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@dawriter

मैं जैसी हूँ मुझे वैसा रहने दो

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वर्तिका और शिशिर की शादी को 1 साल हो गया है। वर्तिका जब नयी नवेली दुल्हन बन अपने नए घर आई तो हर नयी दुल्हन की तरह उसके भी कुछ अरमान थे। शुरू शुरु के कुछ दिन तो हँसी खुशी से बीते। नयी गृहस्थी ऐसी लग रही थी मानो उसे सब मिल गया हो। पर धीरे धीरे जैसे जैसे गृहस्थी की गाड़ी आगे बड़ी तो वास्तविकता की जमीन पर पैर पड़ा। हालाँकि बीच बीच में कभी कभी कुछ बातें ऐसी हो जातीं कि उसे बुरा लगता, पर फिर वो भी इसी मंत्र के साथ कि ‘ सबमे कुछ न कुछ तो कमी होती है, कोई परफेक्ट नहीं होता, और वैवाहिक जीवन में भी कभी कभी हमे एक दूसरे की बातें इग्नोर करनी पड़ती है तभी गृहस्थी की गाड़ी आगे बढ़ती है।’ अपनी शादी शुदा जिंदगी की खट्टी मीठी यादें बुनती।
पर आज……..!

आज कुछ ऐसा हुआ कि वर्तिका के सब्र का बाँध टूट गया। वो बहुत रोई। जिन बातों को वो आजतक इग्नोर करती रही, वो पति की सबसे बड़ी कमी बनके उसके सामने आयी।

वो बहुत बार कोशिश करती अपने पति को समझने और समझाने की पर ….. नाकाम रहती। अब क्या करे वो सहन नहीं होता उससे यह सब। माँ को फ़ोन करे, रोये उनके सामने या शिकायत करे। पर फिर उससे क्या होगा? वो रोती रही और सोचती रही। फिर उसने अपनी डायरी ली और …….!

Dear hubby,

मेरा आज आपको ये letter लिखने का एक ख़ास कारण है। इस एक साल में हमने कई अच्छे बुरे पल साथ बीतये हैं। और इस एक साल में मुझे आपसे प्यार भी बहुत मिला । आपने मेरी हर जरूरत का ख्याल रखा। परिवार से भी मुझे प्यार और अपनापन मिला। पर फिर भी इन सब के बावजूद हम कहीं न कहीं अभी भी एक दूसरे से दूर हैं। अभी भी शायद में कहीं न कहीं आप के दिल में अपने लिए जगह नहीं बना पाई और न ही आप मुझको अपने लिए ही ऐसा करने का मौका दे रहे हैं।

इसका कारण है आपका मेरी तुलना करना।आप कभी कभी मजाक में तो कभी मुझे सुनाने के लिए ऐसी बातें बोल देते हो जो मुझे और मेरे आत्मविश्वास को तोड़ देती हैं।

जैसे आप अकसर मुझे ये समझते हो की मुझे किसी से कैसे बात करनी चाहिए । आप हर वक़्त हर बात पर मुझे टोकते रहते हो ।आप मुझे मेरी गलती, जो की आपको लगती है, पर मुझे आँखे दिखाते हो। आपको याद है जब हम शादी के बाद पहली बार आपके दोस्त समर के घर डिनर पर गए थे। और खाना खाने के बाद जब हम सब बैठे थे, और हँसी मजाक हो रहा था। और मैं भी हँस रही थी। पर जब भी मैं आप की तरफ देखती आप का चेहरा एक अलग ही तस्वीर बयां करता। मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी। घर वापस आ कर जब मैंने आपसे पूछा की क्या हुआ तो आपने बोला ‘ तुम कैसे हँसती हो, तुम्हारी वजह से मेरी बेइज्जती हो गयी। इतनी जोर से और खुल कर कौन हँसता है, तुम अभी नयी दुल्हन हो।’ 

