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@dawriter

एक मसीहा आयेगा

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*एक मसीहा आयेगा *

एक बचपन यहाँ रोया तो 
लोरियो की थाप से
दूध के गिलास से 
मां के आँचल में मुस्कुरा उठा 
नव सृजित पुष्प सा खिलखिला उठा..। 
 
कही दूर एक बचपन हैं जो 
नितांत अकेले सूने पथ पर 
फूट फूट कर रोया, 
कतरा कतरा जी रहा वो 
निज बचपन जैसे खो रहा वो 
सूनी सी आखों से 
ना जाने क्या धूढ रहाँ वो। 
 
इस जग मे क्या है बस अंधेरा ? 
इस जीवन पथ पर.. 
क्या एक दिन कभी 
आयेगा नया सवेरा। 
 
मुझ रोते को हँसा कर जो 
भूख मेरी मिटायेगा 
मां सा प्रेम बरसायेगा,, 
हां मेरा बचपन भी मुसकुरायेगा 
एक दिन दूर गगन से क्या 
खुशियां लेकर एक मसीहा आयेगा ? 
हां.. एक दिन वो नया सवेरा आयेगा। 


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