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@dawriter

बेटियां मांगे न्याय.......

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vandita by  
vandita

रोज की तरह आज भी सोशल मीडिया साइट चेक करते हुए किसी का लिखा हुआ काल्पनिक लेख मिला, जो इस प्रकार है.....

"माँ ,कल से मै बाहर नल पर पानी भरने नही जाऊंगी ।"

तेरह साल की लाली रोते हुए बोली ।

"क्यों री, क्या हुआ ?"

"माँ ,वो ढाबे वाले बिशन चाचा हैं न, रोज रास्ता रोक लेते हैं। कहते हैं अंदर ढाबे में चल बढ़िया-बढ़िया खाना खिलाऊंगा। अजीब ढंग से हाथ लगाते हैं, मुझे बहुत गंदा सा लगता है ।"

"करमजला , हरामखोर , उसकी इतनी हिम्मत। याद नहीं उसे तू हरि सिंह ट्रक डाइवर की बेटी है। अब के फेरा पूरा करके आएगा जब अमृतसर से , सारी करतूत बताऊंगी जन्मजले की। तेरे बाप ने चीर के रख देना है।"

"पर माँ बिशन चाचा से तो सब डरते हैं। उनके बड़े भाई तो वो सफेद जीप वाले नेता के यहाँ काम करते हैं न। और उनके भाई के पास हमेशा बंदूक भी तो रहती है वो बड़ी सी। "

बिल्लो का चेहरा फक्क पड़ गया। आँख के आगे सुखिया की लाश घूम गई , जिसकी घरवाली का हाथ पकड़ लिया था बिशन ने और खूब लठ्ठ बजे थे दोनों में। फिर एक दिन अचानक सुखिया गायब हो गया। पाँच दिन बाद नदी में मछलियों खाई लाश मिली उसकी। सबको पता है क्या हुआ और किसने किया पर मजाल किसी की हिम्मत हो जाए बोलने की।

"सुन लाली। कल से तू पानी लेने नहीं जाऐगी और स्कूल छोड़ने लेने भी मै आऊंगी। अब से ये फाॅक्र पहनना बिल्कुल बंद। कल से सूट पाईं और दुप्पटा ले के सिर ढ़क के जाईं।"

"पर माँ ..."

"पर-वर कुछ नहीं। ऊंट सी हो गई , ओढ़ने पहनने की जरा अक्ल नहीं। किसी और की क्या गलती। और खबरदार कुछ पापा को बोली तो।"

लाली हैरानी से अपने घुटनों से लम्बी फाॅक्र देखने लगी।

इस तरह की घटनाएं पढ़कर मन इस बार भी दुःखी हुआ, आखिर गलती किसकी है? समाज के बड़बोले लोगों का कहना है लड़कियां अधखुले कपड़े पहन आकर्षण का केंद्र बनती हैं, वो खुद ही तो हमे उकसाती हैं, फिर दोष लड़को पर दिया जाता है कि वो हमे अपनी हवश का शिकार बनते हैं। क्या जरूरत है देर रात लड़कियों को घर से बाहर रहने की? क्यूँ क्या ये देर रात तक बाहर रहने का अधिकार सिर्फ लड़कों को ही दिया गया है? ताकि उनका जब जो मन आये वो खुलेआम कर सके। उन्हें रोकने, टोकने वाला कोई नहीं है? सारी बंदिशें सिर्फ लड़कियों के लिए है।

पर मै ये पूछती हूँ आखिर ये छोटी-छोटी बच्चियां कौन से आकर्षण का केंद्र है? जिन मासूम सी कलियों को आये दिन ये जानवर अपने हवश का शिकार बना रहे हैं। क्या 12 साल की नैंसी ने भी अपने अंगों का प्रदर्शन किया था? जिसका अपहरण उसके अपनों ने किया, फिर बलात्कार और अंत मे बहुत ही बेरहमी से तेजाब से जला कर मार दिया। सिर्फ इसलिए कि कहीं नैंसी अपने साथ हो रहे दुष्कर्म को बता न दे।

ऐसी ही एक घटना कोटखाई शिमला हिमाचल में 8 जुलाई को मानवता को शर्मसार करने वाली।

जंगल के रास्ते स्कूल से घर लौट रही 10वी कक्षा की एक मासूम बच्ची "गुड़िया" के साथ बड़ी ही क्रूरता से नोच नोच कर शरीर को 6 दरिंदो ने पहले तो सामूहिक बलात्कार किया फिर उसका गला दबा कर उसकी हत्या कर दी और उसे जंगल मे निर्वस्त्र फेक दिया

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि बच्ची के हाथ और पैर भी तोड़ दिए गए थे उस मासूम ने बचने का बहुत प्रयास भी किया,पर खुद को बचा नहीं पायी। गुड़िया ने स्कूल की ड्रेस सलवार-सूट पहन रखा था, अब भला ये भी आकर्षित करने वाले कपड़े थे या उसका कोई अंग।

हाल ही की एक घटना आप सभी के सामने है चंडीगढ़ की एक 10 साल की लड़की ने एक बेटी को जन्म दिया। पिछले कुछ समय से उस 10 साल की लड़की के साथ लगातार उसके क़रीबी रिश्तेदार ने जबरजस्ती की जिसकी वजह से वी गर्भवती हो गयी। बच्ची के लगातार पेट मे दर्द होने जब माता-पिता ने डॉक्टर को दिखाया तो पता चला वो गर्भवती है। वो मासूम तो ये तक नहीं बता पा रही थी कि उसके साथ हो क्या रहा था। कानून से गर्भपात की अपील खारिज होने के बाद उसने एक बच्चे को जन्म दिया और वो भी बेटी है। जिस बच्ची के अभी खुद के दिन गुड़ियों से खेलने के हैं उसके हाथ मे एक जीती-जागती गुड़िया दे दी। जो खुद तो एक बच्ची है वो कैसे अपनी बेटी को संभालेगी। क्या इस 10साल की बच्ची ने भी अपने अंगों से आकर्षित किया था?

अब तो ये रोज की खबर हो गयी है। न्यूज़पेपर, टीवी, सोशल मीडिया साइट इत्यादी पर बस ये ही देखने सुनने को मिलता है। ऐसा लगता है जैसे हर तरफ एक आग सी फैल गई है जिसकी अग्नि बस धधकती जा रही है। एक तरफ सरकार "बेटी बचाव बेटी पढ़ाओ" का अभियान चला रही है और दूसरी तरफ समाज मेे बढ़ते वहशी दरिंदे बेटियों को अपनी हवश का शिकार बना रहे हैं। आखिर ये सब कब तक ऐसे ही होता रहेगा? कब तक बेटियां बली चढ़ती रहेंगी? क्या कभी बेटियों को न्याय मिल पायेगा? कब हमारे देश मे ऐसे दुष्कर्म करने वालों को सरेआम जिंदा जला देने या फाँसी पर लटका देने की सजा सुनाई दी जाएगी? हमे ये रोज ही नयी खबर मिलती है पर इसकी सजा की कोई खबर नहीं मिलती। हर केश बस सुर्खियों में आने के बाद हमेशा के लिए दफन हो जाती है। ऐसा कब तक होता रहेगा? कब सही न्याय होगा हमारे साथ??



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