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@dawriter

रकीब

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रमेश को आज लड़की ने डिच किया तो वो गम भुलाने बार में जा बैठा अभी आधी बोतल भी निपटा नहीं पाया था कि एक मनमोहक मुस्कान के साथ एक हमउम्र नौजवान सामने आकर खड़ा हो गया। 

"क्या मैं यहाँ बैठ सकता हूं ? "
उसने प्रश्नवाचक नजरों से उसकी तरफ देखा तबतक वो कुर्सी खींचकर बैठ चुका था। खुशी उसके चेहरे पर दिखाई दे रही थी। उसनेे बोलना शुरू किया " दरअसल सालों से मैं जिसके पीछे पड़ा था आज उस लड़की ने हां कर दी है आज मैं बहुत खुश हूं , बस वही सेलीब्रेट करने आया हूं। आपको कोई परेशानी तो नहीं ?"
रमेश हूं करके रह गया। तभी लड़के का मोबाइल बजा और फिर रिंगटोन के साथ जो तस्वीर स्क्रीन पर उभरी उसे देख रमेश चौंक गया।
बातचीत खत्म कर लड़का फिर से उससे मुखातिब हुआ " वही थी , मेरी तो लाइफ बन गई यार। "

रमेश को चार साल पहले का खुद का चेहरा याद आ गया वो मुस्कुराया " तब तो सेलिब्रेशन बनता है ,आज मेरा बिल भी तुम्हारी तरफ से। "

"हां हां क्यों नहीं। "

फिर कुछ घंटों बाद दोनों एकसाथ झूलते हुए निकले और एक तेजरफ्तार ट्रक से टकराते टकराते बचे। घबराकर लड़के ने कहा " नहीं ऐसे जाने में खतरा है मोबाइल दो मैं घर से गाड़ी मंगवाता हूं। "
रमेश ने स्क्रीन लॉक खोलकर मोबाइल उसके हवाले किया तो वो चौंका " ये तस्वीर तो उसकी है तुम्हारे पास कैसे। "

रमेश उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोला " नया नया इश्क हुआ है अभी , हर जगह दिखेगी वही तुमको। "

" अरे वाह तुम तो बड़े अनुभवी हो , ये कब तक होगा वैसे। "
" बस दो चार साल और फिर एकदिन सामने बैठकर तुम्हें अपना मानने से इन्कार कर देगी और तुम शायद इतने खुशनसीब भी न होगे की तुम्हारा रकीब मय का प्याला लिए तुम्हारा गम मिटाने को आ जाए। "



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