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@dawriter

क्या यही प्यार है

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rajmati777 by  
rajmati777

बादलो की गड़गड़ाहट की गूंज ने मेरी नीन्द्रा तोड़ दी। आज अपने को बहुत अकेला महसूस कर रही थी।

खिड़की के झरोखे से बाहर झांक कर देखा तो , एक दुल्हन की विदाई हो रही थी।शहनाई की धुन पर गराती और बाराती नाच रहे थे।मन में उत्साह, उम्मीद, उमंग की नई दिशा ले दुल्हन अपने दूल्हे के साथ बाबुल का आंगन सुना कर उसके आंगन को आबाद करने जा रही थी।

अन्दर आ अपनी अलमारी खोली, अपनी शादी की एलबम निकाल,उस पर लगी धूल को साफ किया, एक एक छायाचित्र को देखती हुई अपने अतीत की यादों में खो गई।

"नीरा जल्दी से सुहानी को तैयार करो और तुम भी तैयार हों जाओ, बारात आने वाली है। थोड़ी सी भी देर नहीं होनी चाहिए,वरना वरपक्ष वाले नाराज़ हो जायेंगे।"ये आवाज़ मेरे बाबूजी जी की थी।

मेरे पापा आज कितने सुन्दर लग रहें थे, गुलाबी साफे में, और मां भी नीली साड़ी में लिपटी हुई कितनी खूबसूरत लग रही थी।

तभी बैंड बाजा की आवाज सुनाई दी, सभी बारातियों के स्वागत के लिए बाहर जा , हाथों में फूल मालाएं ले , उनके स्वागत में पलक पांवड़े बिछा दिए।

देखो देखो,दूल्हा कितना सुन्दर है,अपनी सुहानी की तों क़िस्मत ही खुल गई। सुहानी भी बालकनी में आ बारात का स्वागत देखने लगी। उसकी नज़र तो अपने भावी शौहर पर थी। आज वो बहुत खुश थी।

शादी की सारी रस्में पूरी हुई, और विदाई की वेला भी आ गई। बाबुल का आंगन सुना हुआ,बिटियां ससुराल के लिए रवाना हुई, और गाना 'बाबुल की दुआएं लेती जा, जा तुझको सुखी संसार मिले,' सबकी आंखें नम हो गई।

................ नये संसार के नव प्रभात में दिल के नव अरमानों को संजोए पिया के घर उठी। अरे ये क्या.......... घर तों पूरा सुना सुना है।सब कहां गए। अपने पति साहिल को उठाया।"साहिल उठो ना, देखो घर में तो कोई नहीं है,सब कहां गए। रात को तो मेरे स्वागत में पूरा घर भरा था।"

........."क्या हुआ, वो तो सब भाड़े के लोग थे, यहां रूक कर क्या करते। ये तुम्हारे बाप का घर नहीं है, जो यहां वो ठहरते।"साहिल का उत्तर सुनकर........... क्या........ क्या..... तो वो तुम्हारे मां बापू भी........।"और वो फूटफूटकर रोने लगी।

साहिल ने उसका मुंह बंद कर,"चुप हो जाओ, और ये रोने का नाटक बंद करों। जल्दी से तैयार हों जाओ, मेरे कुछ खास मेहमान आने वाले हैं, तुम को उन्हें ख़ुश करना है, और सुन लो, उनके सामने कोई नाटक मत करना।" यह कह वो बाहर कमरे में चला गया।

अब तो रोजाना सुबह होती, शाम होती और मेरी जिंदगी कुछ लोगों के नाम होती। मैं इस दल-दल में फंसती जा रही थी। साहिल की सच्चाई घर वालों को कैसे बताऊं, सोचती रहती। कब तक इस दरिंदगी की शिकार हो अपना बदन तबाह करती।

पानी का घड़ा भर जाता है ना हद से ज्यादा तो वो फूट जाता है। वो ही मेरे साथ हुआ। मैं अपने आप को कमजोर समझने की भूल कर बैठी थी। पर बहुत हुआ.............. अब तक...... अब नहीं...।

हिम्मत दिखा एक दिन साहिल की कैद से आजाद हो भाग निकली। उसकी सच्चाई सबके सामने बताई।उसको जेल की सलाखों में कैद करवा आज दिल को शान्त महसूस कर रही थी।

बाबा तो सच्चाई जान खुद को कसूरवार मान‌ मेरे कदमों में गिर माफी मांगने लगे।"बाबा ,मत करो ऐसा, जो मेरी जिंदगी में लिखा था, वो हों गया।अब मैं आजाद हो गई हूं।"

"बाबा उठो, मुझे अब नयी जिन्दगी की शुरुआत करनी है आप साथ दोगे ना।"बाबा ने हां हां......कह मुझे गले से लगा लिया।

तभी फोन की घंटी ने अतीत को छोड़ उसे वर्तमान में ले आई।"हेलो मेम, आप के पुलिस अधीक्षक की पद पर रहते हुए आप के कार्य को देख कर भारत सरकार ने आप को"पुलिस महारत्न"से सम्मानित करने का निर्णय लिया है। आप को बहुत बहुत बधाई।"

यह सुनकर उसकी आंखें नम हो गई,पर वो सारी पीड़ा भूल........जय हिन्द,जय हिन्द,,कह गौरवान्वित महसूस करने लगी।



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