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@dawriter

होता

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रदीफ़ - तो होता

कहा जो दिल का किया तो होता
मेरा जहाँ भी तेरा तो होता

पनाह पलकों पे पाते तुम भी
मेरा कहा भी सुना तो होता

सफर काँटों का गुजर ही जाता
जो दर्द में भी हँसा तो होता

मैं रोक देता कदम ही उसके
वो कहके मुझसे खफा तो होता

सज़ा भी ये माफ़ हो ही जाती
उसे भी खुद से गिला तो होता

निगाहें भी ये समझ ही जाती
कहाँ आँखो का किया तो होता


..सोनी केडिया..



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