75
Share




@dawriter

ये जिंदगी न मिलेगी दोबारा

3 114       
nis1985 by  
nis1985

निशा की कलम से.....

ये जिंदगी न मिलेगी दोबारा

जिंदगी मिली है,हँस के बिताएं, समस्या किसको नहीं है,पर उस समस्या का हल क्या दुखी और उदास होने से मिल जाता है, नहीं न पर हाँ कई लोग अपने इमोशन्स को नहीं रोक पाते, रिद्धिमा भी उनमें से ही थी पर यकीन मानिए, कोशिश की तो ५०%विजय प्राप्त कर ली।

कोई भी प्रॉब्लम हो तो रिद्धिमा तुरंत हताश नहीं होती थी, बल्कि उस समस्या का हल ढूंढने में दिमाग खर्च करती थी, हाँ दिल के एक कोने में तब तक उस दर्द और दुख को दफन कर देती थी रिद्धिमा, ह्म्म्म जानती है बहुत हिम्मत चाहिए इसके लिए भी, पर धीरे से हो जाता है,और उसने ये कर भी लिया।

हँसने में सही में आनंद आता है, तकलीफ कभी छुपा के दूसरों के लिए हँस के तो देखिए, सच कहूं उनके चेहरे में मुस्कान देख के आप अपने सारे दर्द कुछ समय के लिए भूल जाएंगे, अपने बच्चों के साथ बच्चे बन जाइए, उनके साथ खूब मस्ती कीजिये, देखिये कुछ टाइम के लिए सारे दुख छूमंतर।

बस रिद्धिमा कमरे की खिड़की के पास खड़ी बाहर कुछ बच्चों को निहारती हुई ये सब सोच रही थी, पर रिद्धिमा ये भी अच्छे से जानती है कि समस्या या दुख किसी का बहुत बड़ा होता है तो किसी का छोटा, अखबार में आये दिन इतनी वारदाते पढ़ने को मिल रही कि दिल दहल जा रहा है, उनके सामने तो हमारा दुख न के बराबर है, पर क्या रोने मात्र से या दुख प्रकट करने से कोई हल है, क्या वो सब वापिस आ सकते हैं नहीं न, जिनके बस में है वही कुछ कर सकते हैं, या आपके बस में है तो आप भी कीजिये।

रिद्धिमा को लिखने का बहुत शौक था, पर वो खुद कभी-कभी अपने लेखन कार्य से हट कर बच्चों और परिवार के साथ मस्ती करना पसंद करती है, अपना माइंड फ्रेश करने के लिए ,क्योंकि हर समय आप एक जैसा मूड नहीं रख सकते, नहीं तो जिंदगी नीरस बन जाएगी ,पर कुछ लोग तो पता नहीं हर समय एक ही मूड में रहना अपनी शान समझते हैं, कि अरे नहीं मेरी छवि तो गंभीर आदमी की है, हँसी मजाक करूंगा या करूँगी तो लोग क्या समझेंगे, धन्य है रे बाबा ऐसे लोग, रिद्धिमा खुद लेखन में जब रहती है तो इतनी गंभीर मुद्रा में होती है की भयंकर से भयंकर जोक भी उसे हँसा नहीं पाता उस टाइम पूरा लेखन में ही डूब जाना चाहती है रिद्धिमा।

पर बाकी समय हँसना और घर वालों को हँसाना, बच्चों के साथ मस्ती करना रिद्धिमा को यही सब भाता था, वो किसी भी प्रॉब्लम या दुख को अपने चेहरे पे हावी नहीं होने देती थी, ख़ासकर अपने बच्चों के सामने जो कि बहुत छोटे थे, बच्चों के सामने तो वो हर समय एक मुस्कुराती हुई माँ ही दिखती थी, रिद्धिमा जानती थी कि बच्चे अभी बहुत छोटे हैं, बड़े होंगे तो सारी दुनियादारी सीख जाएंगे पर अभी उनके सामने सकारात्मक छवि ही मुझे पेश करनी है, कम से कम उनके समझदार होते ही वो अपनी मां के सारे अच्छे गुणों को ग्रहण कर सकें।

