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@dawriter

अनजाना क़त्ल

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suryaa by  
suryaa

भाग 1
पीयूष बेटा उठ जाओ सुबह हो गयी आखिर कब तक सोयेगा तू.........मम्मी ने पीयूष को आवाज लगाते हुए कहा उठ जाऊंगा आज तो सोने दे माँ......आज सन्डे है वैसे भी ऑफिस वाले दिन ठीक से सोने को नहीं मिलता....आज तो सो लूँ ढंग से..............उसने रजाई को मुहँ पर ढकते हुए कहा पहले उठ जा...हाथ मुहँ धोकर नाश्ता कर लो अब बाद में सो लेना.....माँ ने फिर से रजाई खींची पीयूष अनमने ढंग से उठकर बाथरूम की ओर चला गया....और माँ नाश्ता बनाने में लग गयी...!!

पीयूष सूर्यवंशी एक प्राइवेट कंस्ट्रक्शन कंपनी में सिविल इंजीनियर के तौर पर तैनात था जो की गवर्मेंट कॉन्ट्रैक्ट लेती थी पुल डैम वगैरह बनाने का और उसके पापा सेना में मेजर थे जिससे वो हमेशा घर से बाहर ही रहते थे.....कुल मिलाकर उस घर में यही माँ बेटे दोनों लोग ही रहते थे ......अक्सर जब पीयूष कंपनी


टूर के सिलसिले में बाहर रहता था तो माँ को अकेले रहना पड़ता था.......

माँ जब भी अपने अकेलेपन का हवाला देते हुए शादी की बात करती तो पीयूष हमेशा उन्हें टाल देता था.. शाम के समय पीयूष अपने कमरे में बैठा लैपटॉप पर कुछ काम कर रहा था की उसके फ़ोन की घंटी बजी......जादू है नशा है मदहोशियाँ तुझको भुला कर अब जायें कहाँ... फ़ोन पर सामने कम्पनी की एचआर थी....हेल्लो सर आपकी कल ऑफिस में छुट्टी है और कम्पनी आपको परसों देहरादून भेज रही है......नए कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करने के लिए...आप परसों सुबह रेडी रहियेगा कंपनी की टैक्सी आपको स्टेशन छोड़ेगी और दून उतरने पर आपको वहीँ से साईट पर जाने के लिए टैक्सी मिल जायेगी....आपके रहने और खाने का बन्दोबस्त हमने कर दिया है....आल दा बेस्ट...इतना कहकर फ़ोन काट दिया गया.... पहले तो पीयूष को सन्डे की दिन डिस्टर्ब करने की वजह से गुस्सा आया लेकिन उस गुस्से पर एक दिन अधिक छुट्टी और दून जाने की ख़ुशी भारी पड़ी...!!


भाग 2

मंगलवार की सुबह पीयूष तैयार होकर बैठा ही था की कंपनी की टैक्सी उसे लेने आ गयी.....माँ से विदा लेकर वो स्टेशन पहुँच गया...ट्रेन थोड़ी देर लेट थी तो वो सामने से चाय लेने चला गया...लौट के आया तो देखा की उसकी जगह पर कोई बैठा हुआ था....हेल्लो जी ए मेरी जगह है.......जब बैठे हुए शख्स ने उसकी तरफ मुहँ किया तो उसके तोते ही उड़ गये.....हिरन जैसे नयन सांवली सूरत , तीखे नख्श.....नाक में पहनी हुई लुरकी ( बाली ) और होठों पर हल्की सी लाली उसकी खूबसूरती पर चार चाँद लगा रही थीं........जी मुझे लगा खाली है इसलिए बैठ गयी...आपके बैग पर भी ध्यान नहीं दिया....सॉरी...उसने अपने गालों पर बाल हटाते हुए मुस्कुराकर कर कहा....उसकी मुस्कराहट ने पीयूष के दिल के सीधा तीर मार दिया,उसकी शरीर पूरी तरह से ठंडी होकर कंपकपा गयी और वो वहीँ खो कर जड़वत हो गया......अरे आप कहाँ हैं बैठिये..हम जा रहें हैं...उसकी आवाज ने पीयूष की तन्द्रा तोड़ी.......आपकी एक
मुस्कराहट ने मेरे होश उड़ा दिये , हम होश में आने वाले थे की आप फिर मुस्कुरा दिए....पीयूष हल्के से बुदबुदाया.....आप कुछ कह रहे हैं ? जी नहीं...कु...कु...कुछ नहीं.......आप बैठिये वैसे भी हमारी ट्रेन आने वाली है...हम थोड़ी देर खड़े ही रहेंगे....बड़े बड़े प्रेजेंटेशन में अपने लेक्चर से लोगों को चुप कराने वाला पीयूष हकलाते हुए बोला --जी कोई नहीं आप बैठ जाइये हमारी भी ट्रेन आने वाली है ---नहीं नहीं आप बैठे रहिये...वो देखिये हमारी ट्रेन भी आ गयी कहकर पीयूष हॉर्न बजाते हुए आ रही दून एक्सप्रेस की तरफ बढ़ता हुआ चला गया