क्या!? मैं हैरान परेशान हो गयी थी की मेरी हँसी कैसे किसी की बेइज्जती का कारण हो सकती है। इसके बाद भी आप ऐसे ही किसी न किसी बात पर मुझे समझाते रहते । आप शायद भूल गए थे की आपने एक पढ़ी लिखी, independent लड़की से शादी की है। अच्छे बुरे की समझ मुझ में भी है। पर आप मुझे किस से दोस्ती करनी है,किससे नहीं ये भी बताते। हर बात पर ऐसा नहीं वैसा करो, वैसा नहीं ऐसा करो। आप मेरे पति हैं मेरे पिता नहीं । और इतना तो कभी वैसे मेरे पिता ने भी मुझे नहीं बाँधा।वो मुझे समझाते थे पर हमारी सोचने समझने और अपनी बात कहने की आज़ादी नहीं छीनते थे। आप तो मुझे मेरी बात कहने का मौका ही नहीं देते और अगर कभी मैं इसके बाद भी बोल देती थी तो आपकी नाराजगी सहनी पड़ती है। 

दूसरी बात जो की बड़ी अहम् है, मैं आपकी पत्नी आपकी अर्धांगिनी हूँ। मुझमें अपनी माँ को या अपनी माँ के गुणों को देखना बंद कीजिये। हम दोनों दो अलग अलग इंसान हैं जो अपने अपने तरीके से अपना रिश्ता निभा रही हैं। मैं अब थक चुकी हूँ। हर बात में आप मेरी तुलना अपनी माँ से करते हैं। खाना बनाने, उठने बैठने, आपकी देखभाल या फिर रिश्ते निभाना हर बात में आप मेरी उनसे तुलना बंद कीजिये। आप हर बार मेरे खाने में अपनी माँ के हाथ का स्वाद ढूंढते हो। मैं मानती हूँ की आपको उस स्वाद की आदत है पर इसका मतलब ये नहीं कि मैं अच्छा खाना नहीं बनाती। और हर घर का अपना एक माहौल एक तौर तरीका होता है। जैसे आपकी जुबान पर आपकी माँ के हाथ का स्वाद चढ़ा हुआ है वैसे ही मेरे हाथों में मेरी माँ के तरीके का हुनर है। आपको भले ही मेरे हाथ का खाना न पसंद हो, पर आजतक जब भी कोई मेहमान आया है वो मेरे हाथ के बने खाने की तारीफ करता है। और तारीफ से बढ़कर, मेरे आपके हिसाब से खाना न बनाने के बावजूद आजतक इस घर से कोई भूखा नहीं गया।

आप मेरा अपमान करते थे आजतक पर आज तो आपने अन्न का भी अपमान कर दिया। आप को खाना नहीं पसंद आया था तो कोई नहीं पर, आपने अपने गुस्से को इतनी हवा दी की आप भूल गए कि आपने खाने की प्लेट को फेंक दिया है। क्या अन्न का अपमान आपकी माँ के संस्कार हैं। नहीं, मुझे यकीन है कतई नहीं।पर….।

मेरी आज आपसे प्रेमपूर्वक यही विनती है की मुझे और मेरे अस्तित्व को किसी और से तुलना की भेंट न चढ़ायें। मत कोशिश कीजिये मुझे बदलने कि। मेरे लिये भी बड़ा मुश्किल हो रहा है आपको आपके इस रूप के साथ अपनाना पर फिर भी मैं कोशिश कर रही हूँ। तो आप भी कोशिश कीजिये मुझे यथावत अपनाने की। 

मैं एक खुले विचारों की औरत हूँ। मुझे लोगो से मिलना, दोस्ती करना, बातें करना अच्छा लगता है। कोई किसी के हँसने को कैसे बुरा कह सकता है ये बात पचाना मेरे लिए बड़ी मुश्किल है। पर फिर भी मैं कोशिश कर रही हूँ । तो प्लीज अब आप भी मैं जैसी हूँ, जो हूँ, चाहे वो मेरा हँसना हो या मेरा खाना बनाना, मुझे अपनाने की कोशिश कीजिये।

No one is perfect ….everyone is perfect with his/her imperfection. 

और अभी तो हमारे साथ की शुरुआत हुई है । हमे साथ एक लंबा सफर तय करना है। प्लीज् मुझे आप अपनी पत्नी ही समझे तो हमारे रिश्ते के लिए अच्छा होगा। 

Let our relationship be as it is meant to be.  Let the Love flourish between us.

Your beloved 

Wife

Image Source: vccoordinator



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