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@dawriter

आखिर ये दरिन्दगी कब तक

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nis1985 by  
nis1985

दिल्ली में आठ महीने की बच्ची का बलात्कार,और कितने बलात्कार होंगे,रोज अखबार पटे रहते है बलात्कार की खबरों से, कभी 5 साल की बच्ची, कभी 16 साल की बच्ची, कभी ८० साल की वृद्धा से बलात्कार, अरे अब तो बेटी पैदा करने में लोग और भी ज्यादा डरेंगे। लोग कहते हैं न दहेज प्रथा ही भ्रूण हत्या को ज्यादा बढ़ावा दे रही, अरे अब तो औऱ भ्रूण हत्याएं होंगी, बेटी पैदा करने के नाम से ही लोगो की रूह कंपेगी। अब तो इतने हद से ज्यादा मानसिक रोगी, मानसिक विकृत लोग, अब ये शब्द सुनकर मुझे हँसी आती है, क्योंकि अपनी हवस पूरी करने के बाद ही ये लोग अपने आप को मानसिक रूप से बीमार ही घोषित करवाना चाहते हैं। कामवासना पूरी करने के बाद इन्हें बचना जो होता है। कानून क्यों कोई सख्त कदम नहीं उठाते कि ये लोग ऐसी हरकत करने से पहले १०० बार सोचे।

मैं पूछती हूं क्या दिखता है आखिर ८ माह की बच्ची में, कुछ लोगो की सोच के हिसाब से लड़कियां छोटे-छोटे कपड़े पहनके उकसाती हैं न, जिससे इस तरह की घटनाएं ज्यादा होती हैं और, वो इस तरह की घटनाओ को अंजाम देते हैं, उनके हिसाब से सारी गलती लड़कियों की है। तो मै ये पूछना चाहती हूँ कि उस आठ माह की बच्ची ने कैसे उकसाया, या उसे देखकर बलात्कार का विचार मन मे कैसे आया, उसकी जांघे देखकर, उसके स्तन देखकर या कुछ और। शर्म करो रे वो आठ महीने की बच्ची है, उसके कोई अंग ढंग से विकसित भी न हुए हैं वो इतनी नासमझ है कि इस दुनिया मे केवल अपने माँ पिता के भरोसे आयी है, उसकी जो भी भावनाएं, एहसास हैं वो शायद अभी उसकी मां तक सीमित होगी, वो मूक बच्ची इस घटिया दुनिया दारी से परे थी अभी। अब सोच के रखो बेटी पैदा की है तो २४ घण्टे चौकन्ने रहो, चैन से जीना क्या होता है वो भूल जाओ। मैं बस अपनी भड़ास निकाल सकती हूं लिखकर क्योंकि मैं भी एक बेटी की मां हूँ, रूह काँपती है मेरी भी ये सब घटनाये पढ़कर....!!

©निशारावल

छत्तीसगढ़

#stoprapenow

Image Souce: catchnews



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