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@dawriter

कोरा कागज़

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rajmati777 by  
rajmati777

आज जैसे ही आशू ने मोबाइल खोल कर देखा तो उसकी नज़र संदेशों की ओर पड़ी।"अरे बाबा इतने मैसेज, लोगों को कुछ काम नहीं है करता,सारे दिन फोन पर लगे रहते हैं।"

तभी उसकी नज़र संदेशों के बीच एक व्यक्ति के मैसेज पर गयी। क्या बात है, ये महाशय तो बड़े होशियार निकले। इनबॉक्स में फोटो डालनी भी शुरू कर दी।

कितना अजीब इंसान हैं, इतनी फोटो। मैंने तो परेशान हो कर कह भी दिया‌ उसे, प्लीज़ मुझे मैसेज मत भेजो, मैं किसी से कोई बात नहीं करती।

पर वो कहां मानने वाला था, मैसेज पर मैसेज,जब देखो तब ओनलाइन। मुझे तो बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था। पर उसकी रिक्वेस्ट मैंने न चाहते हुए भी मान ली। अब वो पूरा दिन बस मेरा ही इन्तजार करने लगा। जैसे ही मैं आनलाइन होती और वो बात करना शुरु कर देता। मैं ज्यादा वक़्त नहीं दे पाती थी, मुझे बहुत काम रहता था।

मैंने एक दिन पूछ ही लिया,"तुम को मुझ में इतना क्या इंटरेस्ट है, "तो बोला, "तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो, तुम्हारी आंखें बहुत सुन्दर है, तुम्हारे होंठ बहुत सुन्दर है। "मैंने कहा,"ऐसा कुछ नहीं है, मुझमें, मैं तो साधारण सी हूं।" "अरे तुम्हें क्या पता, तुम पर तो हर रंग फबता है। "मुझे तो उसकी बातें बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी। पर दिल में मेरे कहीं न कहीं अन्त्तर्द्वन्द चलने लगा, क्या पता यह अच्छा इंसान हो। पर एक दम से विश्वास कैसे करूं।

"आप कितने साल के हो,और परिवार में कौन-कौन हैं,"मैंने हिम्मत करके एक दिन पूछ ही लिया। "मैं पैंतालीस साल का हूं, मेरे एक बेटा है।" ....... आप पैंतालीस साल के हैं, आप तो पचपन साल के लगते हों,"मैंने पूछा तो उसने कोई जवाब नहीं दिया।

हां मैं तो आपको उसका नाम बताना ही भूल गयी। उसका नाम शम्मी था, पर वो नाम तो फेसबुक पर था, असली नाम तो उसका विपुल शाह था।"यार, मेरी पत्नी से मैं बहुत परेशान हूं, मेरी शादी शुदा जिंदगी कुछ सही नहीं चल रही है, मैं अपनी जिंदगी से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हूं,"एक दिन शम्मी का ये मैसेज पढ़ मै‌ हतप्रभ हो गई। ये क्या..... ये क्या चाहता है, मुझसे।

"मुझे ये बातें बिल्कुल भी नहीं पसंद, प्लीज़ आगे से ऐसे मैसेज मत भेजना।"ओके.... उसने ये बोल तो दिया पर.......। ",तुम्हारे नम्बर दो ना, हम व्हाट्स अप पर बातचीत करेंगे। मैंने कहा"मैं अनजान लोगों को नम्बर नहीं देती।"मैं अब भी तुम्हारे लिए अनजान हूं,"ये कह एक बार फिर से उसकी बातों में मुझे फंसा लिया। अब तो वो मुझे पूरा दिन मैसेज भेजता, मैं जवाब नहीं दे पाती तो फोन कर बात कर लेता। मुझे भी अब वह न जाने क्यूं अच्छा लगने लगा था।"क्या तुम सबसे ऐसे ही बात करते हों, "मैंने पूछा। तों बोला, सबसे थोड़ी ना करता हूं। तुम मुझे अपनी लगती हो। मैंने कहा,"मैं तो तूमसे बहुत छोटी हूं,"तो वो बोला,"क्या हुआ,"।

