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@dawriter

फेक फेसबुक आई डी ..एक अनोखी प्रेम कथा

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फ़ोन की नोटिफिकेशन टोन बजी, रात के 1 बजे लगभग ....अलका चौक गयी कि, इतनी रात को कौन ऑनलाइन आ गया..! उत्सुकता से साइड टेबल पे रखे फ़ोन को उठाया ..और देखने लगी...वैसे रात को सभी कामो से फुरसत पाकर, अपने मोबाइल पर वक़्त बिताना उसे बेहद पसंद था..जब भी फुर्सत के पल मिलते वो जरूर सोशल मीडिया पर वक़्त बिताती...और फिर जब तक पलकें बोझल न हो जाएं ये सिलसिला चलता रहता..!  एक दिन रात के लगभग 1 बजे एक अनजान आई डी से एक फ्रेंड रिक्वेस्ट आयी..अमूमन वो अपरिचितों को ऐड नहीं करती..! सो उसने रिक्वेस्ट रिमूव कर दी..! फिर बात आई गयी हो गयी..क्योंकि ये कोई पहली दफा नहीं हुआ था..।

दूसरे दिन मैसेंजर पर उसे मैसेज मिला जो किसी अनु सिंह का था... कुछ इस प्रकार था:  
hi, how r u?  उसने पढ़ा किन्तु कोई रिप्लाई नहीं किया न ही उसकी मैसेज रिक्वेस्ट एक्सेप्ट की...! 
फिर सोचने लगी कि कहां कहां से आते हैं मैसेज! जिन्हें जानती नहीं...पहचानती नहीं उनसे बताऊं कि, कैसी हूँ मैं! ' हुह बड़े आये फ्रेंडशिप करने वाले..!

खैर दूसरे दिन फिर वही ...देखिए प्लीज मुझे ब्लॉक न कीजियेगा..! मुझे आपसे कुछ पूछना है ! 
प्लीज मेरी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करें..! 
तीसरे दिन आपने जवाब नहीं दिया ? प्लीज मेरी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लीजिए..!
अब अलका सोच में पड़ गयी कि आखिर ये है कौन? इसे कैसे पता कि मैं इसे ब्लॉक कर दूंगी' ....और ये भी समझ नहीं आ रहा था कि ये लड़की है या लड़का? क्योंकि, अनु नाम तो किसी का भी हो सकता था लड़की या लड़के दोनो का..! फिर उसने प्रोफाइल पिक देखने को सोच कर व्यू प्रोफाइल का ऑप्शन खोला तो उसपे एक A नाम का symbol ही दिखा...! उसे उत्सुकता हुई कि, आखिर ये है कौन? उसमे और कोई भी डिटेल्स नहीं दिख रही थी..! फिर  फ्रेंड लिस्ट देखनी चाही तो वो भी न दिखी, उसे लगा कि, यार चक्कर क्या है? थोड़ा संशय हुआ ..! 
फिर उसने विचार परे रख, अपने अन्य कार्यों में व्यस्त होना ही उचित समझा। किन्तु मन मे सोचती रही कि, मै तो किसी अनु सिंह को नहीं जानती..' कौन हो सकता है आखिर..? स्कूल में भी एक अनुश्री थी,छत्रिय भी थी, किन्तु वो राठौर लिखती थी। और अगर वो भी है तो,डायरेक्ट बताती,इतना गुपचुप क्यों मैसेज भेजती..! नहीं ये वो अनु नहीं बल्कि अवश्य ही कोई और है..! 

