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@dawriter

कमली

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सुबह से धुआंधार बारिश हो रही थी मैं सोच रही थी कि जाने आज काम वाली आएगी कि नहीं...क्योंकि आज कल रोज़ ही उसका कुछ न कुछ नाटक लगा रहता था...आये दिन बहाने कुछ न कुछ कभी बच्चा बीमार कभी सास कभी बेटा अस्पताल में भर्ती तो कभी खुद बीमार...!! पता नहीं ये सच्चाई थी या बहाने ...!!

पर पहले वो ऐसी नहीं थी ...कमला नाम था मेरी मेड का ...यूँ तो कमला उम्रदराज सा नाम लगता है मगर वो यही कोई 30 से 35 की उम्र के लगभग रही होगी ...बहुत शादी को 10 साल हो गए थे पर कमला थी बड़ी जिंदादिल...!! आते ही चुटकियों में काम निपटाती ...और मोबाइल पर गाने सुनते हुए ही मैडम के हाथ फुर्ती से चलते..!! मुझसे बहुत मुँहलगी थी..सारे दिन भाभी-भाभी की रट लगाई रहती..देखने मे आप उसको मेड नहीं कह सकते हो, एकदम फैशन से कान में ईयर फ़ोन लगाए अपनी धुन में रहती । रंग थोड़ा सांवला था और कद मध्यम ...पर शरीर ऐसा कि, लगता ही नहीं था कि चार बच्चों की माँ है..! उसे मैं प्यार से कमली बोलती थी...तो संगीत प्रेमी कमली अपने नाम पर इतराती हुई ..'नी मैं कमली-कमली ..' गुनगुनाने लगती ... आज भी याद है मेरे बेटे विजित के जन्मदिन पर "प्रेम रतन धन पायो .." की धुन पर जो नाची कि, सोनम कपूर भी शर्मा जाए..! उसके डांस का वीडियो मैने सभी सहेलियों को गर्व से दिखाया था..वो मुझसे काफी लगाव भी रखती थी..! कोई नया सूट या साड़ी हो तो वो उसको चाहिए, या फिर कोई नई डिश बनी हो तो उसका हिस्सा जरूर बनाती थी मैं... धीरे धीरे वो घर की सदस्य सी हो गयी....!

पर आज कल कमली कुछ उदास सी रहती थी, ज्यादा बात नहीं करती थी..! मैने ज्यादा ध्यान भी न दिया..क्योंकि दिन में मैं आफिस चली जाती थी फिर शाम को जब आती तो थकान के कारण आराम करने लगती और वो अपना काम निपटा के चली जाती थी । खैर शाम होने को आई मैं अपने काम समेट कर खाली बर्तनों को सिंक में डालकर धोने ही जा रही थी कि, डोरबेल बजी... मैने सोचा शायद पति होंगे.. दरवाज़ा खोला तो सामने कमली खडी थी..मेरी जान में जान आयी कि चलो आयी तो महारानी ..!! मैंने उसे डपटकर कहा - " क्यों कमली..' आज सो गई थी क्या ?

उसने अंदर आते हुए कहा " भाभी पानी बरस रहा था तो कैसे आती ..! "

मैंने कहा: " अच्छा ! आज के पहले तो तू कभी पानी बरसने के कारण नागा नहीं करती थी ..!! झूठ मत बोल ..! सच ही बोल दे कि सो रही थी सुबह से..!! "

उसने फीकी सी मुस्कान से मेरी ओर देख कर तुरन्त नज़रे हटा ली..मैं उसे ध्यान से देख रही थी कि आज इसे क्या हो गया है ..? ऐसे तो ये नहीं रहती थी.." और ये क्या इसके आंख के पास ये काला सा निशान कैसा? मैंने उससे पूछा "अरे कमली ! ये निशान कैसा है? ..वो अनजान बनते हुए ..कहाँ पर भाभी, अरे' वो ' ..वो तो गिर गयी थी बारिश के कारण इसलिए चोट लग गयी..!

