की भीख सी मांग रहा था और वहीं एक बेटा भी देखा जिसने अपने माफी मांग रहे पिता को गंदी गालियाँ देते हुए ना जाने कितने थप्पड़ मार दिए । यहाँ पिता की भारी गलती रही होगी वरना एक बेटा अपने पिता पर हाथ क्यों उठाता मगर वो पिता था चाहे जैसा हो एक बेटा उस पर हाथ उठाने का हक़ नही रखता । 
बहुत दुख हुआ इस पिता और उस बेटे को देख कर जो पिता पुत्र के रिश्ते से कोसों दूर थे । बाप को मारते वक्त बेटे की आँखों में आँसू थे वो आँसू क्यों थे ये उसका ही मन जानता है । वो पिता अपने बेटे को छोड़ गया था वर्षों तक अपने परिवार से दूर रहा और अब अचानक से उन्हें अपने साथ ले जाने आया था । जिसने ये दुनिया बनाई उसने बहुत अजीब तरीका चुना इसे चलाने के लिए । यहाँ कुछ बेटे हैं जो अपने पिता को वापिस पाने के लिए दिन रात रोते हैं और यहीं कुछ बेटे हैं जिनकी आँखों में पिता को देखते ही खून उतर आता है । 
धीरज झा



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