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@dawriter

जागरूकता

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nis1985 by  
nis1985

निशा की कलम से...

""विद्यालय में प्रदुम्न की घटना और एक पांच साल की बच्ची का उसके ही स्कूल में रेप की घटना

""मन विचलित हुआ न, सभी माता-पिता का??
डर लगने लगा होगा जरूर,मन और आत्मा झकझोर गयी होगी जरूर,और इन बच्चों की जगह अपने बच्चों का खयाल दिमाग में कम से कम एक सेकंड के लिए तो आया ही होगा

""की कही अगर इसकी जगह हमारा बच्चा?? नहीं!!!! ये नही हो सकता आपकी हमारी रूह कांप गयी न ऐसा सोच के भी

"और इतना सब होने के बाद भी मैंने जब एक खास मित्र के मुंह से सुना कि अरे ये सब घटना तो बड़े शहरों में होती है,हमारे छोटे शहरों में तो सब एक दूसरे को पहचानते है यहाँ नही हो सकता

""हद है ऐसी लापरवाही भरी बातें सुनकर वो भी अपने बच्चों के प्रति इतना गुस्सा आया कि शायद सामने होने पे मैं ,उसे काफी कुछ सुना देती की उसकी रूह कांप जाती

""अरे मूर्ख ऐसी घटना का किसी जगह से कोई लेना-देना नही होता, विकृत मानसिकता के व्यक्ति हर जगह पाए जाते है,जो रेप या यौन शोषण जैसी घटना को अंजाम देते है,स्कूल की बात तो अलग पर आप ये भूल रहे है कि जान पहचान का व्यक्ति ही ऐसी घटनाओं को आसानी से अंजाम दे सकता है चाहे कोई बड़ी जगह हो या छोटी

""पर स्कूल की इतनी बड़ी घटना को देखते हुए हमें अपने बच्चों के प्रति थोड़ी नही अपितु बहुत अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है

""सवाल ये उठता है कि हम अपने छोटे बच्चों से ऐसी बातों को कैसे समझाये?? मन नहीं मानता, हा मेरा भी बिल्कुल नहीं मानता ,दिन भर दिमाग उलझन और संकोच से ही भरा रहता है, पर क्या पांच साल की बच्ची के साथ क्या हुआ होगा, वो समझ भी पाई होगी या फिर प्रदुम्न समझ पाया होगा, इससे पहले भी उस रेपिस्ट ने उस बच्ची को फुसलाने के बहाने टच किया होगा या प्यार से गालों को छुआ होगा

""वो बहुत परेशान भी हुई होगी उसे उस अंकल का टच करना पसंद भी न आता हो, पर उसने यही सोच के घर मे नहीं बताया होगा कि अरे मेरे मम्मा-पापा और दादा -दादी भी तो मुझे ऐसा ही प्यार करते है हमेशा

""पर वो छोटी सी बच्ची इस टच के फर्क को नहीं समझ पा रही थी,उसे क्या पता ये सब होता भी क्या है, और घर मे कभी उसे इस बारे में सचेत किया ही नहीं गया, इसलिए उसने इस बारे में घर मे कभी किसी से कुछ भी नहीं बताया

""क्या करे हमारी यही सोच है कि ये सब बता के बच्चों का बचपना कैसे छीने पर आज इसी जागरूकता की कमी से बच्चों के साथ बाहर या स्कूल में क्या हुआ, वो कभी नहीं बताते,और किसी और कि घटिया मानसिकता ने बच्चे का बचपन तो क्या उसका जीवन ही छीन लिया

""सबसे पहले तो बच्चों को हमें 【गुड टच】और【 बैड टच】में फर्क समझाना होगा, क्योंकि अब ढ़ाई साल में ही बच्चों को हम नर्सरी में भेजना शुरू कर देते हैं, साथ ही उन्हें उनके 【 बॉडी पार्ट्स】 के बारे में समझाना होगा कि कौन से अंग 【सवेदनशील】है

