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@dawriter

कोई होता

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खुद में खुद का अक्स ढूंढेने लगी
खुद को अब मैं भूलने लगी
याद नहीं कौन हूँ मैं 
अब मैं सोई सी रहने लगी
पर अभी भी तलाश है
उस एक आवाज़ की
अभी भी तलाश है उस एहसास की
जो लगाये सीने से मुझको
जो झांके मेरे दिल के अंदर
जो कहे डाल आँखों में आँखें
तुम कमज़ोर नहीं हो प्रिये
अभी भी देर नहीं हुई है
कर सकती हो तुम आगाज़ ए नया सफर
एक लौ जो बुझने की कगार पर थी
कोई उसमे नया तेल डाले
हां मैं भी इंसान हूँ मुझको
फिर से ये यकीन करादे।

 

 



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