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@dawriter

“ अगर तुम चाहो तो ”

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आज भी मैं तुमसे एक बात कहना चाहता हूँ, अगर तुम चाहो तो

तुम्हें मिलकर कुछ बताना चाहता हूँ, अगर तुम चाहो तो

 

जो व्यवहार हमारा तुमसे है वह हमेशा वही रहेगा, अगर तुम चाहो तो

तुम्हें अपनी कवितायेँ इसी तरह सुनाता रहूँगा, अगर तुम चाहो तो

 

मेरे दिल का ये द्वार हमेशा आपके लिए खुला रहेगा, अगर तुम चाहो तो

दिल के तार रोज़ एक ही संगीत बजाते रहेंगे, अगर तुम चाहो तो

 

मैं तो बेबस हूँ बस... आपकी आवाज़ सुनने के लिए,

तुम मेरा ये इंतज़ार भी पूरा कर सकती हो, अगर तुम चाहो तो

 

मैं ये सब क्यों लिख रहा हूँ, कबसे लिख रहा हूँ, कैसे लिख रहा हूँ, इस बात से तो मैं भी अनजान हूँ,

तुम ही इन रचनाओं का केंद्र हो, ये बात मानकर तुम मुझे बता सकती हो, अगर तुम चाहो तो

 

मेरी अग्रिम कविताओं की तुम नायिका बन सकती हो, अगर तुम चाहो तो

मैं ऐसी अन्य रचनाओं को जन्म देने के लिए और भी प्रेरित हो सकता हूँ, अगर तुम चाहो तो

 

ये दिल अभी नाजुक है, कभी भी टूट सकता है,

पर ये प्यार बहुत अनोखा है, जिसे तुम पा सकती हो, अगर तुम चाहो तो

 

अगर तुम चाहो तो, क्या कुछ नहीं कर सकती हो,

इस बेरंग सी जिन्दगी को फिर से रंगारंग कर सकती हो

 

ऐसी कवितायें आपके,और सिर्फ आपके लिए शायद कोई लिखे न लिखे,

पर कोई तो है जो आजीवन लिखता रहेगा, अगर तुम चाहो तो

 

ऐसी अन्य रचनाएँ शरीर के अंतर्मन में कहीं छुपी हुई है,

आपको मिलकर व और अधिक जानकर, ये और भी प्रगाढ़ रूप ले सकती है, अगर तुम चाहो तो

 

ये मेरा प्यार है तुम्हारे लिए, जो मैं इन कविताओं को स्वयं ही गढ़ रहा हूँ,

मुझे चाहकर तुम इन्हें मूर्तरूप दे सकती हो, अगर तुम चाहो तो



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