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@dawriter

बसेरा मेरा

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ये खुली सड़क का किनारा बसेरा है मेरा
ये पथरीली जमीन बिस्तर है मेरा
ये खुला आसमान चादर है मेरी
यहाँ बीतती रात मेरी यही होता सवेरा है मेरा
माँ नही मेरे पास जो मुझको लोरी गा कर सुलाये
पापा भी नहीं जो मेरी सुने अपनी सुनाये
तारो के संग दोस्ती सब कुछ यही अंधेरा मेरा
दिन भर भीख माँग कर,मजदूरी कर पेट भरता हूँ
रात हुई तो यहीं लेट कर सपने नये घड़ता हूँ।
नहीं नहीं मै नहीं बहादुर,कभी कभी मै डरता हूँ।
रोज रोज मै कभी भूख से कभी मार से मरता हूँ।
कहीं नहीं जाता हूँ मै बस यहीं डेरा है मेरा।
माना आज है काला पर कल तो होगा सुनहरा मेरा।
बस इसी उम्मीद मे रोज मै सोता, रोज जाग जाता हूँ।
अपने सारे सपने मै चंदा मामा को सुनाता हूँ।
वो है सच्ची यारी मेरा उससे कुछ ना तेरा है मेरा।
ये खुली सड़क का किनारा बसेरा है मेरा।

#educatestreetchildren



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