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त्रियाचरित्र : वरदान या अभिशाप

poojaomdhoundiyal   915 views   1 year ago

"त्रियाचरित्रं पुरुषस्य भाग्यम दैवो न जानती कुतो मनुष्य:"मतलब पुरुष के भाग्य और औरत के त्रियाचरित्र को देवता भी नहीं समझ पाये तो मनुष्य क्या है।

मुखर्जी नगर- सपनों का नगर

kapilsharma   137 views   1 year ago

मुखर्जी नगर, दिल्ली में स्थित है, जो कि लोक प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी हेतु प्रसिद्ध है।

WHERE DOES AKRAM MALIK STAY?

mehakmirzaprabhu   36 views   1 year ago

Stories reflecting today's times of fear, mistrust and love

प्रारब्ध

rgsverma   201 views   1 year ago

हालांकि ठाकुर साब से मेरी मित्रता अधिक पुरानी भी नहीं थी. मात्र लगभग साढ़े तीन साल हुए थे, उनसे मुलाक़ात हुए, और वह भी वाकिंग प्लाजा में. कॉलोनी का यह पार्क टहलने वालों के लिए स्वर्ग से कम नहीं था.

एक स्नेह यह भी.... ----

rgsverma   214 views   1 year ago

स्मृतियाँ कितनी विचित्र होती हैं.न चाहते हुए भी साथ नहीं छोड़ती . और अगर चाहो तो याद नहीं आती. अच्छी स्मृतियाँ तो यूँ धूमिल हो भी सकती हैं, पर कुछ दु:खद और कडूआहट भरी अथवा जटिल-सी स्मृतियाँ तो इंसान पूरी जिन्दगी ढोता रहता है, और वह बस निर्लज्जता से जुड़ी रहती हैं, हमारे साथ, हर समय. 

जिन्दगी का सत्य....... पापा कहां चले गए

rajmati777   971 views   1 year ago

जब मैं बहुत छोटी थी और जब पहली बार किसी की डेड बॉडी देखी तो पापा से पूछा कि क्या है ये। जिन्दगी की सच्चाई जान मैं बहुत रोई।

प्यार नहीं था तो क्या था..

Kalpana Jain   1.10K views   11 months ago

मुझे लगा कि वो मेरा एकतरफा प्यार था लेकिन इतने सालों बाद पता चला कि वो भी मुझसे प्यार करता है...

लघुकथा-- नजरिया

sunilakash   827 views   1 year ago

कई लोग सामाजिक समस्याओं के बारे में बहुत अच्छे तरीके से सोचते हैं किंतु व्यवहार में बिल्कुल उल्टा करते रहते हैं, और उन्हें कभी यह अहसास नहीं होता कि वे उल्टा कर रहे हैं।

તારી વાર્તા મારું જીવન

ashutosh   31 views   1 year ago

ગુજરાતી શીખવવાનો આગ્રહ રાખતા પિતા પુત્રી ની વાર્તા

प्रेम वाला खाना

mmb   1.27K views   1 year ago

पत्नी और मां के हाथों से बनाये खाने में प्रेम और वात्सल्य भरपूर होता है।

भटकती राहें

Sharma Divya   1.36K views   1 year ago

दिखावे की दुनिया में भटकाव से पहले ही संभल गई नेहा।

माँ

dhirajjha123   30 views   1 year ago

माँ को शुरू से ही कभी ज़्यादा मेकअॅप वेकअॅप करते नही देखा । उन्हे कभी से रुचि ही नही रही या फिर शायद हम सब की छोटी छोटी ज़रूरतें पूरी करने और घर के काम काज के बीच ऐसा उलझी की उन्हे कभी खुद को संवारने का मौका ही नही मिला ।

व्यापार वर्धक यंत्र

kumarg   78 views   1 year ago

इस बरसात में लकड़ियों के खरीदार मिल रहे हैं । पहले तो मुझे लग रहा था श्मशानघाट पर दुकान खोलकर गलती कर दी। लेकिन भला हो उन पंडितजी का अब तो धंधा चौचक हो रहा है पिछले दो घंटे में बारिश के बावजूद लोग घाट की दुकानें छोड़कर मेरे पास आ रहे हैं । "

कौनसा घर 'पराया'

Kalpana Jain   1.58K views   1 year ago

ज्योति ने अपने आप से कहा- 'लड़कियों को कहा जाता है माँ-बाप का घर 'पराया' होता है और ससुराल उसका 'अपना' घर। पर यह कैसा 'अपना घर 'जहाँ मुझे ताना मिलता रहे अपने ही कपड़ो पर, जहाँ मुझे किसी से पूछ के या छुपके चोरी से खाना पड़े। किसी चीज के लिए मन मारना पड़े। कौनसा है 'पराया घर' ??

एक मुलाकात

abhi92dutta   85 views   2 years ago

महानगरों के जीवन का अनछुआ पहलु । एक काला सच