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@dawriter

मै जीना हूँ तेरा, तू जीना है मेरा…

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कहते हैं‌ अगर हमसफर सच्चा और साथ देने वाला हो तो जिन्दगी जीने का मजा ही कुछ अलग सा हो जाता है। परेशानियां व उतार चढ़ाव तो हर किसी के जीवन में आते हैं लेकिन एक सच्चे साथ के चलते कब आकर चले जाते हैं पता ही नही चल‌ पाता। जीवन में प्यार का तड़का अकेलेपन के एहसास को‌ तो खत्म कर ही देता है‌ साथ ही साथ वक्त के चलते कई जख्मों पर भी मरहम लगा देता है। प्यार ही तो है‌ जो हमें अधूरे से पूरे होने का एहसास करा जाता है,अच्छा लगता है जब किसी के जीने की वजह हम‌ बनते हैं। एक खुबसूरत एहसास व जीवन का सबसे खुबसूरत सफर है प्यार का सफर।।।।।

कुछ ऎसा ही सफर रहा है मेरा मेरे प्यार के साथ….12 साल पहले हुई मुलाकात कब प्यार में बदल गयी पता ही नही चला,आज विवाह को नौ साल बीत चुके है लेकिन आज भी सब कुछ नया सा,ताजा सा लगता है। साल जरूर बीतते जा रहे हैं परंतु प्यार की खुशबू वही ताजे गुलाब की खुशबू जैसी है जो हमेशा महकती सी रहती है।।।। अक्सर कहते सुना है व देखने में भी‌ आया है कि‌ चाहे प्रेम विवाह हो या फिर घर वालों की मर्जी से कुछ समय पश्चात घर या फिर ऑफिस की जिम्मेदारियों से विवाहित जोड़े एक दूसरे को समय देना बंद कर देते हैं जिससे कि बात न हो पाने से अक्सर गलतफहमियाँ रिश्तों के बीच में घर कर जाती है जोकि सबसे बड़ा नुकसान का कारण बन जाता है व लगातार हो रही यह गलतियाँ एक रिश्ते के बीच में प्यार के एहसास को धीरे धीरे कम करने का सबसे बड़ा कारण बन जाता है।।। ज्यादातर हम सबकी जिन्दगी में यह हालात अक्सर पैदा हो ही जाते हैं….मेरे भी हुए है लेकिन वो प्यार ही क्या जो‌ इन सब हालातों से खुद को बाहर न निकाल पाये।।।। चाहे प्रेम विवाह ही क्यों न हुआ हो शुरुआती समय में एक दूसरे को समझना व एक दूसरे की आदतों को अपनाना थोड़ा कठिन हो रहा था फिर साथ ही साथ ससुराल वालों की अपनी अलग तानाशाही सोच….खैर क्या करा‌ जा सकता था अब शादी अपनी पसंद से की थी तो निभानी भी खुद ही थी,लेकिन एक बात समझ आ चुकी थी कि‌ जब हम किसी के साथ एक छत के नीचे रहते हैं शायद तभी उसको व उसके स्वभाव को‌ सही प्रकार से जान पाते हैं।।।। व शादी के बाद आपको केवल अपने पति के साथ ही नही बल्कि पूरे परिवार के व्यवहार के साथ सामंजस्य बैठाना बेहद आवश्यक हो‌ जाता है,आखिर घर की इज्जत व शान्ति की जो बात होती है।

इन सब समस्याओं के चलते हमे दोनो के बीच लड़ाई झगड़़ो ने भी जगह बना की थी,लेकिन बीतते वक्त व प्यार के साथ हमारा रिश्ता कमजोर होने की बजाय सही रूप से मजबूत होने लगा जोकि शादी से पहले भी इतना न था। मेरे पति द्वारा हर मुश्किल समय में मेरा साथ देना वो चाहे मेरी पहली सिजेरियन डिलिवरी ही क्यों न हो जब सबने मेरा साथ छोड़ दिया था तब केवल उनका ऑफिस के साथ साथ घर पर मेरी देखरेख करने का अहम निर्णय लेना या फिर मेरे कैरियर को बनाने के लिए हमेशा मुझे अभिप्रेरणा देना , व मेरी गलती होने पर भी अपने माता-पिता के सामने मुझे भला बुरा न कहकर प्यार से अकेले में समझा कर हमारे रिश्ते ‌का मान रखना,व उनके घर वालों के प्रति मेरे त्याग को‌ देखकर मेरी सराहना करना शायद यह सब बाते ही तो रही है जोकि हमारे रिश्ते को मजबूती की राह पर लेकर चली है व एक दूसरे के प्रति सम्मान को बढ़ावा देती है।।।।

अंत में बस इतना कहना चाहूँगी कि‌ हर शादी में कुछ न‌ कुछ समस्याएं होती ही है,इन समस्याओं को‌ अपने विवाहित जीवन पर हावी करने की बजाय उनका समाधान निकाल कर अपने इस बेहद करीबी रिश्ते को मजबूत बनाए। अपने हमसफर के बिना जीने की सोच से ही रूह तक कांप जाती है। शादी कोई खेल नही है,इसको निभाने का सलीका सीखिए।। केवल औरत को ही क्यों अगर आदमी को भी किसी जगह झुकना पड़े तो झिझ़क किस बात की।।।।यह प्यार का सच्चा रिश्ता जीवन में बार बार नही बनता तो बेहद जरूरी है कि‌ इसको दिमाग से नही दिल से निभाये..कुछ रूठे कुछ मनाये… प्यार की ताज़गी को बनाए….व एक दूसरे के लिए जीना सीखिए क्योकि कहते हैं ना कि‌ पसीना उम्र भर का उसकी “गोद” मे सूख जाएगा,”हमसफर”क्या है यह बुढ़ापे में समझ आएगा।

धन्यवाद ।

मोना कपूर



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