"" उनकी उम्र के हिसाब से ही जैसे हम उनसे घर मे बातचीत करते हैं, सहज शब्दों मे समझाना होगा, बातो ही बातो में कि बाहर या स्कूल में अगर आपको इधर कोई टच भी करता है, तो आप तुरंत मम्मा या पापा को बताओ

""साथ ही उन्हें ये समझाना होगा कि घर मे अगर आपके मां ,पापा ,दादा या दादी अपको प्यार करते हैं, या कभी आपको स्कूल में टीचर भी प्यार करती है तो आपको अच्छा लगता है, और आप मुस्कुराते भी हो तो बच्चे इसे 【गुड टच】 कहते हैं

""लेकिन अगर यदि बाहर या स्कूल में और कोई आपको इसी तरह से प्यार करता है, और आपको बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता, और आपके मना करने पे भी वो बार -बार ऐसा ही करे और आपको इधर-उधर टच करे तो बच्चे इसे हम 【बैड टच】 कहते हैं, और अगर ऐसा आपके साथ होता है तो आप तुरंत अपनी टीचर को बताओ और घर आने के बाद अपने मम्मा, पापा को भी बताओ

"" बच्चों को स्कूल बस में स्कूल भेजने से उसके वापस आने के बाद तक का पुरा ब्यौरा बड़े प्यार से बच्चों से आप लेते रहें कि जाते समय बस में क्या -क्या हुआ और दिनभर स्कूल में आपने क्या किया ,टीचर ने क्या- क्या पढ़ाया और आते समय स्कूल बस में क्या हुआ,अगर किसी दिन आपका बच्चा थोड़ी भी उदास दिखे तो उस से तो पूछे ही, साथ ही उसके स्कूल में तुरंत फ़ोन करे और जानकारी दे, हो सकता है कि टीचर ने डांट दिया हो, या किसी बच्चे नेे मार दिया हो पर इसे भी हल्के में न ले रोज जानकारी ले बच्चे से भी, उसके टीचर से भी और उसके बस ड्राइवर से भी ताकि सबको लगे कि आप अपने बच्चे को लेकर बहुत ज्यादा सतर्क हैं

""शुरू से ही घरवालो को अपने बच्चों को चाहे वो लड़की हो या लड़का स्कूल भेजने से उसके आने तक बहुत टेंशन रहता है और आजकल की घटनाएं हमे और भी ज्यादा मजबूर कर दे रही हैं सोचने पे

लेकिन बहुत से अभिभावक हैं, जो आज भी अपने बच्चे का स्कूल में उसकी पढ़ाई के अलावा कोइ ब्योरा नहीं लेते, खासकर बच्चों से ज्यादा कुछ नहीं पूछते, सीधा उनके स्कूल में जा के उसकी पढ़ाई और फीस की चर्चा ही उनका अहम मुद्दा होता है, शायद समय के अभाव के कारण

""पर बस मैं इतना कहना चाहूंगी कि आजकल की इतनी ह्रदय विदारक घटना को देखते हुए, अपने बच्चों की पूरी खबर रखनी जरुरी है, वो भी उनसे बड़े प्यार से ,उन्हें पर्याप्त समय देकर और मित्रवत व्यवहार रखकर, ताकि वो समझ सके की माता -पिता से बढ़कर बाहर उनका कोई भी मित्र इतना विस्वास पात्र नहीं हो सकता कि उनसे वो अपनी निजी बातें साझा कर सके..बस थोडी सी सावधानी हमारे और हमारे बच्चों के लिए मददग़ार हो सकती है

""मैने इन घटनाओं को देखते हुए अपनी समझ से ये आर्टिकल लिखने की कोशिश की है
अगर आपको लगता है कि जो होना है, वो तो होकर ही रहता है, और बड़े शहरो में ही ऐसी वारदातें होती हैं तो ऐसी सोच को मेरा नमन खैर???©

निशा रावल
बिलासपुर

#childharassment

Image Source: youtube



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