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@dawriter

जिन्दा है आज भी वो मुझमें जैसे कहीं।

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अब भी चुभती है तेरी बातें दिल मे कहीं,
दूर है मुझसे मेरे आस-पास क्यों नहीं,
कभी थी जिन्दगी अब वो ख्वाब मे भी नही,
हकीकत मे स्पर्श करता था जिसे कभी मै कहीं,
अब डर लगता है अल्फ़ाजो से छूने मे भी,
जिन्दगी थी जो मेरी वो मेरी आरजू भी,
जिन्दा है आज भी वो मुझमें जैसे कहीं ॥

:- चन्द्र प्रताप सिंह



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