मैं थोड़ी आश्वस्त हुई फिर वो काम करने लगी और मैं भी अपने कमरे में आ गयी..पर उसके ही विषय मे सोचने लगी..कुछ देर बाद वो आयी और बोली .."जा रही हूं भाभी, दरवाजा बन्द कर लो..! " मैं उठी और उसके पीछे चल दी तभी उसकी पीठ पर दो लंबे निशान देखे . .. मै अब समझ गयी थी कि वो कुछ छिपा रही है ..और ऐसे नहीं बताएगी मुझे.. कल इससे बहाने से पूछती हूं.... फिर वो चली गयी और मैंने उसके जाने के बाद सोचा कि जरूर ये मार पीट के निशान हैं, और आज कल कमली फ़ोन पर गाने भी नहीं सुनती..! जाने क्या चल रहा है उसकी लाइफ में ? क्या दुख है उसको ..? ये सब कुछ सोचती हुई मैं काम करती रही..और डिनर की तैयारी आदि में व्यस्त हो गयी किन्तु रह रह कर कमली का चेहरा मेरी आँखों के आगे नाच जाता..!

दूसरे दिन संडे था मैंने सोच रखा था कि,आज कमली से पूछूँगी जरूर ..पर आज फिर कमली न आई,देखते - देखते 12 बजे, फिर 1, 2 फिर 3 ...धीरे धीरे पूरा दिन निकल रहा था..मैं अब बेचैन हो उठी..!! कि आखिर बात क्या है..वो आज कल ऐसा क्यों कर रही है उसके नम्बर पर फ़ोन लगाया तो नम्बर स्विच ऑफ आ रहा था..! घड़ी देखी तो 5 बजने में 10 मिनट बाकी थे, मैंने कुछ सोच कर उसके घर जाने का निर्णय लिया.. और अपनी स्कूटी निकाल कर पास की बस्ती में जहां का पता कमली ने मुझे बता रखा था वहां पहुंची..कमली का नाम लोगों से पूछती मैं उसके घर की खोज करने लगी..उस बस्ती में ज्यादातर घरों में दरवाज़े बन्द ही थे और एक और बात.. वहां एक अजीब सन्नाटा पसरा हुआ था और मैने कुछ दूरी पर स्थित एक झोपड़े में देखा, कुछ महिलाएं बैठी मातम की स्थिति में बात चीत कर रही थी और बच्चे भी बैठे थे। मैं उत्सुक होकर आगे बढ़ी कि, शायद इन्हें कमली के बारे में पता हो..!

वहां पहुंच एक स्त्री से मैने कमली के बारे पूछा तो उसने कहा : " मेमसाहिब ! तुमही कमली क ऊ वाली भाभी हौ ना? जहां उ काम करत रही ..?

मैंने कहा : हां,मैं बही हूं पर कमली कहाँ है?

ये सुनकर पास बैठी एक 7-8 साल की बच्ची रोने लगे गयी..और एक बूढ़ी महिला की गोद में सोया बच्चा जाग गया...

उस स्त्री ने पुनः कहा..." मेमसाहिब कमली तो कल राते का गुज़र गयी..बहुत दुखी रही ही बेचारी ..! उका निगोडा मरद तो उका खा गवा.. ऊब गयी रही रोज़ रोज़ के चिक चिक से,यही से बच्चन का सुलाय के फांसी लगाय लिहिस ...! पुलिसवा वाले ओकी लाश और ओके निगोड़े मरद दुइनो का लेइ गए साहिब..!

मै तो जैसे आकाश से गिरी ..मुझे बिल्कुल भी अंदेशा नहीं था की ऐसा भी कर सकती है कमली..वो तो इतनी जिंदादिल और हँसमुख थी वो कैसे आत्महत्या कर सकती है ? मैंने उसी से दोबारा पूछा ..

" ऐसा क्यों किया उसने ? क्या करता था उसका मरद? मारता पीटता था..?