धीरे धीरे बातों का सिलसिला जारी रहा, और धीरे धीरे वो मुझे मेरी व्यक्तिगत बातों को पूछने लगा।"मैंने कहा मैं नहीं शेयर करती, अपनी बातें,।"प्लीज़ मुझे बताओ ना, हमें भी कुछ नये आईडिया मिलेंगे।"मैं एक औरत हूँ कैसे किसी के साथ अपने सेक्स की बातें किसी के साथ शेयर करूं।"साॅरी मैं नहीं बताऊंगी, ये बातें, मुझे ये सब अच्छा नहीं लगता।"

"मत बताओ, मेरी पत्नी तो मेरे को बिल्कुल संतुष्ट नहीं करती,जब भी कहता हूं तो मना कर देती है, मैं सेक्स किए बिना नहीं रह सकता। मुझे तो दिन में चार चार बार करने की इच्छा होती है।"मैंने कहा" इस उम्र में चार चार बार,हम तो एक बार भी नहीं कर पाते।"......

"फिर तुम कैसे करते हो,"...."मैं तो वीडियो देख कर करता हूं"........ तुम को इतना क्या शौक है, जो इस तरह करते हों,"....... नहीं मुझे अच्छा लगता है"....आशी के मन में विचार आया कि ऐसे भी करता है, जमाना कितना बदल गया है, पर ये ग़लत है। होगा करता, उसक जिन्दगी है, वो कैसे भी जिये।

"आज तुम ने सेक्स किया,"...."हां".... कैसे किया कुछ बताओं ना। कौन शुरुआत करता है, तुम की तुम्हारा पति।".... मैं कुछ नहीं बताऊंगी, तुम बहुत गंदे हो,".... अरे बता दो ना।हम क्या सही में तो नहीं कर रहे हैं।"

और मैं भी नदी की लहरों की तरह उसके साथ हिलोरें मारने लगी, और सब कुछ जो अकरणीय था, वो मैं करने लगी।"आशी,यू आर सो स्वीट, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। तुम ने मेरी जिंदगी ही बदल दी।"

"शम्मी कहाँ हो,"आज कल मैं मैसेज भेजती हूं, तुम ज़वाब नहीं देते,बहुत व्यस्त हो क्या।"....."हां,यार बहुत ज्यादा व्यस्त हूं।"वो अब उसके मैसेज का इन्तजार करती,पर कोई जवाब नहीं मिलता। आशी उससे बहुत प्यार करती थी, उसको अपना बेस्ट दोस्त मानती थी। उसने तो उसके प्यार में सर्वस्व समर्पित कर दिया था।

एक दिन एक औरत का मेरे पास मैसेज आया,"शम्मी तुम्हारे साथ भी सेक्स की बातें करता है ," मैं तो कुछ नहीं बोली, पर उसके मैसेज से पता चल गया कि ये तो उसकी आदत है, वो सभी से ऐसे ही बात कर के, प्यार का नाटक कर, ऐसी गन्दी बातें करता है।

मैंने उसको बोला,"कुछ औरतें तुम्हारे लिए ऐसे बोल रही थी, मेरे पास मैसेज आया,"तो बोला,"मैं कोई गन्दा इंसान थोड़े ही ना हूं।"

पर मुझे तो उसकी सच्चाई पता चल‌ गई थी। मन में सोचा, जो अपनी पत्नी का ही नहीं है, वो हमारा कब होगा। पर वो अपनी जिंदगी में रिश्ते में धोखे से कितने ही रंग भरना चाहे, वो तो कोरा कागज़ ही रहेगा। जो दूसरों की जिंदगी को बेरंग बना अपना स्वार्थ पूरा करने की कोशिश करेगा, वो जिंदगी में रिश्ते की परिभाषा को कभी समझ ही नहीं पायेगा।



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