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@dawriter

लगा रंग जो तेरा..हुई मैं कमाल की..

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"एक बात सुन लो प्रेम..मुझे होली खेलना बिलकुल पसंद नहीं है..कोई मुझे रंग लगाये मुझे अच्छा नहीं लगता...ये गुलाल से लाल-पीले होना..पानी से भीगना..उफ्फ्फ..सारा चेहरा और बाल खराब हो जाते हैं.." स्नेहा ने अपने मंगेतर प्रेम से साफ़ साफ़ कह दिया था..!

स्नेहा और प्रेम की सगाई के ठीक एक महीने बाद ही होली का त्यौहार आ गया था..! दोनों रोज़ फोन पर घंटो प्यार की सुनेहरी दुनिया में खोये रहते..कुछ दिन पहले ही वैलेंटाइन डे बीता था..प्रेम ने स्नेहा के जीवन में स्नेह के हजारों सितारे झिलमिला दिए थे..अनगिनत फूलों की खुशबू से उसके ख्वाबों को महका दिया था..!

शादी से पहले का समय कुछ ऐसा ही जादू भरा होता है..ये वो दुनिया होती है जहाँ प्यार का सागर प्रतिदिन नये नये सपनों की लहरें उछालता रहता है..जहाँ अपना मंगेतर सारे जहान का सबसे खूबसूरत..प्यारा और भगवान द्वारा फुर्सत में बनाया गया इंसान होता है..! हर वक्त उससे मिलने की उत्सुकता..उसके बोल सुनने की चाहत..बस उसका ही ख्याल..! हर कसम हर वादा सब कुछ सच्चा सा होता है और दोनों प्रेमी इन कसमें-वादों को बखूबी निभाने का पूरा प्रयास भी करते हैं..!

स्नेहा अपनी ख़ूबसूरती का पूरा ध्यान रखती थी..! वैसे वो हर त्यौहार बहुत उत्साह से मनाती पर होली उसको जरा भी न भाती थी..! होली वाले दिन वो खुद को एक कमरे में बंद कर लेती थी..किसी को वो गुलाल तक भी न लगाने देती थी..! उसको लगता था की होली के रंगों से उसकी त्वचा और उसके बाल रूखे हो जायेंगे..उसके नाखून खराब हो जायेंगे..उसके पैरों और हथेलियों में दरारें पड़ जाएँगी..!

बात भी सही है आजकल बाजारों में मिलने वाले रंगों और गुलाल में इतनी मिलावट जो होती है..!

"ठीक है स्नेहा..जैसा तुम चाहो..मैं तुमको हाथ भी न लगाऊंगा..तुमको पानी से भी न भिगोऊंगा..वादा है तुमसे 'तुम्हारे प्रेम का'..पर जब तुमसे मिलने घर आऊंगा तो तुम खुद को कमरे में बंद न करना और थोड़ी देर ही सही मुझसे जरुर मिलना...प्लीज़.." प्रेम ने स्नेहा से अनुरोध किया..!

आज पास के पार्क में गूंजते गाने के बोल "होलिया में उड़े रे गुलाल..कहियो रे मंगेतर से" स्नेहा के जिस्म में रक्त की तरह प्रवाहित हो रहे थे..इस धुन पर आज तो उसके पैर ही नही उसकी रूह भी थिरक रही थी..!

लाख रोकने पर भी आँखें गोल गोल घूम कर दरवाजे पर जा पहुँचती..! दरवाजे की घंटी बजते ही स्नेहा अपने कमरे की ओर भाग गयी..!

प्रेम अपने छोटे भाई के साथ होली की बधाई देने आ पहुंचे थे..! "स्नेहा..प्रेम आये हैं ..फटाफट चाय नाश्ता ले आओ" माँ ने स्नेहा को अवाज देते हुए कहा..!

स्नेहा शरमाई सी घबरायी सी नाश्ते की थाल सजा कर प्रेम के सामने ले आई पर उसने पाया की प्रेम तो पैरों से लेकर सर तक पूरी तरह रंग से रंगे हुए हैं..! उसका डर बढ़ने लगा..कहीं प्रेम उसको भी गुलाल से न रंग दे..!

चाय नाश्ता खत्म हुआ..प्रेम ने माँ-पापा और स्नेहा के भाई को गुलाल लगाया..! "प्रेम बेटा..हमारी स्नेहा को गुलाल कतई पसंद नहीं..वो किसी को भी रंग नही लगाने देती है..उसको तो रहने ही दो" ..माँ ने मिठास भरी जुबान तले प्रेम को एक हिदायत दे डाली..!

"अरे स्नेहा..वाशरूम कहाँ है.." प्रेम ने स्नेहा से अकेले मिलने का बहाना बनाया और दोनों कमरे से बाहर आ गये..!

"देखो प्रेम आपने वादा किया था..की आप मुझे हाथ भी न लगाओगे"..प्रेम को पास आते देख..स्नेहा अपने कदम पीछे की ओर ले जाते हुए बोल पड़ी ..!

"ये लो..मैंने अपने दोनों हाथ अपनी पीठ के पीछे कर लिए हैं.." कहते हुए प्रेम ने स्नेहा की ओर अपनी रफ्तार इतनी तेज़ कर दी की स्नेहा संभल न पायी और अपना संतुलन खोते हुए प्रेम से जा टकरायी..!

हल्की नारंगी सूट में अब तक जो बेरंग से प्रिंटेड फूल थे उनपर प्रेम के गुलाल का रंग भर गया था..प्रेम के बालों से गुलाल झड़ कर स्नेहा के गालों पर फ़ैल गया था..खुद को सम्भालते हुए जब स्नेहा ने प्रेम के कांधों का सहारा लिया था तो उसके हाथ हरे, नीले ओर पीले रंग से रंग गये थे..!

स्नेहा की आवाज़ सुन माँ भी आ गयी थी..! "माँ..देखो स्नेहा फिसलते फिसलते बच गयी"..अपने मकसद में कामयाब प्रेम ने स्नेहा की ओर शरारत भरी मुस्कान डालते हुए.. अनजान सा बन इस स्थिति को संभाला..

प्रेम के जाते ही स्नेहा ने जब खुद को आइने में देखा तो वो अनेक रंगों से सरोबार थी..जाने क्यूँ आज ये रंग उसको हद से ज्यादा भा रहे थे..प्रेम ने आज जिस तरह उस पर अपने प्रेम का रंग चढ़ाया था वो आत्मीय दृश्य उसकी आँखों के सामने बार बार घूम रहा था..!

शाम ढल चुकी थी पर स्नेहा अभी भी उन रंगों में रंगी हुई थी माँ ने कितनी ही बार उसको नहाने को कहा..पर वो टाल-मटोल कर जाती....अपने अंदर का ये बदलाव उसको कमाल का लग रहा था.!

आखिर प्रियतम के प्रेम का रंग जो लगा था उस पर..और उसने सोच लिया था की प्रेम के रंग से रंगा ये नारंगी सूट हमेशा अपने पास धरोहर की तरह सम्भाल कर रखेगी..!

दोस्तों..जरुर बताईगा प्रेम और स्नेहा के स्नेह-प्रेम रंग की होली आपको कैसी लगी.!

धन्यवाद ..!

Image Source: lovewallpaper



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