कुल मिलाकर ये आई डी अलका को भीतर ही भीतर परेशान करने लगी..! पूरा दिन तो व्यस्तता में बीत गया..फिर रात हुई, किन्तु आज उसकी आँखों मे नींद न थी..'...उसे लग रहा था कि,अभी उसका मैसेज आएगा ..! किन्तु उसका मैसेज नहीं आया ..! उसने थोड़ी देर इंतज़ार किया फिर जाने कब उसकी आँख लग गयी...! दूसरे दिन सब कुछ सामान्य रहा ..उसने मैसेज चेक किया तो, एक मैसेज था,gud morning... वो समझ गयी कि ये कोई परिचित ही होगा सोचने लगी ...फिर तुरंत खुद को सम्हाल लिया कि मुझे इसके मैसेज से क्या मतलब ? हटाओ इसे,और उसकी पूरी चैट कन्वर्सेशन डिलीट कर दी..! और सुकून की सांस लेकर अपने आप को आईने में देखा अब उसे अपने आप पर फख्र हुआ कि मैं वाकई कितनी कंट्रोल्ड हूं...! 
फिर वो अपने व्यस्त दिनचर्या में गुम हो गयी...! आफिस से घर लौट कर आती, रात को थक कर चूर हो जाती,ऊपर से ये दिल्ली की भाग दौड़ भरी व्यस्त जीवन शैली..!  12 बजे, फिर 12:30 ..! अब नींद उसकी आँखों से उड़ चुकी थी...वो सोचने लगी कि, अभी तक कोई मैसेज नहीं आया..' आज नींद न थी आंखों में,फिर उसने हार कर फ़ोन उठाया,सोच कर' कि देखती हूँ ऑनलाइन है या नहीं..! उसकी id ढूंढी देखा तो वो ऑनलाइन ..! अचानक उत्सुकता हो गयी  ..उसने सोचा कि, देखती हूँ शायद अब मैसेज आये..! तभी बीप की आवाज़ के साथ मैसेज रिसीव हुआ
...लिखा था 'ओह्ह तो देख रही थी आप कि, मैंने मैसेज क्यों नहीं किया..! ...

अबकी बार उसने तुरंत मैसेज रिक्वेस्ट एक्सेप्ट किया और लिखा ..जी नहीं..मुझे चेक आउट की आदत है..! और आप हैं कौन? और मुझे कैसे जानते हैं..! 
: मैं आपको जानता नहीं, पसंद करता हूँ..!

: मतलब ?

: मतलब साफ है पसंद मतलब पसंद पसंद करता हूं आपको"

:जी मैं कुछ समझी नहीं ?

इसमें समझने जैसा क्या है 'जब कोई चीज पसंद होती है तो होती है.. नहीं होती तो नहीं होती..!

(अलका को उसकी बातें समझ नहीं आ रही थी वो असमंजस में थी कि आखिर यह उसे कैसे जानता है और कौन है ये? )

: क्या सोचने लगी आप ? कि, कौन हूँ मैं और आपको कैसे जानता हूं..!

: हाँ बिल्कुल ..यही सोच रही थी मैं ...!

: hahaha ...' केवल इतना लिख कर भेज दिया उसने इस बार..!

: बताइये वरना..!

:वरना ब्लॉक कर देंगी आप ये तो मैं पहले से जानता हूँ..' ....😊

अलका हतप्रभ सी ...तिलमिला उठी..!
सोचा अब रिप्लाई नहीं करूँगी ..! तभी उसका मैसेज आया ..
:आप सोच रही है अब मुझसे बात नहीं करेंगी ..! पर एक परेशानी है अगर नहीं करेंगी तो दूसरी id बनानी पड़ेगी मुझे..! और दूसरी बात ये कि, अगर मै बता दूं तो हो सकता है शायद आप मुझसे बात करने से इनकार ही कर दें।

