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@dawriter

राम मिलाये जोड़ी

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रमेश कभी स्कूल नहीं गया। गाँव में स्कूल था ही नहीं। जितना पढ़ना लिखना सीखा सब सिनेमा के पोस्टर से। रखवाला, सौदागर, मरते दमतक सबके डायलॉग रटे हुए थे। एक अंग्रेजी सिनेमा भी देख रखा था 'हू एम आई' हीरो भले चाइनीज था लेकिन सिनेमा खूब चला था। हीरो का नाम भी गज्जब था जैकी चेन। चाइनीज लोग नाम का भी डुप्लीकेट बना लेता है मतलब कितना सुंदर नाम है जयकिशन, उसका नकल कर लिया जैकी चेन। आजतक सब सीन याद है।

गैरेज में काम करते करते जब उस्ताद खर्च हो गया तो गैरेज का हिसाब देखते देखते गणित भी सीख गये। हाँ पैसों के अलावा और किसी चीज का हिसाब नहीं आता था।
ठीक ठाक चलते गैरेज का मालिक हो गया तो उम्र के अनुसार बगल के कस्बे से ब्याह का रिश्ता आया। आज लड़की देखने निकले तो माई ने टोक दिया " देख बेटा अकौना वाली बता रही थी कि जादे पैसा उसा खर्च करनेवाला नहीं है। तो लड़की खूब्बे बढ़िया हो तभी हाँ कहना।"

रमेश ने बाबूजी की तरफ देखा तो बाबूजी ने गमछा बायें कंधे से उठाकर दायें कंधे पर रख लिया। मतलब अब ये देखना उनकी जिम्मेदारी है ।

कन्या पक्ष के यहाँ चार समोसा चाँपने के बाद जैसे ही गुड डे बिस्कुट पर हाथ डाले। लड़की चाय का ट्रे लिए अवतरित हुई। देखके दोनों बाप बेटों की आँखें फटी रह गई। बाबूजी रमेश के कान में फुसफुसाये एकदम जया बहादुरी लगती है रमेश झिड़क दिया हट उ तो ठिगनी सी थी इ तो हमको जयाप्रदा लगती है।

लड़की के बाप का रोंया रोंया कान बन गया लेकिन बात उसकी समझ में न आई तो उसने बात भटकाने की कोशिश की "मैट्रिक तक पढ़ी है बिटिया अंग्रेजी भी बोल लेती है उ तो ननिहाल में मरनी हो गया था इसलिए मैट्रिक का परीक्षा नहीं दे पाई। पूछिए जो पूछना उछना हो।"

रमेश के बाबूजी थोड़ा चौड़े होकर बैठ गये " हमरा बबुआ तो मैट्रिक पास किए हुए है। "
रमेश बाबूजी को शंका से देखने लगे इ कौन बबुआ के बारे में बात कर रहे हैं। बाबूजी उसको आँख से चुप रहने का इशारा किये।

ये इशारेबाजी लड़की के बाप से छुपी न रह सकी उसने भी दुनिया देखी थी। उसे मौका मिला और वो चढ़ बैठा "हाँ तो कुच्छो पूछिए न अंग्रेजी में? "
बाबूजी ने आँखों ही आँखों में अपनी पगड़ी रमेश के हाथों में सौंप मुँह फेर लिया। पितृऋण से दबे रमेश धीरे से " व्हाट इज योर , व्हाट इज योर ",कह के केंकियाए। और फिर जुआ पटकते हुए अपने जीवन का समस्त अंग्रेजी ज्ञान दाँव पर लगा दिया "हू एम आई "
लड़की के जीभ पर तो सरसत्ती बैठी थी एकदम से शुरू हो गई " माई नेम इज सरिता कुमारी , माई फादर नेम इज त्रिलोकी सिंह , आई हैव टू ब्रदर एण्ड वन सिस्टर , माई ब्रदर्स नेम इज कमलेश एण्ड टिल्लू , माई सिस्टर इज बियाहल। "
इस फ्लोलेस अंग्रेजी ज्ञान में रमेश बाप बेटे दोनों बह गये।
बमुश्किल बैंक से लोन लेकर एक शब्द अंग्रेजी रमेश भी ठोक दिये "भेरी गुड।"

कन्या आज के युग की ही थी उसने भी मुस्कुराते हुए "भेरी थैंकू", उछाल दिया। जिसे उसके बाप ने बीच में लपकते हुए शास्त्रार्थ के विराम की घोषणा कर दी ।
अंग्रेजी ज्ञान की नदी में बहते बाप बेटे को मानों लाइफ जैकेट मिल गई ।
लड़की का बाप पूरा खिलाड़ी था उसने बेटी को भीतर जाने का इशारा किया और इनसे मुखातिब होते हुए बोला " देख ही लिए लड़की आपके बेटे से एक्कीस ही है उन्नीस नहीं है। तब बताइए लेन देन की बात हो जाए । "

खिसियाये से रमेश ने अपनी महानता दिखाई " अरे लेन देन की क्या बात करते हैं आप। हमको क्या दहेज के लोभी समझ रखे हैं। बस इतना खर्च कर दीजिए कि दोनों परिवारों की इज्जत बनी रहे । "

रमेश के बाबूजी ने संशोधन विधेयक पेश किया " अब हम लड़केवाले होकर अपने घर से तो खर्च करेंगे नहीं। "

इस कमरतोड़ मँहगाई में जहाँ गरीबी ने मारा था वहीं छू लिया रमेश ने। यों तो आम भारतीय की तरह बेटी के दहेज के लिए जन्म से जोड़ना शुरू कर दिया था लेकिन बेहिसाब मँहगाई ने बजट बिगाड़ दिया था। इतनी रियायत ने ही लड़की के बाप को कर्जदार बनाने से रोक लिया।

उसने मन में गाँठ लिया है शादी समारोह में जितना सोच रखा है उसके अलावा दामाद के लिए दो तोले की चेन जरूर बनवाएगा भले ही दस बीस हजार का कर्जा क्यों न हो जाए।
विदा करते हुए लड़की के पिता ने हाथ जोड़े "बहुत बहुत धन्यवाद आपने हमारी लड़की को मंजूर करके हमारा मान बढ़ाया है। "

रमेश के बाबूजी मूंछ उमेठने के लिए उठा हाथ प्रोगाम कैंसल कर उनके अभिवादन में जोड़ दिये "अरे हम कौन होते हैं। इ सब तो उपरवाले का किया है , सबकी जोड़ी तो पहले से तय है । "

Kumar Gourav



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