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@dawriter

खामोशियों को बोलने दो

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बहुत कह चुकी फिर भी बहुत बात अभी बाकी है।
जिसकी सुबहा खुशनुमा हो वो रात अभी बाकी है।
जो बहा ले जायेगें तुमको वो जज्बात अभी बाकी हैं।
अपने ख्वाबो से जो बनायी वो सौगात अभी बाकी है।
उलझी हुई जिंदगी के धागे तो खोलने दो
मै खामोश हूँ अब मेरी खामोशियों को बोलने दो।
थक गई हूँ मै शब्दो के जाल बुनते बुनते
पक चुके हो तुम भी शायद मुझको सुनते सुनते
फिर भी अनकहे से कुछ अल्फाज अभी बाकी है।
प्यार की जो तुमने दी वो खैरात अभी बाकी है।
तन है स्थिर मन को अब भँवरे सा डोलने दो
मै खामोश हूँ अब मेरी खामोशियों को बोलने दो।
भरा नही मन मेरा तुम्हारे साथ चलते चलते
शायद कह सकूं सब ये शाम ढलते ढलते।
पहलू मे है सिर्फ जर्रा पूरी कायनात अभी बाकी है।
छूना है आसमान छूना आफताब अभी बाकी है।
मेरे अल्फाजों का असर हवाओं मे घोलने दो।
मै खामोश हूँ अब मेरी खामोशियों को बोलने दो।।

 



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