अब वो डर गई कि,जरूर ये मुझे अच्छे से जानता है ! वो घबरा गई औऱ फ़ोन ऑफ कर दिया...!
उसका अतीत उसे डराने लगा..! अपने बीते हुए कल से बहुत मुश्किल से मैं बाहर आ पाई थी,तब जाकर अपने अतीत की काली परछाई से बाहर आ सकी थी मगर अब उस भयावह घटना के बाद उसमे किसी पर विश्वास करने की ताकत न थी..!
आज भी याद है उसे ...वो काली रात जब कुणाल के प्रेम जाल में फंस अपना सर्वस्व लुटा आयी थी वो...
हां,कुणाल ने भी यही तो किया था ...कहीं ये वही तो नहीं..? कैसे फेक आई डी बना कर उसने अलका से बातें करना शुरू किया था ....और वो कुछ महीनों की बात चीत को प्यार समझ बैठी थी....! संग जीने मरने की तंमाम कसमें खाने वाला कुणाल,कैसे उसे अपने प्रेम जाल में फंसा कर ...होटल के रूम तक ले आया धोखे से..ये बोलकर कि, बर्थडे पार्टी है मेरी .....! उफ्फ वो दर्दनाक रात क्या कभी भूल सकती हूं अलका ..उस रात सिर्फ उसका शरीर ही छलनी न हुआ था,शायद मन कई परतों तक उधड़ गया था ...और जिस प्रेम की आकांक्षा में उस नीच इंसान के चंगुल में फंसी चली आयी थी वो प्रेम तो न जाने कहाँ गायब हो कर,क्रोध के रूप में उबाल मार रहा था किंतु कुछ नहीं कर सकी वो...क्योकि वो तीन थे और अलका अकेली ...कसमसाती,सिसकती रही..! उस क्रोध और दुख की मिलीजुली अनुभूति ..वो विश्वासघात का दंश ..अद्यतन उसे कितनी ही रातों से रोज कुचलता है..और ठहाके लगाता कुणाल का वो वीभत्स चेहरा ...आज भी रातों को अलका की नींद उड़ा देता है।
इस 'अन्नू वाली आई डी ' के पीछे कहीं कुणाल की कोई चाल तो नहीं ...? कही वो जान तो नहीं गया कि, मैं दिल्ली में हूं..! 
तमाम चिंताओं में उलझी रही ...सोचते सोचते कब सो गई पता ही न चला ...! 
सुबह उठी तो ...रात की बातें जेहन में आ गयी..।
उसने डर कर फ़ोन उठाया ऑन किया ..तो उसके एक नहीं कई मैसेज थे..!

"क्या हुआ, आप बात क्यों नहीं करती ?

:ok मैं तो बस यूं ही आपसे थोड़ा मज़ाक कर रहा था .." मुझे लगा आपसे पहली बार बात हो रही है इसलिए शायद आपको इम्प्रेस करना चाहता था अगर आपको बुरा लगा तो ..'आई एम रियली वेरी वेरी सॉरी और आगे से कभी ऐसा नहीं बोलूंगा, मेरा वो मतलब नहीं था..' --ऋषि

ओह्ह तो इसका नाम ऋषि है ..हो सकता है ये सच ही बोल रहा हो ..! पर आई डी में तो A लिखा है ...खैर जो भी हो ..अलका को कुछ तसल्ली हुई कि शुक्र है ये कुणाल नहीं है। मगर फिर भी वो उसे मैसेज भेजती है...
:इट्स ओके ..बट प्लीज डोंट मैसेज मी अगेन..! 
आपका नाम तो अन्नू सिंह लिखा है ..? आप ऋषि बता रहे हैं ? मुझे तो आप फेक लग रहे हो..!

: आप इतनी परेशान क्यों हैं देखिए मैं मज़ाक कर रहा था...अच्छा अब बता देता हूँ मैं ऋषि हूं, आई मीन ऋषभ देव सिंह याद आया ?तुम मुझे ऋषि बोलती थी..पर मेरा घर का नाम अन्नू ही था ..आई एम योर क्लासमेट ऐट क्लास 9th एंड 10th ..इन DPS ..रेमेम्बेर??

