SHAYARI

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जिंदगी का फलसफा

nis1985   338 views   1 year ago

धुआँ धुआँ सा है जहाँ, रौशनी बहुत कम है.....

बेईमान मौसम

chandrasingh   85 views   1 year ago

मौसमों ने मिल के साजिशें रच रहे थे, उस शरमाती हुई को, बेशरम कर रहा थे !!

नहीं मुझे यह शहर चाहियें

Nidhi Bansal   136 views   6 months ago

मै गाँव में पली बढी हूँ और पिछले 11सालों से शहर में अपना घर बना कर रह रही हूँ। किन्तु गाँव और शहर के परिवेश मे बहुत फर्क महसूस करती हूँ। बस इन्ही भावनाओं को वयक्त करने की कोशिश है।जरूरी नहीं की सभी मेरे विचारों से सहमत हों।

लोगों को बदलते देखा है मैंने

aksha   250 views   1 year ago

It is not a composition but my own experience

एक गज़ल

rashmi   17 views   9 months ago

अपने जीवनसाथी के लिए दिल से की गई प्रार्थना

सागर के किनारे

kavita   162 views   10 months ago

सागर के किनारों सी तटस्थ, और एकल जिंदगी की एक अधूरी प्रेम कहानी....

पेड़

utkrishtshukla   47 views   1 year ago

मनुष्य निरंतर उन चीजों का ही विनाश करता जा रहा है, जिनसे उसके जीवन का वजूद है।

कांच हु अभी....

nis1985   63 views   11 months ago

कांच हूँ अभी,खुद को तराशना है बाकी, जब आइना बन जाऊं,तब दुनिया देखेगी......

चाँद थी वो

neerajself   44 views   10 months ago

I tried to answer of 'who was she?'this way 'chand thi wo'

दिल का हाल

rashmi   13 views   1 year ago

कल्ब में बसी चाहत को कहाँ कोई जान पाता है..बस इसी दर्द को शायरी में लिखने की कोशिश

मन और बुद्धि

utkrishtshukla   34 views   1 year ago

मन और बुद्धि में अंतर चिंतन​ द्वारा सम्भव हो​ सकता है।

अनुभव

utkrishtshukla   96 views   1 year ago

अनुभव इंसान की जिंदगी को आसान बनाने में ख़ास भूमिका निभाते है।

इच्छा

Nidhi Bansal   85 views   7 months ago

मनुष्य का 'कभी ना खत्म होने वाली 'इच्छाओ का सिलसिला,उसके जीवन को नरक बना देता है।

चल आज कुछ किस्से लिखते है ।

chandrasingh   29 views   10 months ago

तेरे हर एक लम्हे के खातिर, अपनी जिन्दगानी लिखते हैं ॥

"लिख दूँ"!!!

ayushjain   17 views   11 months ago

"सोचता हूँ लिख दूँ खुद को दिल खोल कर फिर सोचता हूँ रहने दूँ......