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@dawriter

हथियार

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“मैं व्यस्त हुँ बाद में बात करती हूँ। ”कह कर शिखा ने फोन काट दिया। ऑफिस की जरूरी फाइल में घुसी पड़ी थी। आज जरूरी था इस फाइल को निपटाना। नये बॉस के आने से काम का प्रेशर जरूरत से ज्यादा बड़ गया था।

लेकिन शेखर को उसका यह बर्ताव नागवार गुजरा और वह उसके ऑफिस पहूंच गया।

“तुम मुझे इग्नोर कर रही हो। ”शेखर ने चिल्लाते हुए कहा।

“क्या मतलब है तुम्हारा? इग्नोर क्यों करूंगी!बिजी हुँ बता तो रही हूं। ”

“खूब समझता हूँ। देखता हूँ रोज ही कैसे ऑनलाइन रहती हो और उसकी पोस्ट पर कमेंट्स करती रहतीं हो। ”

“किसकी पोस्ट पर? और मेरे कमेंट्स करने से तुम कैसे इग्नोर हो गए? मुझे जिसकी पोस्ट पंसद आयेगी मैं कमेंट्स करूंगी! लेकिन शेखर अभी मैं बिजी हूँ यह फाइल निपटानी है हम बाद में बात करते हैं। "शांत होकर शिखा ने जवाब दिया।

“हाँ क्यों नहीं क्योंकि तुम्हें पंसद ही ऐसे लोग हैं जो फ्लर्ट करें। मेरे लिए समय नहीं और उसके लिए समय है तुम्हारे पास ?फाइल का बहाना बनाकर मुझसे दूर जाने की कोशिश कर रही हो। इतने दिनों से तुम्हें नोटिस कर रहा हूँ। बेवकूफ नहीं सब समझता हूँ। "

“क्या बकवास कर रहे हो शेखर! इतना समय नहीं मेरे पास कि किसी के फ्लर्ट को देखूँ। जिंदगी में इसके अलावा भी बहुत काम है। ऑनलाइन रहना जरूरी है मेरे काम के लिए तुम यह बात जानते हो फिर भी ऐसी बकवास! असल में तुम पुरूषों की सबसे बड़ी समस्या तो यही है कि खुद चाहे कितनी देर हँस ले लेकिन गलती से भी औरत के दाँत दिख जाये तो उस पर शक करने लगते हो। ”

“शक ….। अंधा नहीं हुँ दिख रहा है कैसे खुश होती हो ऐसे लोगों की तारीफों से….नीच औरत। ”तेज आवाज में शेखर चिल्लाया। पूरे ऑफिस के सामने यह हरकत शिखा को अपमानित कर गई। वह दोगुने वेग से चिल्लाई..

“एक शब्द भी और निकाला ना मुँह नोंच लूंगी। यह जो तुम हथियार निकालते हो ना इज्ज़त पर हमला करने का उसे अंदर रख लो। यह तुम्हारे शब्द बाण तुम्हारे असली चेहरे को दिखा रहे हैं दोस्ती की सीमा पार कर दी तुमनें दोबारा कोशिश न करना बात करनें की। ”

“हाँ और कर भी क्या सकती हो असल में तुम जैसी औरतें होती ही ऐसी है। तुम्हारी इज्ज़त है भी कोई! जो हमला करूंगा? आज इसके साथ कल उसके साथ। दोस्ती के नाम पर बेवकूफ बनाती हो। "

“हाँ हम जैसी औरतें ऐसी ही होती हैं जो तुम जैसे लोगों के चेहरों को बाखूबी पहचान लेती हैं तभी बेवकूफ नहीं बनती और यह इज्ज़त की ठेकेदारी का रौब किसी और को दिखाना। हम जैसी औरतों को इनकी जरूरत नहीं। ”

दिव्या राकेश शर्मा

देहरादून 



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