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@dawriter

'दोस्ती से ज़्यादा प्यार से कम'-एक प्रेम कहानी

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ritu sinha by  
ritu sinha

"अगर तुम्हें कुछ हो जाएगा तो मैं मर जाऊँगा, तुम तो जानती हो तुमसे ज़्यादा मुझे कोई प्यार नहीं करता"- रवि की ये बातें रितु के दिल दिमाग मे छाई हुई थी, असहनीय दर्द था, आंखों से आंसू निकल रहे थे, "कहाँ हो रवि तुम, मेरे दिल की आवाज़ तुम तक क्यों नहीं पहुँच रही हैं। आज रितु मर रही थी लेकिन रवि को इसकी खबर भी नहीं थी।

दोनो की प्यार की शुरुवात एक प्यारी सी दोस्ती से हुई थी। दोनो को देख के लगता था कि दोनों एक दूसरे के लिये बने हैं। एक जैसी सोच, एक जैसा स्वभाव, दोनो ही बहुत हसंमुख, हाजिरजवाब, और दोनों का खिला-खिला चेहरा। मज़ाक-मज़ाक में तो कई बार उन दोनो ने अपने दिल की बात कह दी थी, लेकिन प्यार का इज़हार कभी नहीं कर पाए। मौका भी बहुत बार मिला, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया।

एक मौका रितू को मिला जब उसकी शादी की बात हो रही थी, औऱ उसने अपनी माँ से रवि से शादी करने की इच्छा जताई, और उसकी माँ झट से मान गयी। रितु के तो खुशी का ठिकाना नहीं थी। अगली सुबह बिना वक़्त गवाये वे रवि के पास गयी लेकिन उस दिन भगवान को कुछ और मंज़ूर था, रवि का किसी प्रोजेक्ट की लेकर मूड ऑफ था और उसने रितू से बात नहीं की, उसे भला-बुरा कह दिया। रितु रवि के इस बरताव से हैरान थी क्योंकि रवि ने उससे कभी इस लहज़े में बात नहीं की थी। उसने सोचा शायद उसका ये सोचना गलतफहमी है कि रवि भी उससे प्यार करता है। और वो चुपचाप घर लौट आयी।

लेकिन उसने कई बार कोशिश की रवि को अपने दिल की बात बताने की,मगर कामयाबी नहीं मिली।अंत मे रितु वहाँ शादी कर ली जहाँ उसके पेरेंट्स ने कहा,हालांकि वो भी उसकी पसंद से ही हुई।

अपनी शादी की ख़बर देने वो रवि के पास गयी, बहुत इंतज़ार करने के बाद रवि अपने ऑफिस से बाहर निकला। रितु ने उसे अपनी शादी का कार्ड दिया, और रवि ने बड़े मुस्कराकर कार्ड लिया और उसे शादी की बधाई दी। रितु ने रवि को देख के सोचा उसकी शादी की खबर को रवि ने बड़े आराम से स्वीकार लिया, इसका मतलब उसके दिल मे रितु के लिये कुछ नहीं था, उसने सारी बात जो उससे कहीं थी सब मज़ाक ही थीं, उसका तो स्वभाव ही मज़ाकिया था।

रितु वापस घर आ गयी, लेकिन कही न कही उसके मन मे था कि काश रवि एक बार अपने प्यार का इज़हार के ले। शादी तक वो रवि का इंतज़ार करती रहती थी, लेकिन रवि ने कुछ कहा ही नहीं।

रितु की शादी हो गई, ज़िन्दगी भी ठीक-ठाक गुज़र रही थी, जैसे शादी के बाद होती है। लेकिन रितु और रवि के दोस्ती में कोई फर्क नहीं आया था। दोनो जब भी बात करते वैसे ही मज़ाक और मस्ती में, जैसे पहले किया करते थे। रितु के शादी के 5 साल बाद भी रवि ने शादी नहीं की। रितु हमेशा उसे छेड़ के पूछती की शादी कब करनी है, वो एक ही जवाब देता की तुम ढूंढ दो लड़की लेकिन अपनी जैसी ढूंढना बोल कर हँस देता और रितु भी इतरा कर बोल देती मेरी जैसी और नहीं है, तुमने मिस कर दिया और फिर दोनों हसने लगते।

