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@dawriter

मेरी भाभी भी तो है कुछ कुछ मेरे ही जैसी

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फोन उठाते ही अरे मनु पहचाना

मैं अदिती  

हाँ अदिती कैसी हो?

मैं तो बढ़िया हूँ, घर पे सब कैसे है तुम्हारी सास तो बहुत उम्र दराज है ना

हाँ यार अब तो 80 हो गयी.

अभी कैसी है तुम्हारे साथ ही है ना

न मेरे साथ नहीं है, सुबह 6 बजे से किचन में आवाज चालू हो जाती थी. अरे जब जरूरत नहीं है तो सुबह से क्यो उठना?  बहुत नखरे भी थे सब्जी से एक एक आलू अलग कर देती थी।

अदिति इस उम्र में नींद ज्यादा नहीं आती तो सबेरे उठ ही जायेगी न ...और आलू खाने से गैस होती होगी...

छोड़ न मनु अब तो मेरी ननद के पास है कभी कभार मन करता है तो कुछ दिन के लिए ले आते हैं, तुम बताओ कैसी हो?

मैं भी अच्छी हूँ लगी हुई हूँ घर गृहस्थी में 

अच्छा कितने लोग हो 

हम दो हमारे दो और माँ, .... अरे वाह आंटी तेरे साथ है मुझे लग ही रहा था तेरी भाभी को देख कर वो अच्छी नहीं थी आंटी को नहीं रख पायी होगी....फिर हम बेटियों को भी अपने माता पिता का करना चाहिए, आखिर शादी की वजह से हम अपना घर शहर सब छोड़ देते है 

नहीं अदिति शायद तुम गलत समझी माँ मतलब सास ....

अरे फिर तो बहुत बंधन होगा हमेशा की किट किट...

अभी मेरी भाभी के लिए तुम कह रही थी न कि वो मेरी माँ को नहीं रख पाती....और मैं अपने सास को अपने पास रखूँ तो बंधन

ये दोहरा मापदंड क्यो? 

सभी माता पिता है पूरा जीवन अपने बच्चों के लिए ही जिया है...हमे उनका आदर हमेशा करना चाहिए जो हम अपनी भाभी से उम्मीद करते है अपने माता पिता के लिए, उसी उम्मीद पे हमे भी खरे उतरना चाहिए। माता पिता ने जीवन दिया, जीवनसाथी दिया सास ससुर ने, और जिस तरह हमारे माता पिता हम बेटियो पे लाड़ रखते है उसी तरह उन्हे हमारी भाभीयो पे भी प्यार लुटाना चाहिए। एक साधारण सी बात हैै चाय का कप यदि बेटी के हाथ से छूट जाये तो कप गलती से टूट गया कहा जाता है और यदि बहू के हाथ से गिर जाऐ तो कहा जाता है कप तोड़ दिया, बस यही भावना को बदलने की आवश्यकता है।

बहू में दोष ही दोष है और बेटी तो बहुत अच्छी है पर बेटी का ससुराल गलत है ऐसा हर जगह तो नहीं हो सकता न. यदि बहू अच्छी है तो स्वीकार करिये, हो सकता है न आप भाग्यशाली हो। वैसे ही लडकी को भी ससुराल अच्छा मिल सकता है जो आपकी कल्पना में भी अंसभव हो, वो संभव हो सकता है बेटी के मन में ससुराल की गलत छवि का बीज मत रोपिये और बहु को अच्छे ससुराल के पेड़ की छाँव दिजिए। 

यदि बेटी आपका कल थी,

तो आज और आने वाला कल है बहुए ,

यदि बढ़ती उम्र की गुड़िया थी बेटियां,

तो बहुए है उम्र की ढ़लती साँझ की लाठीयां,

जिगर के टुकडे़ को भेजा है किसी के घर, तो किसी को अपना मान बनाकर लाये भी हो अपने घर. इसलिए भेद न करो बहुओ और बेटियो में, क्योकी मेरी भाभी भी तो है कुछ कुछ मेरे ही जैसी।

 

गौर अवश्य कीजिएगा , अच्छा लगे तो लाइक,कमेंट व शेयर अवश्य करें आपके विचारों का स्वागत है…..धन्यवाद।

Image Source:quora



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