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@dawriter

वो दिसम्बर की ठिठुरती शाम

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nis1985 by  
nis1985

वो दिसम्बर की ठिठुरती शाम
तेरी यादें सताये सरेआम,
शब्द जैस सिल से गये
एहसासो की तपिश है बरकरार
वो दिसम्बर की ठिठुरती शाम....!

सुबह की भोर कोहरे से सराबोर
इस इश्क पर अब मेरा न जोर
ओस की बूंदों की निर्मल शीतलता
मेरी धड़कनो का बयां करती है शोर
वो दिसम्बर की ठिठुरती शाम....!

कड़कड़ाती ठंड,वो धूप की गर्मी
तेरा आलिंगन और सांसो की नरमी
चैन सुकून सब गुम हो गया है
तेरे लिए तड़पु मैं ,तू बेरहमी
वो दिसम्बर की ठिठुरती शाम....!

देख एक बार मेरी आँखों में प्यार
तेरे लिए किए मैंने सोलह श्रृंगार
तेरी इसी एक नजर को मैं तरसु
मुझपे छाया है सिर्फ तेरा खुमार
वो दिसम्बर की ठिठुरती शाम....!!©



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