इसी तरह बातों-बातों में रवि ने रितु से पूछा कि मैंने इतने इशारे किये तुम्हे एक बार भी समझ नहीं आया था, रितु ने कहा तुमने तो सिर्फ इशारे ही किये मै तो तुम्हे दिल की बात बोलने आयी थी लेकिन उस दिन तुम्हारा मूड ऑफ था, औऱ तुमने मुझसे बात ही नहीं। रवि ने हड़बड़ाकर बोला" बोलने आयी थी क्या बोलने आयी थी' रितु ने कहा शादी का प्रस्ताव लेकर आयी थी अपने लिये। रवि रुआँसा होकर बोला "फिर क्यों नहीं बोला रितु तुमने मैं तो खुशी से पागल ही हो जाता, तुम्हें पता नहीं रितु मैं तुमसे कितना प्यार करता था, और अभी भी करता हूँ, इसलिये तो मैंने शादी नहीं की।"ये सुनकर रितु जैसे पत्थर बन गयी और रोने लगी,उसने कहा "रवि फिर तुमने क्यों नहीं कहा मैं तो इंतज़ार करती रही अपनी शादी तक"। कुछ देर चुप रहने के बाद रवि अपने को संभालते हुए कहा "जो हुआ, सो हुआ शायद भगवान की यही मर्ज़ी थी,लेकिन मैं अभी भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ"। रितु ने भी आंसू पोछते हुए कहा "रवि तुम वायदा करो तुम्हारा प्यार मेरे लिये काम नहीं होगा, हमारी दोस्ती ये प्यार ऐसे ही बना रहेगा चाहे जो भी परिस्थिति हो।" रवि ने कहा "पक्का वायदा, लेकिन अगर किसी कारण मैं तुमसे बात न कर पाऊँ तो तुम मुझे गलत नहीं समझना।"

दोनों कभी रोज़ बात करते, कभी कभी बहुत दिन हो जाते, मगर जब भी बात करते हँसी-खुशी बात करते। और बातों-बातों में अपनी मन की भी बात बोल देते, फिर हँस कर एक दूसरे को सॉरी भी बोल देते।

उनकी बात होनी कम हो गयी क्योंकि रवि अपने नए बिज़नेस के सेटअप करने में बिजी रहने लगा था। लेकिन जब भी रितु उसे दिल से याद करती, रवि का फ़ोन आ ही जाता था, रितु उससे बोलती आज मैं तुम्हे याद कर रही थी, तो रवि हँस के बोलता मुझे मैसेज मिल गया था, इसलिए तो फ़ोन किया मैंने।

लेकिन कुछ दिनों के बाद ये सिलसिला खत्म हो गया। रवि कुछ ज़्यादा ही अपने काम में व्यस्त रहने की वजह से वे रितु को फ़ोन नहीं कर पाता था। रितु रोज़ उसके फोन का इंतज़ार करती, बहुत सारी बातें उसे रवि को बतानी थी।

एक दिन अचानक रितु के सर में बहुत तेज़ दर्द हुआ, डॉक्टर ने कहा कि रितु के सर के किसी नस में प्रॉब्लम है, इसलिये उसे ज़्यादा से ज़्यादा आराम करना है, कम बोलना है और ज़्यादा नहीं सोचना है, और किसी भी तरह का टेंशन नहीं लेना है। यूँ तो उसकी जिंदगी अच्छी थी, किसी भी चीज़ की कमी नहीं थी, लेकिन रितु अपने उस दोस्त की कमी को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी, वो दर्द में थी, और इंतज़ार कर रही थी कि कब उसके दिल की बात रवि तक जाए।

लेकिन रवि को कुछ खबर ही नहीं थीं कि रितु किस हालत में है। पता नहीं रितु कौन सा रिश्ता निभा रही थी, दोस्ती का या प्यार का, या फिर इनदोनो के बीच का जिसका कोई नाम ही नहीं था।

 

"दोस्ती से ज़्यादा प्यार से कम,

इस रिश्ते का नहीं कोई नाम।

खूबसूरत है इसकी हर तस्वीर,

प्यार, तकरार, कट्टी फिर दोस्ती।

ना समझेगा कोई, ना हम बताएंगे,

चुपके इस रिश्ते को निभाएंगे।

 

रिश्ते कोई भी बनाओ, लेकिन उसको निभायो। रिश्ते में वायदा सोच समझ कर करना क्यों कि कोई दिल्लगी में वायदा करता है तो कोई दिल पे उस वायदे को ले लेता है।



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