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@dawriter

हमने देखी है

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हमने देखी है
हमने देखी है उन आँखों में खौफ की परछाईं,
हम ने देखी है भरी दुनिया मे उनकी तन्हाई .
हमने बचपन को सुलगते हुए भी देखा है ,
नन्ही सी उम्र में माथे पर चिंता की रेखा है .
सच तो यह है अपनी ख़ुशी के आगे ,
कुछ कभी सोच नहीं सकते हैं हम अभागे
हाथ में इनके किताबें हैं ,न खिलौने हैं
इनको बस उम्र भर मुफलिसी के गम ढोने हैं .
इनकी आँखें न देखतीं सपने ,
सब झिडकते इन्हे पराये हों या हों अपने .
क्या ज़रुरत थी इन्हे क्यों किया तूने पैदा ,
रखना था जब इन्हे हर ख़ुशी से अलहदा
नन्हे कांधों पे ज़िम्मेदारी क्यों ?
सूखी रोटी ख़ुशी पे भारी क्यों ?
कब तक कानून किताबों में सजे बैठेंगे ?
कब ये नन्हे ज़रा जीवन में हंसी देखेंगे ?

मंजु सिंह

Image Source: cbc

#streetchildren



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