YOUR STORY

साधारण या शानदार

poojaomdhoundiyal   185 views   2 days ago

विराट अनुष्का की शादी और उस पर लोगो की प्रतिक्रिया न्र मेरे जेहन में ढेरों प्रश्न उत्पन्न किये। क्या सच में हमारा समाज ऐसा है जैसा वी दिखा रहा है या फिर वही दुगुलापन!?

कण्डोमविज्ञापन बैन

nis1985   86 views   2 days ago

कंडोम के विज्ञापन पर बैन बहुत ही बढ़िया खबर है, रात के 10बजे के बाद दिखाया जाएगा और जरूरी भी है

बड़े बड़े लोग

Rajeev Pundir   896 views   5 days ago

निम्न मध्य श्रेणी के लोग संपन्न लोगों के बारे में क्या सोचते हैं, पढ़िए एक ऐसे ही इंसान की खिन्नता को दर्शाती इस कहानी में।

ताई

mmb   358 views   2 weeks ago

ताई का रुतबा आखिर समाप्त हो गया। उसका स्थान उसकी बहू ने ली।

पिक्सी

Manju Singh   119 views   1 month ago

मेरा प्यारा पिक्सी,कभी सोचा भी कहाँ था की उसके बिना रहना पड़ेगा। आज उसके जाने के बाद लगता है जैस्र दुनिया ही सूनी हो गयी ।

स्मृति

Manju Singh   723 views   1 month ago

बच्चों के दिल की बात को समझने के लिये उन पर यकीन अवश्य करें और उनकी बातों को कभी बहाना समझ कर टालने की गलती ं करें

त्रियाचरित्र : वरदान या अभिशाप

poojaomdhoundiyal   473 views   1 month ago

"त्रियाचरित्रं पुरुषस्य भाग्यम दैवो न जानती कुतो मनुष्य:"मतलब पुरुष के भाग्य और औरत के त्रियाचरित्र को देवता भी नहीं समझ पाये तो मनुष्य क्या है।

यादें

mmb   825 views   1 month ago

उम्र के अंतिम पड़ाव में जीवन की यादें उमड़ घुमड़ कर आती हैं।

लोगों का न्याय

sunilakash   316 views   1 month ago

वह निर्दोष व्यक्ति जिसने इंसाफ की बात कही थी, लोगों की मार से छूटने के लिए छटपटा रहा था और वहां मौजूद लोग अब भीड़ में मिलकर या तो तमाशा देख रहे थे, या उसे पीट रहे थे।

Fathers legacy

Anonymous
  5 views   1 month ago

My father was just a person who was always thinking about his children. A middle class man who was known for his virtues and calmness.

आत्म दीपो भवः

prakash   42 views   1 month ago

एक साल हो गए इस घटना को, छोटू अब स्कूल जाता है। माँ-बेटे दोनों ही बहुत खुश हैं l इस एक घटना ने मेरे दृष्टिकोण को काफीहद तक बदल दिया था। क्यों कि शायद मन का अँधेरा मिट गया था। आत्मा का दीपक जल उठा था। अंतर्मन का अंधकार मिट गया था। इसलिए मैंने इस संस्मरण का शीर्षक “आत्मदीपो भवः” रखा है।

अखबार वाला

mmb   183 views   1 month ago

नौकरी या व्यवसाय कोई भी हो पूरी निष्ठा के साथ काम करना चाहिए। अखबार वाला न चाहते हुए भी अखबार बांट रहा था।

किडनी के पत्थर

prakash   128 views   2 months ago

मनोशारीरिक भाव में “किडनी के पत्थर” उन आंसुओं का मूर्त रूप है जो समय पर बहे नहीं, जिन्हें हमने अपने भीतर दबा दिया? हमारे शरीर की उर्जा मनोशरीर से मुक्त नहीं हो पायी, उसने पथरी का आकर ले लिया, वह सख्त हो गयी l

वो मैला सा आदमी

nidhi   191 views   2 months ago

उसका आत्मसम्मान और ईमानदारी मुझे किसी पढ़े लिखे इंसान से ज्यादा प्रभावित कर रही थी।। हमारी दिखावटी पीढ़ी में कुछ लोग उस आदमी के मैले कपड़ो से भी ज्यादा मैले मन लेकर घुमते हैं

व्यापार वर्धक यंत्र

kumarg   70 views   3 months ago

इस बरसात में लकड़ियों के खरीदार मिल रहे हैं । पहले तो मुझे लग रहा था श्मशानघाट पर दुकान खोलकर गलती कर दी। लेकिन भला हो उन पंडितजी का अब तो धंधा चौचक हो रहा है पिछले दो घंटे में बारिश के बावजूद लोग घाट की दुकानें छोड़कर मेरे पास आ रहे हैं । "

अनोखी ममता

kavita   265 views   3 months ago

एक माँ की ममता से जुड़ी अविश्वसनीय कहानी.....रोमांचक वर्णन

बदलते बारिश के मायने..

kavita   93 views   3 months ago

बचपन से युवावस्था और बच्ची से विवाहिता बन जाने के मध्य ..आये छोटे छोटे मनोभावों का वर्णन

मुखर्जी नगर- सपनों का नगर

kapilsharma   111 views   4 months ago

मुखर्जी नगर, दिल्ली में स्थित है, जो कि लोक प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी हेतु प्रसिद्ध है।

किसान आत्महत्या का खौफ़ उनके बच्चों के दिलो में

vandita   48 views   4 months ago

पिछले कुछ समय मे किसान बेबस हो आत्महत्या कर रहा है। मैंने इस कहानी के माध्यम से एक किसान परिवार की बच्ची का डर दिखाया है कि किस तरह से एक बेटी अपने पिता के लिए डरी हुई है कि कही वो भी आत्महत्या न कर ले।

"दया ही सभी धर्मों का मूल है"

shivamtiwari   30 views   4 months ago

एक अनुभूति है मूक पशुओं की दुर्दशा देखकर। वो पशु जो अकारण ही दंड के भागी बनते हैं और 'अभिव्यक्ति' से भी वंचित रहते हैं।

पीली चुनरी

prakash   194 views   4 months ago

ये एक अधूरी प्रेम कहानी है।जिसकी शुरुआत तो हुई , पर अपने मुकम्मल मुकाम तक न पहुँच सकी ।

...रामकिशोर ड्राईवर

rgsverma   139 views   4 months ago

अगर रामकिशोर का हुलिया आपको बताया जाये तो मेरे सहित कुछ लोगों की राय थी कि वह अपने समय में तमिलनाडु के कुख्यात दस्यु सम्राट वीरप्पन का मिनी रूप लगता था...

एक स्नेह यह भी.... ----

rgsverma   187 views   4 months ago

स्मृतियाँ कितनी विचित्र होती हैं.न चाहते हुए भी साथ नहीं छोड़ती . और अगर चाहो तो याद नहीं आती. अच्छी स्मृतियाँ तो यूँ धूमिल हो भी सकती हैं, पर कुछ दु:खद और कडूआहट भरी अथवा जटिल-सी स्मृतियाँ तो इंसान पूरी जिन्दगी ढोता रहता है, और वह बस निर्लज्जता से जुड़ी रहती हैं, हमारे साथ, हर समय. 

जान

mrinal   233 views   4 months ago

इंटरव्यू के अंतिम चरण में चयन न होने पर हताश और क्रुद्ध आशुतोष कमरे पर पहुंचते ही पत्नी पर बरस पड़ा।