भाग 3


पीयूष अपने सीट पर जाकर बैठ गया लेकिन उसका दिल अभी भी उसी लड़की में लगा हुआ था.....उसके हुस्न का जादू उसके सर पर चढ़कर बोल रहा था.....बैग रखते वक़्त उसे फिर से हलकी सी ठंडी महसूस हुई तो वो दरवाजे की तरफ मुड़ा कोच अटेंडेंट से एसी कम करवाने के लिए...दरवाजा खोलते ही उसे फिर से झटका लगा...वही स्टेशन वाली लड़की उसके सामने खड़ी थी.... --आप यहाँ ?--जी हमारी सीट भी इस कम्पार्टमेंट में है --ओह्ह आइये.....कहकर उसने अटेंडेंट को आवाज दी...कोई उत्तर ना आने पर वो अटेंडेंट को ढूढने गया....कुछ देर बाद जब वो अटेंडेंट को लेकर लौटा तो देखा लड़की वहां नहीं थी और उसे सर्दी भी कुछ कम लग रही थी.....आप इसे कम कर दीजिये मुझे हलकी सी ठण्ड महसूस हो रही है --ये अपने टेम्परेचर पर सेट है सर फिर भी मैं आप के लिए एक बेडरोल भिजवा देता हूँ...कहकर अटेंडेंट वहां से चला गया

...अटेंडेंट के जाते ही वो लड़की फिर से दरवाजे पर से आती दिखी....आकर वो सामने वाली सीट पर बैठ गयी...कुछ देर बाद बेडरोल उसे मिल गया और वो उसे ओढ़कर चुपचाप अपनी सीट पर बैठ गया....... क्या आपको ज्यादा ठण्ड लग रही है......लड़की की आवाज ने वहां की ख़ामोशी को तोडा --जी नहीं बस लग रहा है थोड़ी तबियत ख़राब है --वैसे आप जा कहाँ रहे हैं?....उसने थोडा पर्सनल होने की कोशिश की --जी मैं देहरादून जा रहा हूँ काम के सिलसिले में....वैसे आप कहाँ जा रहीं हैं?

--मैं भी देहरादून जा रही हूँ......चलिए हमारा सफ़र अब साथ का रहेगा....लड़की ने मुस्कुराते हुए कहा! वैसे आप दून में करती क्या हैं ?.....अबकी बार ख़ामोशी तोड़ने की बारी पीयूष की थी --जी मेरा वहां घर है......मैं यहीं लखनऊ में ही जॉब करती हूँ...छुट्टी लेकर कुछ दिनों के लिए घर जा रही हूँ -- वैसे मेरा नाम पीयूष है.....और मैं एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में सिविल इंजीनियर हूँ और आप ? --मेघा , मेघा सिंह --आप लखनऊ में क्या करती हैं ? --जी सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ विप्रो में बात करते हुए पीयूष कब सो गया उसे कुछ पता ही ना चला.......रात को नींद खुलने पर उसने देखा मेघा अभी भी जग रही है...कुछ देर बाद उसे चाय की तलब लगी और सयोंगवश वहां पर चाय वाला भी आ गया... --जरा दो चाय देना......पीयूष आँखें मीचते हुए बोला --दो चाय ?--हां हां दो चाय.....जल्दी दो --लीजिये कहकर चायवाला हैरानी से देखते हुए पीयूष को दोनों गिलास पकड़ा कर चला गया.....मेघा और पीयूष ने चाय खत्म की फिर कुछ देर बाद बात करने के बाद...वो फिर सो गया..सुबह जब सो कर उठा तो देखा मेघा वहां नहीं थी....और देहरादून भी आ गया था...कहाँ गयी होगी सोचकर वो बाहर निकल ही रहा था की उसे नाम का बोर्ड लेकर घूमते हुए एक आदमी दिखा...पीयूष ने उसे आवाज दी और सामान उठाने को कहा....उसकी आँखें अब भी मेघा को ढूंढने में लगी थी...लेकिन उसका कुछ अता-पता नहीं था...............