" मारे पीटै के तो जाय देयौ..वा कमीना तो कमला के शरीर का बेच के दारू पियै चाहत रहा, भाभी ..! दारू के नसा मा पगलाये गै रहा..! सेनुर डाल के जेका मेहरिया बनाइस वही के सरीर का बेच दिहिस ...ओके झोपड़े में रोजै कौनो न कौनो गाहक आवै लाग ..! कमली बहुत मना किहिस, पर उ करमजला..नै मानिस..कमली का रोज़ मारत रहा... खुद तो कौनो कमायी धमायी करत नै रहा, कमली अपने बच्चन का चौका बर्तन कै के पालत रही..! मुला भाभी, आपन आदमी ही ओका बेचे लाग तब का करत बिचारी ...आपन इज़्ज़त के खातिर उ फांसी लगाय लिहिस..!

उसकी बातें सुनकर मैं बिल्कुल अवाक रह गयी..अब मुझे कमली के वो नीले निशान समझ आने लगे थे..वो उसका यूँ अचानक गुमसुम रहना भी ...उफ़्फ़ बेचारी ने कितना संघर्ष किया होगा..गैर मर्दों के हाथों से अपने शरीर को बचाने के लिए ...मार पीट ,अपशब्द, गाली गलौच ,और न जाने क्या क्या..! और कितना दुखी हुई होगी ...कि उसका पति, यानि उसका रक्षक ही उसका भक्षक बन गया और घर मे ही उसको बाजारू बना के रख दिया..! टूट ही गयी होगी वो तो..!

स्त्री जाति, को कितना संघर्ष करना पड़ता है..! शादी से पहले,बचपन से लेकर युवावस्था तक दुनिया की भूखी गन्दी निगाहों से, और फिर शादी के बाद भी जाने किन किन वहशी चंगुलों से बचाना पड़ता है खुद को, बाहर की दुनिया मे हवस का भेड़िये होते ही हैं, फिर स्त्री का तन मन केवल अपने पति में अनुरक्त होता है, जिसके बच्चो की मां बनकर वो दुनिया के हर दर्द भूल जाती है, किन्तु यदि ...पोषक ही शोषक बन जाये तो स्त्री क्या करे? कैसे करे अपनी अस्मिता की रक्षा..? जब पति ही अपनी पत्नी को गैर मर्दों को परोसने लगे तो क्या स्थिति होगी..?

बहुत ही भयानक और चिन्ताजनक स्थिति में होगी कमली .. और जब उसको कुछ न सूझ पड़ा तो उसने मौत को गले लगाना ही बेहतर समझा..! कमली जैसी बहुत सी स्त्रियां है जो इस प्रकार के शोषण का शिकार हो रही हैं...आज कल समाज मे नए नए ट्रेंड चल गए हैं वाइफ स्वेपिंग और थ्रीसम सेक्स, जिन्हें एक्सपेरिमेंट के लिए लोग अपनी निजी जिंदगी में शामिल कर रहे है, ऐसे बहुत से प्रकरण मैने पढ़े और सुने हैं ,और कइयों को तो व्यक्तिगत रूप से जानती भी हूं..जिन पर उनके पति द्वारा इस घिनौने कृत्य के लिए दबाव डाला गया व अत्याचार भी हुए किन्तु यहां किसी का नाम नहीं लूँगी..!

कमली के साथ, रुपयों की लालच में हुआ तो किसी और के साथ आधुनिकता या रोमांच के नाम पर किन्तु, जो भी हुआ वो बहुत ही निन्दनीय और शोचनीय है...! इस कहानी को पढ़कर क्या लगा आपको मुझे अपने विचार अवश्य बताइएगा..! कमली के आत्महत्या कर लेने और पति द्वारा उसके इस प्रकार के उत्पीड़न के विषय मे क्या राय है आपकी...?

काश मैं कमली के लिए कुछ कर पाती...! काश उसने मुझसे इस बारे में बात की होती...! ये सब सोचती हुई मैं अभी लिख ही रही थी कि, टीवी पर .."नी मैं कमली कमली..." वाला गीत सुनाई पड़ा और मुझे मेरी हँसमुख कमली याद आ गयी...और मेरी आँखों मे नमी सी तैर गयी...!

-कविता जयन्त श्रीवास्तव



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