: ओह्ह ऋषि तू !! नालायक तूने कितना डरा दिया मुझे ..! 
और फिर सालों बाद मिले अपने बचपन के दोस्त को पाकर अलका खो सी गयी ...तुरंत नम्बर लिया और फिर बातें होने लगी दोनो के बीच ..! तमाम बातें ..कभी न खत्म होने वाली तभी अलका की डोरबेल बजी ..तब अलका को होश आया कि कामवाली आ गयी और उसे अभी आफिस के लिए रेडी भी होना है..'
अलका : अच्छा सुन ! 9 बज रहे हैं..अभी काफी लेट हो रहा.. मैं तुझसे शाम को बात करती हूं..!

ऋषि :ok ठीक है चश्मिश ..! शाम को मिलते हैं ..कहीं  मुझे तुझसे ढेर सारी बातें करनी हैं..!

अलका: ठीक है मोटे अभी फ़ोन रख..आई एम गेटिंग लेट..! 
काफी खुश थी अलका लंबे समय के बाद कोई दोस्त मिला था ..! जो उसके कल के बारे में नहीं जानता था वरना उस हादसे के बाद से जो भी दोस्त मिलता सब उससे हालचाल पूछने की कोशिश करते और उसी पन्ने को अनजाने में खोल के रख देते जिस पर उसकी तबाही की दास्तान लिखी गयी थी.! तंग आकर अलका ने सबसे कटऑफ कर लिया था..! ऋषि उसका बहुत प्यारा दोस्त था। अलका काफी निश्चिंत सी हो गयी कि, चलो मैसेज वाला सस्पेन्स खत्म हुआ।

शाम को अलका और ऋषि मिले
: अरे ऋषि तू तो पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट हो गया है ..!

: तो तुझे क्या लगा मैं वैसा ही रहूंगा ..लड़कियां मरती हैं मुझपर ..!

: हाँ हां क्यो नहीं..चल अब बता क्या बात करनी है '

:अरे कुछ खास नहीं..पर तू काफी बदल गयी है अलका ..dps ग्रुप पे सर्च किया तब मिली तू ..! तुझसे काफी कुछ बताना था ..जब मेरे पापा का ट्रांसफर हुआ, अचानक जाना पड़ा हम सबको फिर,भी तुझे बहुत मिस किया मैने उस वक़्त तो मोबाइल फ़ोन का चलन भी न था ..तेरे घर पे फ़ोन किया तो पता लगा तुम लोग भी कहीं और शिफ्ट हो गए ..! बहुत परेशान हुआ यार...!

: हम्म और बता तेरी लाइफ कैसी चल रही ..!

:बस ..बंगलोर में जॉब है अभी छुट्टियों में घर पे आया हूँ ..डैड मॉम यहीं हैं ..!

: ओके और शादी?

:अरे नहीं यार अभी नहीं..' कोई पसंद ही नही आई अभी तक..!

: हम्म..!

: और तू ? तूने अब तक शादी क्यों नहीं की? मुझे तो लगा था अब तक तीन चार बच्चों की मम्मी बन गयी होगी ..! (हसते हुए बोला ऋषि..) पर कोई नहीं.. अच्छा चल ये तो बता बॉयफ्रेंड तो जरूर होगा ..कब मिला रही है..!

अलका सकते में आ गयी फिर वही सब ..प्यार. शादी बॉयफ्रेंड  .उफ़्फ़ जैसे कानो में पिघला हुआ शीशा पड़ गया हो वो खड़ी हो गयी..'

: ऋषि प्लीज हर वक़्त मज़ाक अच्छा नहीं लगता ..! मुझे शादी प्यार ..रिश्ता ये सब नहीं पसंद ..नफरत है मुझे इसके नाम से भी..!

अलका कांपते हुए बोली...!

ऋषि शांत और ठहरे हुए गंभीर स्वर मे बोला ..,

:बैठ जाओ अलका ! मैं तुम्हारे बारे में सब कुछ जानता हूँ..!