भाग 4


शाम को जब साईट का काम खत्म करने के बाद जब पीयूष घूमने के लिए निकला तो पीछे से उसे किसी के पुकारने की आवाज आई...पीयूष जी....जब उसने मुड़कर देखा तो देखा मेघा उसकी ओर बढ़ी चली आ रही थी.....अरे आप यहाँ कैसे ? --दरअसल मैं यहाँ कुछ काम से आई थी और आप यहाँ दिख गये--चलिए चाय पीते हैं --अरे नहीं नही रहने दीजिये......हमें देर हो जायेगी --अरे चलिए एक कप चाय पीने में कितना वक़्त लग जाएगा...कहकर पीयूष चल दियावहां पहुँच कर उसने दो चाय का आर्डर दिया तो चायवाला हैरानी से देखते हुए बोला......दूसरी चाय किसके लिए साहब जी ?.....अरे इनके लिए..कहकर जब पीयूष मुड़ा तो देख मेघा वहां नहीं थी......आसपास देखने पर देखा मेघा किसी अधेड़ के साथ जा रही थी.......लेकिन वो अधेड़ कौन था ? शायद उसके पापा होंगे..पीयूष बुदबुदाकर चाय पीने लग गया दुसरे दिन शाम के समय पीयूष किसी काम से स्थानीय विधायक के पास जा रहा था तो उसे मेघा फिर से दिखी......हेल्लो जी आप यहाँ ? --अरे आप.....कहाँ जा रहे हैं....मेघा ने पीयूष के सवाल का रुख मोड़ दिया ---बस विधायक जी के पास जा रहा हूँ थोड़ी राजनैतिक मदद के लिए --हम्म मैं भी चलूँ......---आप वहां क्या करेंगी ? --मैंने कहा ना मैं भी चलूंगी....मेघा की आवाज में अबकी बार थोडा सा कर्कशपन था.. पीयूष को उसकी आँखों में थोड़ा सा गुस्सा दिखा(वो मेघा से मन ही मन प्यार करने लगा था ) तो उसने साथ चलने को हामी भर दी......वहां पहुँचने पर मेघा थोड़ी देर में आती हूँ कहकर चली गयी और पीयूष बैठक में विधायक जी बातें करने लगा..!! --सर आप कुछ ज्यादा मांग रहे हैं ? --मेरा हिस्सा ही तो मैं मांग रहा हूँ.......आप दो तो काम आगे बढ़ेगा नहीं तो हमारे समर्थक आन्दोलन कर देंगे समझ लीजियेगा........रात को 9 बजे पुल के पास मिलिएगा...पूरे 5 के साथ और हाँ अकेले आना किसी और के साथ नहीं...पीयूष कुछ गुस्से में कुछ छोभ के साथ बाहर निकल रहा की....उसने तो ज्यादा पैसे मांगें हैं क्या तुम्हारी कंपनी दे पाएगी?...मेघाकी आवाज उसके कानों में गूंजी. --तुम्हें कैसे पता ? --मैं सब सुन रही थी.....हंसकर मेघा वहां से चली गयी और पीयूष उसे आँखें फाड़कर देखता रह गया रात को 9 बजे के आस पास पीयूष पुल वाले रास्ते पर जा रहा था की .....मैं भी चलूँ...खनकती आवाज ने पीयूष के कलेजे को धक्क्क से कर दिया....पीछे मुड़कर देखा तो मेघा आ रही थी --अरे आप कहाँ जायेंगी....मैं काम से जा रहा हूँ ? ---विधायक से पैसे के समझौते के लिए ?....मेघा की मुस्कराहट पीयूष के दिमाग को सुन्न कर गयी --नहीं नहीं बस घुमने जा रहा हूँ ---झूठ मत बोलिए,विधायक जी मेरे पापा के मित्र हैं मैं आपकी कुछ मदद कर सकती हूँ...कहकर मेघा ने पीयूष को चलने का इशारा किया समय 9:३० के आसपास --नहीं नहीं इससे कम में काम नहीं चलेगा...काम करवाना हो तो दीजिये नहीं तो बोरा बिस्तर बंधवाकर उत्तराखंड से बाहर फिकवा दूंगा --मैं उत्तराखंड से नहीं सर आप राजनीति से बाहर जायेंगे.....पीयूष टेप रिकॉर्डर दिखाते हुए बोला दोनों के बीच छीनाझपटी होने लगी टेप के लिए की अचानक पीयूष ने मेघा को आवाज दी जो चुपचाप इन दोनों के लड़ाई को देख रही थी.....