SHAYARI

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जिंदगी का फलसफा

nis1985   410 views   1 year ago

धुआँ धुआँ सा है जहाँ, रौशनी बहुत कम है.....

लोगों को बदलते देखा है मैंने

aksha   279 views   1 year ago

It is not a composition but my own experience

सागर के किनारे

kavita   192 views   1 year ago

सागर के किनारों सी तटस्थ, और एकल जिंदगी की एक अधूरी प्रेम कहानी....

खाना ठंडा हो रहा है…

Mohit Trendster   168 views   1 year ago

काश की आह नहीं उठेगी अक्सर, आईने में राही को दिख जाए रहबर, कुछ आदतें बदल जाएं तो बेहतर, दिल से लगी तस्वीरों पर वक़्त का असर हो रहा है… …और खाना ठंडा हो रहा है।

नहीं मुझे यह शहर चाहियें

Nidhi Bansal   149 views   9 months ago

मै गाँव में पली बढी हूँ और पिछले 11सालों से शहर में अपना घर बना कर रह रही हूँ। किन्तु गाँव और शहर के परिवेश मे बहुत फर्क महसूस करती हूँ। बस इन्ही भावनाओं को वयक्त करने की कोशिश है।जरूरी नहीं की सभी मेरे विचारों से सहमत हों।

खामोशियों को बोलने दो

Nidhi Bansal   127 views   9 months ago

कभी कभी शब्दो से अधिक खामोशियाँ असर करती हैं।

साथी

mmb   114 views   10 months ago

साथी का महत्व बार बार याद आता है चेहरा साथी का साथी के चले जाने के बाद।

अनुभव

utkrishtshukla   107 views   1 year ago

अनुभव इंसान की जिंदगी को आसान बनाने में ख़ास भूमिका निभाते है।

इच्छा

Nidhi Bansal   104 views   10 months ago

मनुष्य का 'कभी ना खत्म होने वाली 'इच्छाओ का सिलसिला,उसके जीवन को नरक बना देता है।

बेईमान मौसम

chandrasingh   91 views   1 year ago

मौसमों ने मिल के साजिशें रच रहे थे, उस शरमाती हुई को, बेशरम कर रहा थे !!

अंत्येष्टि

nis1985   86 views   11 months ago

भावनाये गर शून्य हो जाये, उनकी अंत्येष्टि कर देना श्रेष्ठ है......

“ अगर तुम चाहो तो ”

ankitg   84 views   9 months ago

प्रस्तुत कविता में मैंने अपनी प्रेयसी को एक उर्जात्मक रूप में दिखाने कि कोशिश की है, एक कवि अपनी कविता (प्रेयसी) के सूक्ष्म वियोग में जब कुछ रचनायें लिखता है, उस दर्द को मह्सूस कर लिखने का प्रयास किया है...

मेला

utkrishtshukla   79 views   1 year ago

मेले में मां बाप से बिछड़ने का दर्द सिर्फ वही जानता है जो कभी बिछड़ा हो....

पैमाने के दायरों में रहना... (नज़्म) #ज़हन

Mohit Trendster   78 views   1 year ago

पैमाने के दायरों में रहना, छलक जाओ तो फिर ना कहना… साँसों की धुंध का लालच सबको, पाप है इस दौर में हक़ के लिए लड़ना… अपनी शर्तों पर कहीं लहलहा ज़रूर लोगे, फ़िर किसी गोदाम में सड़ना…

दिल का हाल शायरी की जुबान

rashmi   74 views   1 year ago

कल्ब़ यानि दिल के हाला़त को शायरी में कहने की कोशिश की है