रिद्धिमा के बच्चे हमेशा अपनी माँ को देखते थे कि कितना भी दुख या समस्या क्यों न आये उनकी माँ हमेशा हँसते हुए ही उसे सुलझाती थी, भले ही उसके अंदर कितना भी दुख का गुबार क्यों न भरा हो,और इन सबसे बच्चों पे अच्छा ही असर पड़ रहा था उसकी हंसमुख माँ का ,और सबसे बड़ी बात घर का माहौल हमेशा सकारात्मक और खुशनुमा रहता था।

रिद्धिमा के पति रोहन तो हमेशा कहते थे कि "ओ मेरी हँसमुख रानी" तुम्हारे आने से तो मेरी जिंदगी में बहार आ गयी और रिद्धिमा जोर से हँस के बोलती थी, देखो जी जब तक मुझे यमराज जी का भैंसा लेने नहीं आता तब तक मै अपनी जिंदगी खुल के जिउँगी, जो मन हो वो सब करूँगी वो भी अपने परिवार को खुश रखते हुए, (क्योंकि रिद्धिमा के पति भी उसके सारे शौक पूरे करते थे, वो चाहती तो बाहर जॉब भी कर सकती थी, उसे कोई भी इनकार न करता घर पर, लेकिन वो अपनी खुशी से ही घर पर रहकर अपने बच्चों की पूरी देखभाल और उन्हें प्यार देना चाहती थी, साथ ही पति को पूरा समय और घर सम्भालना, ये सब रिद्धिमा की ही मर्जी थी वो इसे बड़ी खुशी से करती थी,)

रिद्धिमा के पति उसकी बाते सुन के हंस पड़े अरे तुम भी न रिद्धिमा सच मे पागल हो ,कुछ भी बोलती रहती हो दिन भर बस तुम्हारी बाते सोच-सोच के ही मै हँसता रहता हूं खुद में, पता है सब मुझे आफिस में पागल समझने लगेंगे, ह्म्म्म सच मे पागल, तुम्हारी मेरे और मेरे परिवार के प्रति इतने प्यार और समर्पण को देख के मै सच मे तुम्हारे प्यार में पागल हो चुका हूं, और पता है तुम मेरे घर की लक्ष्मी हो मेरे परिवार की जड़ हो तुम, तुम्हारे खुश रहने और घर मे सकारात्मक वातावरण बना के रखने से ही आज मै इस मुकाम में पहुँचा हु, सबकी वजह सिर्फ और सिर्फ तुम ही हो।

रिद्धिमा अपने पति की बातें सुनकर इतनी भावुक हो गयी कि उसे रोना आ गया, रोहन ने रिद्धिमा को रोता देखा तो तुरंत अपने हृदय से लगा लिया, अरे पगली मेरी "हंसमुख रानी" कभी रोती भी है, मुझे ये आज पता चला, रोहन की बात सुनकर फिर रिद्धिमा भी जोर-जोर से हँस पड़ी।

सच है अगर पति-पत्नी एक दूसरे को एक समझे तो रिश्तो में खटास की कभी नोबत ही न आये, दोनो ही एक दूसरे को समान भाव से सम्मान दे और अपने बीच ईगो को न आने दे तो रिश्ता कितना मजबूत हो जाएगा।

लेकिन मैंने कई लोगों को देखा कि अगर बीवी आगे बढ़ रही है या पति से ज्यादा कमा रही है, तो पति के सम्मान को इतना ठेस पहुँ चता है,कि वो इस ईगो के कारण अच्छे-भले अपने बसे बसाये घर को बर्बाद कर देता है, वो ये नहीं सोचता कि दोनों के कमाने से बच्चों को बेहतर परवरिश और एजुकेशन दी जा सकती है आज के इस महँगाई के जमाने मे।

वही दूसरी ओर कई महिलाएं अगर किसी कारणवश उनके पति अपनी पत्नी के थोड़े से शौक पूरे न कर पाए तो, पति पे दबाव बना के, ताने मार-मार के उनकोे चिंता में डाल देती हैं और पति के साथ झगड़ा करके घर का पूरा माहोल खराब कर देती हैं, जिससे बच्चों के मानसिक स्तर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ने लगता है और वो छोटी सी उम्र में ही डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं...!!!

निशा रावल
बिलासपुर



Vote Add to library

COMMENT