छीन मेघा उससे टेप...इस आवाज में मेघा शब्द विधायक को जड़वत कर दिया और वो टेप लेकर वहां से भागने की कोशिश करने लगा.....धक्का दो उसे नहीं तो भाग जाएगा...मेघा पीयूष को डांटते हुए बोली!!! पीयूष ने पीछे से विधायक को गिराने के लिए धक्का दिया लेकिन यह क्या......बिना बाउंड्रीवाल के पुल से विधायक का पाँव फिसला और वो सीधा १०० फीट गहरी खाई में जा गिरा....गनीमत यह थी की टेप रिकॉर्डर ऊपर ही रह गया था.....पसीने और भय से लथपथ पीयूष जब वापिस मुड़ा तो देखा मेघा वहां नहीं थी....पीयूष सीधा वहां से टेप रिकॉर्डर लेकर भागा और आकर सीधा अपने होटल में ही साँस ली....पहले तो उसने वहां जल रही अंगीठी में टेप जला दिया ताकि उससे कोई सबूत ना रहा जाए फिर बियर मंगा के पीने के बाद नशे में ही सो गया सुबह ११ बजे उसकी नींद खुली तो सामने पड़े अख़बार में छपे शब्द और चित्र ने उसके होश उड़ा दिया.....शोधार्थी छात्रा मेघा सिंह के हत्या आरोप में नामज़द और स्थानीय विधायक राणा की पुल से गिरकर रहस्यमयी परिस्तिथियों में मौत...पीयूष एक ही साँस में सारी खबर पढ़ गया उसे ऐसा लग रहा था की उसे दिल का दौरा पड जाएगा क्योंकि अख़बार में छपा चित्र और किसी का नही उसी मेघा का था जो बीते दिनों से उसे मिल रही थी......पीयूष वहां से भागा और सिर्फ दौड़ता रहा जब तक थक नहीं गया फिर उसके कानों में एक आवाज पड़ी जो मेघा की थी.....शुक्रिया दोस्त.....जो शायद वो आखिरी बार सुन रहा था....और जिसने उसके हाथों एक कत्ल करवा दिया था अनजाने में ...पीयूष वहां से तुरंत वापिस लौट चला भय दर्द और खून के पछतावे के साथ.....वापिस आकर अपना सामान पैक किया और फिर कंपनी को मैसेज भेजते हुए वापिस बुलाने की अर्जी दी....कुछ ही देर में उसे कंपनी का मैसेजमिल गया की उसकी देहरादून की साईट रद की जाती है वो आकर वापिस आ सकता है ......उसी दिन शाम को – पीयूष ट्रेन में बैठते हुए अपने मेघा के साथ सफ़र को सोच रहा है...क्या वो सच में प्रेतात्मा थी ? जो उसके साथ होने से ठण्ड का बढना ...पहले ट्रेन में फिर फिर देहरादून में चायवाले का हैरानी से उसे देखना दो चाय मांगने पर,विधायक निवास पर उसका अन्दर ना जाना , पता पूछने पर बात बदलना,पुल पर विधायक को धक्का मारने के लिए कहना........आदि बातें उसे कचोट रही थीं......उसने फिर से पेपर उठाया और पढ़ना शुरू किया जिसमें मेघा और विधायक के बारे में लिखा था मेघा एक शोधार्थी छात्रा थी जो जड़ी बूटियों पर शोध करने देहरादून आई थी पहले विधायक ने उसे प्रेम जाल में फंसाया फिर गर्भवती होने पर उसे मार दिया........निचली कोर्ट ने उसे सजा सुनाई थी लेकिन बाहुबली होने के कारण वो हाईकोर्ट से बरी हो गया था..... ---तो मेघा ने खुद अपना बदला ले लिया लेकिन मुझे माधयम क्यूँ बनाया यही सोचते सोचते पीयूष को नींद आ गयी....सुबह आँख खुली तो देखा गाडी बाराबंकी स्टेशन क्रॉस कर रही थी और पीयूष को अब पछतावा नहीं हो रहा था उस “अनजाने कत्ल” की वजह से......



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