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@dawriter

सितंबर की वो मनहूस सुबह

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रोज की तरह आज भी मंजू को फिर से वही दौरा पड़ा है, ड्राइंग रूम से खिड़की के बाहर खड़ी झाक रही हैं वो, चिल्ला रही हैं वो उसके चीखने चिल्लाने में एक दर्द है, एक एेसा दर्द जो कभी खत्म नहीं हो सकता।

पंकज की बेबस निगाहें ये सब देख रही थी, वो लाचार था अन्दर से टूट चुका था वो.. चार साल से मंजू का यही हाल था।

रोज सुबह होती और वो ड्राइंग रूम में खिड़की से बाहर देखते हुए चिल्लाती.. आते - जाते लोग देखते कोई तरस खाता तो कोई मजाक उड़ता, कोई पागल कहकर उसके किस्मत को कोसता। मंजू स्कूल जाने वाले सभी बच्चों को चिल्ला - चिल्ला कर रोकने का प्रयास करती जैसे कि आज चिल्ला रही हैं....

"अरे कहा ले जा रहे हो अपने बच्चों को मत ले जाओ वापस नहीं आयेगा वो.. अरे कोई इन्हे रोकता क्यो नहीं .. मेरा लाल आज तक नहीं आया.. ये देखो उसका टिफिन और बसता ही आया.. मेरा लाल नहीं आया.. मै कहती हुँ रूक जाओ मत भेजो उस नर्क में.. वो मन्दिर नहीं मौत का घर है"

एक बच्चे ने जब अपनी माँ से पूछा कि माँ ये आन्टी स्कूल को बुरा क्यो बोल रही हैं.. मै लौट के नही आऊंगा क्या तो उसकी माँ ने उसे डाट दिया और कहा सुबह-सुबह ये अपशकुन हो गया.. चलो यहा से राम राम ये अभागन पहले अपनी किस्मत को खा गयी और अब दूसरे के पीछे पड़ी हैं..

पंकज सब कुछ चार साल से देख रहा था.. रोज मंजू इसी तरह चिल्लाती और फिर बेहोश हो जाती। डाक्टर ने "post traumatic stress disorder" से ग्रसित बताया है जिसमें मरीज बीती हुई घटना से निकल ही नहीं पाता है, इसका कारण वो मनहूस सितंबर की सुबह है जब उसका इकलौता बेटा निखिल जो सात साल का था स्कूल गया और फिर कभी वापस नहीं आया.. स्कूल में किसी ने उसकी हत्या कर दी बड़ी बेरहमी से..

उस रात पंकज सो नहीं पाया क्या आर्यन कभी स्कूल नहीं जा पायेगा??? निखिल के लिए जो सपने देखे थे उसने और मंजू ने उसी अधूरे सपने को पूरा करने के लिए ही तो मै आर्यन को घर लाया था.. लेकिन मंजू निखिल के मौत के हादसे से निकल ही नहीं पा रही है, निकल तो मै भी नहीं पा रहा हू कितने नाज़ो से पाला था हमने अपने बेटे को.. और अपने इन्ही हाथों से मैंने उसको उस दिन सितम्बर की उस मनहूस सुबह में मौत के हवाले कर दिया था, वहाँ उस मंदिर में जहा लोग अच्छे भविष्य की कामना लिए जिन्दगी की शुरुआत करते हैं लेकिन मेरे बेटे की तो जिन्दगी ही छिन गई.. आखिर मेरे मासूम बेटे ने क्या बिगाड़ा था उसका??बाद में उस हत्यारे ने कबूला कि उसी ने मेरे बेटे की हत्या की.. वजह उसकी हैवानियत थी कुकर्म में असफल होने पर उस दरिंदे ने मेरे बेटे को मौत के घाट उतार, दिया, कितना तड़पा होगा वो उसकी वो तड़प ताउम्र हमारी जिन्दगी का नासूर बन गया। मंजू की मानसिक स्थिति खराब हो गई वो इस घटना के बाद से हर रोज़ सुबह एेसे ही रिएक्ट करती हैं और बेहोश होने के बाद होश आने पर खूब रोती है। उसके इस हाल पर डाक्टर ने सलाह दी कि दुबारा माँ बनने पर वो शायद सब कुछ भूल जाये.. लेकिन उसकी इस स्थिति में दुबारा माँ बनना भी ठीक नहीं एेसे में मैंने एक दो साल का बच्चा गोद ले लिया कि शायद उसे देखकर मंजू ठीक हो जाये पर मंजू उसको लेकर हमेशा डरी - सहमी सी रहती, 6 साल का हो गया है आर्यन लेकिन मंजू के कारण उसका नाम आजतक स्कूल में नही लिख पाया।

स्कूल के नाम से ही जैसे वो नफरत करने लगी थी वहीं आर्यन बार बार यही पूछता पापा मै स्कूल कब जाऊंगा.. माँ स्कूल से क्यों नफरत करती हैं?? उसके इन सवालों का कोई जवाब नहीं रहता मेरे पास.. ये सब सोचते - सोचते कब पंकज की आँख लग गई और कब सुबह हो गई पता ही नहीं चला उसे..

सुबह जब आर्यन का हाथ पंकज के कन्धे पर पड़ा तो पंकज ने आँखे खोला और देखा आर्यन स्कूल ड्रेस में खड़ा तैयार था और साथ में मंजू उसका बाटल और बैग पकड़े खड़ी थी.. पंकज को जैसे विश्वास ही नहीं हो रहा था आखिर मंजू के अंदर ये बदलाव कैसे आया.. पंकज कुछ बोलता इसके पहले ही मंजू बोल पड़ी... देखो पंकज मेरे निखिल के दोषी को आज फांसी की सजा सुनाई गई है.. आज के पेपर में निकला है.. और वो स्कूल भी बन्द हो गया.. अब मेरा निखिल खुश हो रहा होगा.. मुस्कुरा रहा होगा.. "याद है बचपन में जब उसको चोट लगती थी किसी चीज से तो कैसे हम उसे चुप कराने के लिए झुठमूठ का उस चीज को मारते थे.. और निखिल चुप हो जाता था.. वो भी हमारी तरह अपने छोटे - छोटे पैरों से उस चीज को मारता और अपनी तोतली ज़ुबान से.. मम्मा माली मम्मा माली कहकर कितना खुश होता था मेरा बेटा और मेरे गले लग जाता था मेरा लाल"
आज उस हत्यारे को सजा सुनाने के बाद मेरा बेटा बहुत खुश हो रहा होगा.. बहुत खुश हो रहा होगा..मेरा बेटा कह कर मंजू फफक कर पंकज के सीने से लग गई।

समाप्त

#stopsexualabuse

Image source: naukrinama



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