: क्या ? सब जानते हो,  ओह्ह तो इसका मतलब तुम अब तक नाटक कर रहे थे??

: ''नहीं ये नाटक नहीं है ..मैंने तुम्हें ..बहुत ढूँढा पर कहीं नहीं मिली तुम ''
अदिति कपूर याद है,वो टॉपर अदिति? एक दिन वो मिली मुझे मेरे आफिस में जॉइन किया था उसने..मेरे ही साथ काम करती है .. उससे भी तुम्हे पूछा तो उसने बताया तुम्हारे बारे में सब कुछ  ...!! उसने कहा तुम किसी के कांटेक्ट में नहीं हो .. किसी के पास तुम्हारा एड्रेस फ़ोन नम्बर..कुछ नहीं था ..!

और सच तो ये है कि, मैं तुमसे बहुत प्यार करता था पर जिस समय हम अलग हुए ..वो उम्र नासमझ थी ..जब समझ आया कि ये 'प्यार' है,तो तुम्ही नहीं मिली ..तुम्हारे पापा का भी ट्रांसफर हो गया था ..मैं तो हर जगह ढूँढा करता था तुम्हे ...!

अदिति ने ये भी बताया कि,हो सकता है अलका तुम्हे पहचाने तो बात न करे ..हममें से कोई भी अब उसका दोस्त नहीं...वो किसी से बात नहीं करती मुझसे भी नहीं...वो अपने बीते हुए कल के कारण,अपना आज बर्बाद कर रही है...उस चीज़ की सज़ा भुगत रही है जिसमे उसकी कोई गलती नहीं...!

इसलिए मुझे इस फेक आईडी की जरूरत पड़ी ...मैं साबित करना चाहता था कि, हर बार एक जैसा नहीं होता ...इंसान सही होना चाहिए ...उसके इरादे नेक होने चाहिए...। तुम मुझे एक मौका दे दो बस...तुम्हारा विश्वास मैं खुद जीत लूंगा..!

: पर मैं तुम्हारे लायक...'

:कुछ मत बोलो अलका ! तुम मेरा पहला और आखिरी प्यार हो ...तुम शायद मेरे ही लिए बनी थी,और मेरा प्यार इतना कमजोर नहीं कि, वो तुम्हे इस दौर में अकेला छोड़ दे..!

अलका की आंखों से आंसू बह रहे थे, वो उठकर भाग जाना चाहती थी ऋषि से बहुत दूर ..पर जाने क्यों..भाग नहीं पायी ..इस बार ? आखिर कब तक भागती रहेगी इस तरह अपने अपनों से...! घर परिवार,दोस्त शुभचिंतक कोई न था ...सालों से अकेली रह गयी थी और फिर कोई ऐसा न था जो उसे समझने की कोशिश करता.....सुनती रही अलका ...और बोलता रहा ऋषि...अपने मन के उस अगाध प्रेम के निवेदन के साथ बीते कल से निकलने, आगे बढ़ने का आदेश देते हुए ...और..अलका ...कुछ न कह सकी, शायद सोच रही थी कि, प्रेम शायद यही है जो हर हाल में,अपने प्यार को अपनाना चाहता है। ...सिर्फ ऋषि बोलता रहा ... अलका चुपचाप उसे देखती रही ...!

सांझ गहराती रही और ढलती सांझ के धुंधलके में अलका का सिर, ऋषि के कंधे से टिक गया ...और दोनो की परछाई संग हो उठी.. दोनो के मन की तमाम परतें खुलने लगी मन के तमाम शको-शुबहा को दूर करने की कोशिश करने लगी ...दूर कहीं दुख का सूरज डूब चुका था,अगले दिन पुनः उदित होकर उसकी जिंदगी में नए उजालों के रंग भरने और नवीन ऊर्जा के संचार करने के लिए...!!

-कविता जयन्त श्रीवास्तव



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