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एक स्नेह यह भी.... ----

rgsverma   211 views   1 year ago

स्मृतियाँ कितनी विचित्र होती हैं.न चाहते हुए भी साथ नहीं छोड़ती . और अगर चाहो तो याद नहीं आती. अच्छी स्मृतियाँ तो यूँ धूमिल हो भी सकती हैं, पर कुछ दु:खद और कडूआहट भरी अथवा जटिल-सी स्मृतियाँ तो इंसान पूरी जिन्दगी ढोता रहता है, और वह बस निर्लज्जता से जुड़ी रहती हैं, हमारे साथ, हर समय. 

वो मैला सा आदमी

nidhi   219 views   1 year ago

उसका आत्मसम्मान और ईमानदारी मुझे किसी पढ़े लिखे इंसान से ज्यादा प्रभावित कर रही थी।। हमारी दिखावटी पीढ़ी में कुछ लोग उस आदमी के मैले कपड़ो से भी ज्यादा मैले मन लेकर घुमते हैं

किडनी के पत्थर

prakash   165 views   1 year ago

मनोशारीरिक भाव में “किडनी के पत्थर” उन आंसुओं का मूर्त रूप है जो समय पर बहे नहीं, जिन्हें हमने अपने भीतर दबा दिया? हमारे शरीर की उर्जा मनोशरीर से मुक्त नहीं हो पायी, उसने पथरी का आकर ले लिया, वह सख्त हो गयी l

त्रियाचरित्र : वरदान या अभिशाप

poojaomdhoundiyal   759 views   11 months ago

"त्रियाचरित्रं पुरुषस्य भाग्यम दैवो न जानती कुतो मनुष्य:"मतलब पुरुष के भाग्य और औरत के त्रियाचरित्र को देवता भी नहीं समझ पाये तो मनुष्य क्या है।

एक स्वप्न की मौत

rgsverma   135 views   1 year ago

"...मैं जब भी दिल्ली जाता सुरभि से मुलाकात जरूर होती. वह अपनी व्यस्तता के बावजूद मेरे लिये समय निकालती और हम सब मिलकर कुछ अदद मिली-जुली यादों में उलझ जाते. सुनिधि ने सुरभि को अपना प्यार और ममता उड़ेलने का एक और जरिया प्रदान कर दिया था.... "

वो मलयालम लड़की

writervikassaraf   1.66K views   1 week ago

मयंक को अस्पताल में एक नर्स से प्यार हो जाता है औऱ वो उसे अपने बाबू जी से मिलवाता है. क्या बाबू जी मयंक और उस नर्स की शादी करवाते हैं या जम़ाने के ड़र से दोनों को अलग कर देते हैं. जानने के लिए पढ़िये ये कहानी - वो मलयालम लड़की.

बहू या अलादीन का चिराग?

rita1234   1.54K views   6 months ago

हमारे देश में बहु को अलादीन का चिराग माना जाता है जो कभी भी कुछ भी करने के लिए उपस्थित रहती है।

जिन्दगी का सत्य....... पापा कहां चले गए

rajmati777   964 views   7 months ago

जब मैं बहुत छोटी थी और जब पहली बार किसी की डेड बॉडी देखी तो पापा से पूछा कि क्या है ये। जिन्दगी की सच्चाई जान मैं बहुत रोई।

भटकती राहें

Sharma Divya   1.35K views   6 months ago

दिखावे की दुनिया में भटकाव से पहले ही संभल गई नेहा।

लघुकथा-- नजरिया

sunilakash   820 views   8 months ago

कई लोग सामाजिक समस्याओं के बारे में बहुत अच्छे तरीके से सोचते हैं किंतु व्यवहार में बिल्कुल उल्टा करते रहते हैं, और उन्हें कभी यह अहसास नहीं होता कि वे उल्टा कर रहे हैं।

पटना वाला प्यार

abhi92dutta   351 views   1 year ago

पटना के सभी लड़के और लड़कियों को समर्पित यह रचना । पटना में रहने वाले सभी लोग अपने अपने समय में इस दौर से जरूर गुज़रे होंगे । उन सभी यादों को फिर से एक कहानी के रूप में ...

प्यार नहीं था तो क्या था..

Kalpana Jain   1.10K views   5 months ago

मुझे लगा कि वो मेरा एकतरफा प्यार था लेकिन इतने सालों बाद पता चला कि वो भी मुझसे प्यार करता है...

होली...

cloudy   811 views   8 months ago

कई बार त्यौहार मनाने के उत्साह और जोश में हम वो कर जाते हैं जो किसी की ज़िंदगी को खतरे में डाल देता है।

दागदार हसीन चेहरा

swa   180 views   1 year ago

इतनी खूबसूरत भगवान किसी किसी को खूबसूरती भी बेशुमार देता है मैं उसकी झील सी आंखों में डूब कर खो जाना चाहता था हर पल हर घड़ी अब बस मुझे उसी का ख्याल रहता था

कौनसा घर 'पराया'

Kalpana Jain   1.58K views   7 months ago

ज्योति ने अपने आप से कहा- 'लड़कियों को कहा जाता है माँ-बाप का घर 'पराया' होता है और ससुराल उसका 'अपना' घर। पर यह कैसा 'अपना घर 'जहाँ मुझे ताना मिलता रहे अपने ही कपड़ो पर, जहाँ मुझे किसी से पूछ के या छुपके चोरी से खाना पड़े। किसी चीज के लिए मन मारना पड़े। कौनसा है 'पराया घर' ??